भिवानी। नगर परिषद में हुए वित्तीय घोटाले की निष्पक्ष जांच के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने एसआईटी (विशेष जांच दल) गठित करने के आदेश दिए हैं। जस्टिस जगमोहन बंसल की एकल पीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता सुशील वर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किए। मामला वर्ष 2022 का है जिसे भिवानी बचाओ आंदोलन के संयोजक सुशील वर्मा ने उजागर किया था। इसमें नगर परिषद भिवानी में भारी वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए थे।
इस मामले में भिवानी पुलिस द्वारा पांच अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई थीं। नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष रणसिंह, उपाध्यक्ष मामन चंद सहित करीब 20 आरोपी गिरफ्तार किए गए थे। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा जहां सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने बताया कि सीबीआई की प्रारंभिक जांच में फंड की हेराफेरी स्पष्ट रूप से सामने आई है। जांच में यह भी पाया गया कि नगर परिषद के अधिकारियों ने निजी व्यक्तियों के साथ मिलीभगत कर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जिससे परिषद को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
ईडी ने की थी संपत्तियां अटैच, मामला पंचकूला विशेष कोर्ट में लंबित
इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा भी जांच की गई जिसमें 2023 में आरोपियों की संपत्तियों को अटैच किया गया। ईडी ने पंचकूला की विशेष अदालत में एफआईआर नंबर 149 के मामले में अपनी चार्जशीट दाखिल कर दी है और मामला विचाराधीन है।
ईडी करेगी चार अन्य एफआईआर की भी जांच
ईडी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता लोकेश नारंग ने कोर्ट को बताया कि एफआईआर नंबर 149 के अलावा दर्ज अन्य चार एफआईआर की जांच भी ईडी द्वारा की जाएगी। इस संबंध में भिवानी के पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर इन चारों एफआईआर से संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा गया है।
सीबीआई ने दिया था एसआईटी का सुझाव
सुनवाई के दौरान सीबीआई के अधिवक्ता ने सुझाव दिया कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए एसआईटी गठित करना अधिक उपयुक्त रहेगा ताकि निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो सके। उच्च न्यायालय ने सीबीआई की प्रारंभिक जांच और प्रस्तुत तथ्यों को ध्यान में रखते हुए आदेश पारित किया कि सीनियर आईपीएस अधिकारी अमिताभ सिंह ढिल्लों (अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक हरियाणा) के नेतृत्व में एसआईटी गठित की जाएगी। एसआईटी में दो अन्य सदस्य भी शामिल किए जाएंगे। एसआईटी पांच माह के भीतर अपनी रिपोर्ट ट्रायल कोर्ट में प्रस्तुत करेगी। वहीं याचिकाकर्ता को निर्देश दिया गया है कि वह इस मामले से संबंधित कोई भी जानकारी सोशल मीडिया या प्रिंट मीडिया में साझा न करें। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्तूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
ये था मामला
नगर परिषद में वित्तीय अनियमितता पर पांच एफआईआर दर्ज हुई थीं। इसमें एक्सिस बैंक में जमा एफडी की राशि का गबन किया गया। एसीबी द्वारा जांच की गई। मुख्य आरोपी नगर परिषद के तत्कालीन चेयरमैन रणसिंह यादव, बैंक मैनेजर नितेश अग्रवाल, विनोद गोयल व अन्य हैं। ईडी ने पंचकूला की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है। सीबीआई रिपोर्ट में जांच में लापरवाही की पुष्टि हुई है। इसी तरह नगर परिषद में फर्जी रसीद घोटाला हुआ जिसमें मुख्य आरोपी मामन चंद, सुरेश कुमार और संजय बंसल बनाए गए। यह मामला भिवानी कोर्ट में विचाराधीन है। ईडी ने भिवानी पुलिस से रिकॉर्ड तलब किया है। सीबीआई जांच रिपोर्ट में भिवानी पुलिस के जांच अधिकारी पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
वहीं फर्जी प्लॉट रजिस्ट्री घोटाले में मुख्य आरोपी मामन चंद, सुरेश कुमार और संजय बंसल हैं। ईडी ने भिवानी पुलिस से रिकॉर्ड मांगा है और सीबीआई जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि हो चुकी है। जोहड़ और शौचालय की जमीन पर अवैध कब्जे के मामले में मुख्य आरोपी रणसिंह यादव और मामन चंद शामिल हैं। भिवानी पुलिस ने एफआईआर दर्ज होने के चार वर्ष बाद भी न तो जांच पूरी की और न ही किसी आरोपी को गिरफ्तार किया। अब एसआईटी द्वारा पूरे मामले की जांच की जाएगी।