भिवानी। नगर परिषद में 10 लाख रुपये की कथित अवैध मांग, धमकी, सरकारी रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी और पद के दुरुपयोग से संबंधित शिकायत पर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। शिकायतकर्ता इंद्रपाल की याचिका पर 20 अगस्त को सुनवाई हुई जिसमें नगर परिषद की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया।
अदालत ने अगली सुनवाई सात दिसंबर को निर्धारित की है। हाईकोर्ट के अधिवक्ता हर्षित जांगड़ा ने बताया कि 20 अगस्त को न्यायमूर्ति पंकज जैन की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से वरिष्ठ उप महाधिवक्ता ने नोटिस स्वीकार किया। वहीं नगर परिषद भिवानी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने भी नोटिस स्वीकार करते हुए जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।
याचिकाकर्ता इंद्रपाल की शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नगर परिषद भिवानी के तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी सहित संबंधित व्यक्तियों ने उनसे 10 लाख रुपये की कथित अवैध मांग की। राशि नहीं देने पर बेदखली की कार्रवाई करने और सरकारी रिकॉर्ड में संपत्ति को नगर परिषद की संपत्ति दर्शाने की धमकी देने का आरोप है।
शिकायत में वर्ष 2017, 2023, 2025 और 2026 से संबंधित विभिन्न जांच रिपोर्टों, पैमाइश रिपोर्ट, भवन रिकॉर्ड तथा न्यायालय में चल रही कार्यवाही का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि एक ही संपत्ति के संबंध में अलग-अलग स्तरों पर विरोधाभासी रिपोर्ट सामने आईं और सरकारी रिकॉर्ड में कथित रूप से बदलाव किए गए।
याचिकाकर्ता ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने, प्रथम दृष्टया गंभीर अपराध पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई करने तथा जांच पूरी होने तक रिकॉर्ड से छेड़छाड़ और गवाहों पर दबाव रोकने की मांग की है।
ये था मामला
भिवानी की अशोका कॉलोनी निवासी इंद्रपाल सिंह ने 28 जनवरी को उपायुक्त भिवानी सहित अन्य अधिकारियों को शिकायत दी थी। इसमें नगर परिषद भिवानी के तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी और अन्य लोगों पर कथित तौर पर 10 लाख रुपये मांगने तथा संपत्ति से बेदखल करने की धमकी देने के साथ पीपी एक्ट के तहत झूठी प्राथमिकी दर्ज कराने की धमकी देने के आरोप लगाए गए थे।
इंद्रपाल ने शिकायत में बताया कि नगर परिषद की ओर से खसरा नंबर 501 में पहले संपत्ति को नगर परिषद की बताया गया था जबकि इसी खसरा नंबर को प्रवीन के मामले में निजी संपत्ति करार दिया गया। शिकायत में यह भी हवाला दिया गया कि नगर परिषद और तहसीलदार भिवानी की पैमाइश रिपोर्ट में इंद्रपाल की संपत्ति पर किसी प्रकार का अवैध कब्जा नहीं दर्शाया गया है।
इसके बावजूद इंद्रपाल पर रिकॉर्ड में हेराफेरी कर संपत्ति से बेदखल करने और पद का दुरुपयोग करते हुए पीपी एक्ट के तहत झूठा मुकदमा दर्ज कराने की धमकी देकर 10 लाख रुपये मांगने के आरोप लगाए गए हैं।