लघु सचिवालय में आयोजित कार्यक्रम में न्यायमूर्ति संदीप मुद्गिल को सम्मानित करते जिला बार एसोसिए
भिवानी। जिला बार एसोसिएशन ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एवं भिवानी के इंस्पेक्टिंग जज संदीप मुद्गिल के समक्ष दूसरी फैमिली कोर्ट, लेबर कोर्ट की स्थापना, एसडीएम, तहसीलदार व नायब तहसीलदार की अदालतों की कार्यवाही ऑनलाइन करने तथा ओल्ड कोर्ट कैंपस को न्यू कोर्ट कैंपस से जोड़ने के लिए कॉरिडोर निर्माण सहित चार प्रमुख मांगें रखीं। यह मांगें जिला बार एसोसिएशन सभागार में आयोजित सम्मान समारोह के दौरान रखी गईं।
सभागार पहुंचने पर जिला बार एसोसिएशन के प्रधान संदीप तंवर, सचिव विनोद भारद्वाज सहित अन्य पदाधिकारियों ने न्यायमूर्ति संदीप मुद्गिल का स्वागत किया। इस अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीआर चालिया को भी स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह के दौरान एसोसिएशन की ओर से वकीलों और वादियों की सुविधा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। अधिवक्ताओं ने कहा कि दूसरी फैमिली कोर्ट और लेबर कोर्ट की स्थापना से मामलों का त्वरित निपटारा संभव होगा वहीं निचली अदालतों की कार्यवाही ऑनलाइन होने से आमजन को राहत मिलेगी।
इस पर न्यायमूर्ति संदीप मुद्गिल ने उपायुक्त को निर्देश जारी करते हुए कहा कि एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदार की अदालतों की कार्यवाही को शीघ्र ऑनलाइन व्यवस्था से जोड़ा जाए। उन्होंने ओल्ड कोर्ट और न्यू कोर्ट कैंपस को जोड़ने के लिए कॉरिडोर निर्माण सहित अन्य मांगों पर भी सकारात्मक रूप से विचार किए जाने और जल्द समाधान का आश्वासन दिया।
न्यायमूर्ति संदीप मुद्गिल ने अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता और तकनीक का समावेश समय की आवश्यकता है। न्याय प्रक्रिया को सरल, सुलभ और पारदर्शी बनाना न्यायपालिका की प्राथमिकता है। इस अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश डीआर चालिया ने कहा कि एसडीएम और तहसीलदारों की अदालतों के मामलों के ऑनलाइन होने से आम जनता को बड़ी सुविधा मिलेगी और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी।
जिला बार एसोसिएशन के प्रधान संदीप तंवर और सचिव विनोद भारद्वाज ने कहा कि न्यायमूर्ति संदीप मुद्गिल की निष्पक्ष और पारदर्शी कार्यशैली से न्याय प्रणाली में आम जनता का विश्वास मजबूत हुआ है। उन्होंने कहा कि जिला न्यायालय परिसर में प्रशासनिक सुधारों और अधिवक्ताओं व मुवक्किलों की सुविधाओं पर दिए जा रहे ध्यान से अदालती कामकाज में आने वाली बाधाएं दूर हुई हैं।