भिवानी। गणेश चतुर्थी का पर्व जिलेभर में भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। गणपति बप्पा मोरया और मंगल मूर्ति मोरया के जयकारों से वातावरण गूंज उठा। शहर के विभिन्न स्थानों पर गणेश प्रतिमाओं की स्थापना कर विधिवत पूजन-अर्चना की गई।
चूहड़ सिंह की बाजारी पुराना पटवार खाना में भगवान श्रीगणेश की प्रतिमा बैंड-बाजों और भक्तों के नाच-गान के साथ स्थापित की गई। इस दौरान पूरा माहौल गणपति के जयकारों से भक्तिमय हो गया। क्षेत्रवासी अनूप टेला ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार महर्षि वेदव्यास ने गणेश चतुर्थी से महाभारत कथा गणेश भगवान को लगातार 10 दिनों तक सुनाई थी।
भगवान गणेश ने इसे अक्षरश: लिखकर महाभारत की रचना की। लगातार लेखन के कारण गणेश भगवान का शरीर गर्म हो गया था, तब वेदव्यास ने उन्हें सरोवर में स्नान कराया। इसी परंपरा के चलते भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गणेश स्थापना और चतुर्दशी को विसर्जन का विधान है। इस मौके पर मास्टर जयप्रकाश, आदेश कुमार, सुभाष, अनुराग, हरिप्रकाश, मटरू, रमणिक, कर्ण, अरुण, अंकित, शुभम, मुकेश, धर्मबीर और शालू मौजूद रहे।
भगवान गणेश बुद्धि, ज्ञान और समृद्धि के देवता : पदम
भिवानी। भारत माता सेवा मंडल की ओर से एमसी कॉलोनी सेंट्रल पार्क में गणेश चतुर्थी के अवसर पर पूजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान वैदिक रीति से पंडित पूर्णमल शर्मा, बलराज शर्मा, मुरारी लाल शर्मा, विशम्बर शर्मा और अंगना राम शर्मा ने गणेश प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। मंडल अध्यक्ष अधिवक्ता पदम सिंह चौहान और भगवान दास रखेजा ने कहा कि भगवान गणेश को बुद्धि, ज्ञान और समृद्धि का देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत सबसे पहले गणपति पूजन से की जाती है। यह पर्व केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखता बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का भी संदेश देता है। इस अवसर पर महाबीर तेनेजा, दुर्गा दास रहेजा, रमेश यादव सहित कई लोग उपस्थित रहे।