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Bhiwani News: बवानीखेड़ा में गिर रही बड़ा जोहड़ की चहारदीवारी

Wed, 16 Jul 2025 01:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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कस्बा बवानीखेड़ा के बड़ा जोहड़ की टूटी चहारदीवारी। 
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नरेंद्र भाकर
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बवानीखेड़ा। राज्य सरकार प्राचीन धरोहरों को संजोकर रखने की बात कर रही है जबकि बवानीखेड़ा में नगर पालिका प्रशासन की अनदेखी के कारण ही जोहड़ की चहारदीवारी लगातार टूट रही है। सोमवार रात भी जोहड़ के किनारे स्थित झोपड़ीनुमा प्राचीन विश्राम स्थल टूट कर बह गया। इस कारण लोगों में नगर पालिका प्रशासन के प्रति रोष है।
कस्बा स्थित प्रसिद्ध बड़ा जोहड़ लबालब होने के बावजूद उसके किनारे स्थित कुएं, मंदिर, गोघाट की चहारदीवारी जर्जर है। लोगों का कहना है कि नगर पालिका मछली पालन के लिए तो जोहड़ को पट्टे पर देती है लेकिन जोहड़ के रखरखाव की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही।
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संवाद न्यूज एजेंसी की टीम मंगलवार सुबह घटनास्थल पर पहुंची तो कस्बावासियों ने बताया कि यह तालाब बवानीखेड़ा गांव बसने से पहले का बना है। ऐसे में कस्बे के लिए एक अमूल्य धरोहर है लेकिन प्रशासन इसका संरक्षण नहीं कर रहा है।
कम लोग कुएं का पानी पीते हैं। इसके बावजूद कस्बे में अनेक जोहड़, कुएं, तालाब और बावड़ी को लोग सौभाग्य का प्रतीक बताते हैं। ये सभी धरोहर होने के साथ ही लोग इनका प्रयोग भी कर रहे हैं।
लोगों ने बताया कि सोमवार रात जो धरोहर ढह गई, वह भविष्य में दोबारा नहीं मिलेगी। इसलिए सी विष्णु तंवर, अजीत शर्मा, दीपू सैनी, संदीप भारद्वाज, मुकेश कुमार, जगदीप सिंह आदि लोगों ने नगर पालिका प्रशासन से बची धरोहरों के संरक्षण की अपील की है।

जोहड़ के किनारे हैं अनेक धार्मिक स्थल
कस्बे के बड़ा जोहड़ किनारे प्रसिद्ध बाबा जरणानाथ मंदिर, 160 साल पुराना शिव मंदिर, काली माता मंदिर, गौरीशंकर मंदिर, बालाजी मंदिर भी जोहड़ किनारे हैं। ये सभी मंदिर लोगों के लिए आस्था का केंद्र हैं। तालाब के किनारे कुएं, रामबाग, गोघाट स्थित हैं। तालाब के एक तरफ रेलवे लाइन है। प्राचीन समय में ये तालाब आबादी से दूर बाहरी क्षेत्र में बना था लेकिन समय के साथ कस्बे की आबादी बढ़ी तो तालाब भी निकट हो गया।

बड़ा जोहड़ कस्बे के लिए अमूल्य धरोहर है। इसको बचाया जाना चाहिए। जोहड़ किनारे बने गोघाट टूट कर पानी में बहने के कगार पर है। इसलिए नगर पालिका प्रशासन को जोहड़ का सौंदर्यीकरण करना चाहिए। -संदीप भारद्वाज, स्थानीय निवासी।

नगर पालिका प्रशासन से जोहड़ को सुधारने और संवारने की मांग की गई है। इसके बावजूद अनदेखी के कारण जोहड़ किनारे स्थित विश्राम स्थल ढह गया। अगर समय रहते इसे सुधारा गया होता तो ये नुकसान नहीं होता। -विष्णु तंवर, कस्बावासी।

जोहड़ के किनारे मंदिर भी बने हैं। इनकी चहारदीवारी भी खतरे में है। जोहड़ की चहारदीवारी हमारे बुजुर्गों ने बनाई थी। इसके टूटने से प्राचीन धरोहर गायब हो गई है। अब ऐसा निर्माण दोबारा कभी नहीं हो सकता। -महंत नरेश नाथ, डेरा बाबा जरणानाथ।

जोहड़ के किनारे बने कुएं से लोग आज भी पानी लेते हैं। यह धरोहर कस्बावासियों के लिए सौभाग्य की बात है। प्रशासन को सकारात्मक सोच के साथ जोहड़ को बचाने के लिए मरम्मत का कार्य शुरू करवाना चाहिए। -अजीत शर्मा, कस्बावासी।
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पिछले दिनों हुई सदन की बैठक में कस्बे के सभी जोहड़ों के सौंदर्यीकरण के लिए राशि निर्धारित की गई है। इसका एस्टीमेट बनाकर सरकार के पास भेजा गया है। वहां से बजट मिलने पर सबसे पहले जोहड़ की मरम्मत का कार्य शुरू किया जाएगा। -सुंदर अत्री, अध्यक्ष, नगर पालिका बवानीखेड़ा।
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