भिवानी। वातावरण को धुआं मुक्त बनाने के लिए जिला प्रशासन ने फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर सख्त निगरानी शुरू कर दी है। डीसी साहिल गुप्ता के निर्देशानुसार कृषि विभाग ने जिले में फसल अवशेषों में आगजनी रोकने के लिए विशेष टीमों का गठन किया है। ये टीमें लगातार गश्त कर रही हैं और आगजनी करने वाले किसानों पर नजर रख रही हैं।
कृषि विभाग के उप निदेशक डॉ. विनोद फौगाट ने बताया कि अभी तक जिले में फसल अवशेष जलाने का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन विभाग पूरी सतर्कता के साथ ‘जीरो बर्निंग’ का लक्ष्य लेकर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि मोटे फसल अवशेष जलाना पर्यावरण और खेत दोनों के लिए हानिकारक है, इसलिए इसे पूरी तरह रोका जाना जरूरी है।
जिला स्तर पर खंड और गांव स्तरीय निगरानी समितियों का भी गठन किया गया है, जिनमें राजस्व, पंचायत, पुलिस और कृषि विभाग के अधिकारी व कर्मचारी शामिल हैं। यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही पाई गई तो उसके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
फसल अवशेष जलाने पर जुर्माना बढ़ा
डॉ. विनोद फौगाट ने बताया कि वर्ष 2024 की तुलना में इस वर्ष केंद्र सरकार ने फसल अवशेष जलाने पर जुर्माने की राशि बढ़ा दी है। दो एकड़ तक आगजनी पाए जाने पर 5 हजार रुपये, पांच एकड़ तक 10 हजार रुपये और उससे अधिक क्षेत्र में 30 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके साथ ही दोषी किसान के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी और उसकी ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ पोर्टल में रेड एंट्री की जाएगी। कृषि विभाग और जिला प्रशासन फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए पूरी तरह तैयार है और इसे लेकर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।