भिवानी। लघु सचिवालय स्थित डीआरडीए सभागार में राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिला टीबी फोरम की समीक्षा बैठक हुई। सिविल सर्जन डॉ. रघुबीर शांडिल्य ने कहा कि टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करने के लिए वर्ष 2026-27 तक हर संभावित मरीज की पहचान, समय पर जांच और पूरा उपचार सुनिश्चित करना होगा।
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक खांसी, बुखार, भूख कम लगने जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करवाएं। टीबी मरीजों के संपर्क में आए परिजनों की भी स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार जांच और निवारक उपचार कराया जाए। एमडीआर टीबी मरीजों के उपचार पर विशेष ध्यान देने और किसी भी मरीज से भेदभाव नहीं करने की अपील की। गांवों में सरपंचों, पंचायत प्रतिनिधियों और सामुदायिक स्वयंसेवकों की मदद से संभावित मरीजों की जांच व उपचार करवाने पर जोर दिया।
जिला टीबी उन्मूलन नोडल अधिकारी डॉ. सुमन विश्वकर्मा ने बताया कि निक्षय मित्र पहल 9 सितंबर 2022 को शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य टीबी मरीजों की पहचान, उपचार में सहयोग और पोषण सहायता के जरिये उन्मूलन अभियान को मजबूत करना है। वर्ष 2023 में जिले की 59 पंचायतों को कांस्य श्रेणी मिली। वर्ष 2024 में 116 पंचायतों ने उपलब्धि हासिल की, जिनमें 41 रजत और 75 कांस्य श्रेणी में शामिल थीं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में टीबी मुक्त पंचायत एवं वार्ड अभियान के तहत जिले की 153 पंचायतों और 12 वार्डों का उल्लेख किया गया।