भिवानी। सिवानी झुप्पा से सोनीपत जाने वाली 400 केवी टावर लाइन के लिए प्रभावित भूमि के न्यायोचित मुआवजे को लेकर मंगलवार को डीआरडीए हॉल में जिला प्रशासन, किसान प्रतिनिधियों और प्रभावित किसानों के बीच संयुक्त बैठक हुई। बैठक में किसानों ने हिसार जिले के बराबर भूमि मूल्यांकन की मांग उठाई जबकि प्रशासन ने इस मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के लिए कुछ समय मांगा।
बैठक में जिला प्रशासन की ओर से उपायुक्त साहिल गुप्ता, अतिरिक्त उपायुक्त बाबूलाल करवा, एसडीएम भिवानी महेश कुमार, एसडीएम सिवानी विजया मलिक, एसडीएम तोशाम संदीप कुमार तथा सीटीएम अनिल कुमार मौजूद रहे। किसानों की ओर से किसान सभा के जिला उपप्रधान कामरेड ओमप्रकाश, कर्ण सिंह जैनावास, जिला सचिव मास्टर जगरोशन, जिला कोषाध्यक्ष मास्टर उमराव सिंह के अलावा तोशाम, बवानीखेड़ा और भिवानी तहसीलों के प्रभावित किसान शामिल हुए।
किसान नेताओं ने जिला प्रशासन को बताया कि चारों तहसीलों में टावर स्थापित किए जाने वाली भूमि के लिए निर्धारित रेट काफी कम हैं। उनका कहना था कि भिवानी जिला एनसीआर क्षेत्र में आता है तथा यहां की कृषि भूमि हिसार जिले की तुलना में अधिक उपजाऊ है। साथ ही जिले का भूजल स्तर भी हिसार से बेहतर है। इसके बावजूद किसानों को हिसार जिले के बराबर मूल्यांकन और मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर किसानों ने प्रशासन के समक्ष अपना असंतोष जताते हुए अपनी समस्याएं रखीं।
बैठक के दौरान जिला प्रशासन ने भी अपना पक्ष रखते हुए अपनी प्रशासनिक सीमाओं से किसानों को अवगत कराया। बातचीत के दौरान प्रशासन ने किसानों की हिसार के बराबर भूमि मूल्यांकन की मांग पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के लिए कुछ समय मांगा ताकि इस विषय को संबंधित प्राधिकरण के समक्ष रखकर आवश्यक स्वीकृति प्राप्त की जा सके। प्रशासन ने किसानों से अपील की कि वे खेतों में टावरों की निशानदेही की प्रक्रिया में बाधा न डालें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि टावर किसानों की सहमति, आपसी समझौते और निर्धारित नियमों के पालन के बाद ही स्थापित किए जाएंगे।
इस पर किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि वे सभी प्रभावित किसानों की सहमति लेने के बाद ही इस मामले में आगे बढ़ेंगे। प्रभावित किसानों ने प्रशासन को स्पष्ट कर दिया कि जब तक उन्हें न्यायोचित और वाजिब मुआवजा नहीं मिलेगा तब तक वे अपनी स्वीकृति नहीं दे सकते। बैठक में बलियाली गांव से रामोतार, संजय कुमार, सुरेंद्र कुमार, खैराती लाल और रमेश कुमार, सिढ़ान से रणधीर सांगवान तथा सुमराखेड़ा से रमेश चंद्र सहित अन्य प्रभावित किसान भी मौजूद रहे।