मातृभाषा हिंदी में ही हमारे होनहार पिछड़ रहे हैं। इस साल हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की ओर से घोषित 10वीं और 12वीं के परिणाम में 37292 परीक्षार्थी हिंदी विषय में फेल हो गए। 4167 को कंपार्टमेंट आई। 34754 परीक्षार्थी तो अकेले 10वीं कक्षा में हिंदी विषय में फेल हो गए। ये ही नहीं ऐसे बच्चों की संख्या भी हजारों में है जो हिंदी में बमुश्किल पास ही हो पाए यानी 35 से 50 फीसदी तक ही अंक हासिल किए। विशेषज्ञों का मानना है कि अंग्रेजी, गणित, विज्ञान जैसे विषयों के बढ़ते दबाव के कारण विद्यार्थी हिंदी में पिछड़ रहे हैं।
सीनियर सेकेंडरी ( 12वीं कक्षा)
वर्ष कुल परीक्षार्थी कंपार्टमेंट फेल पास प्रतिशत
एक्सपर्ट व्यू
हिंदी को आजकल बच्चे गंभीरता से नहीं लेते। बच्चे अन्य भाषाओं में ज्यादा जोर देते हैं। हिंदी का व्याकरण ज्ञान बच्चों में बहुत कम है। इसी कारण बच्चे ज्यादा गलतियां करते हैं। स्कूली शिक्षा में इसे सुधारा न जाए तो आगे यह समस्या बनती है। सोशल मीडिया ने आजकल बच्चों की पुस्तक पढ़ने की आदत को कम कर दिया है। अब नोवल, पुस्तकें बच्चे बहुत कम पढ़ते हैं। आज के बच्चे मोबाइल तक सीमित रह गए हैं। स्कूलों में हिंदी के अध्यापकों की भी कमी है। शिक्षकों की गुणवत्ता में भी काफी कमी आई है। यह भी एक बड़ा कारण है कि बच्चे हिंदी में पिछड़ रहे हैं। - बीडी आर्य, सेवानिवृत्त हिंदी प्रोफेसर और सेवानिवृत्त प्रिंसिपल।