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हिंदी दिवस: मातृ भाषा में ही पिछड़ रहे हरियाणा के होनहार, इस साल 10वीं-12वीं में 37,292 हुए फेल

Wed, 14 Sep 2022 04:01 AM IST
भूपेंद्र सिंह शिव कुमार, संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी (हरियाणा)

सार

हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड में इस साल 10वीं और 12वीं में 37,292 फेल तो 4,167 की कंपार्टमेंट आई। हर साल हिंदी विषय में औसतन 32,000 से अधिक परीक्षार्थी फेल हो रहे हैं। चार साल में बोर्ड परीक्षाओं के हिंदी विषय में 1,35,181 परीक्षार्थी फेल हुए हैं। 
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विस्तार
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मातृभाषा हिंदी में ही हमारे होनहार पिछड़ रहे हैं। इस साल हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की ओर से घोषित 10वीं और 12वीं के परिणाम में 37292 परीक्षार्थी हिंदी विषय में फेल हो गए। 4167 को कंपार्टमेंट आई। 34754 परीक्षार्थी तो अकेले 10वीं कक्षा में हिंदी विषय में फेल हो गए। ये ही नहीं ऐसे बच्चों की संख्या भी हजारों में है जो हिंदी में बमुश्किल पास ही हो पाए यानी 35 से 50 फीसदी तक ही अंक हासिल किए। विशेषज्ञों का मानना है कि अंग्रेजी, गणित, विज्ञान जैसे विषयों के बढ़ते दबाव के कारण विद्यार्थी हिंदी में पिछड़ रहे हैं। 

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आज पूरा देश हिंदी दिवस मना रहा है। इसके पीछे कारण है आज ही के दिन वर्ष 1949 में संविधान सभा ने हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाया था। हिंदी हमारी मातृभाषा है। हर साल हिंदी दिवस पर इसे बढ़ाने, इसके प्रचार-प्रसार पर जोर दिया जाता है। मगर परिणाम विपरीत हो रहा है। विद्यार्थी हिंदी विषय में ही लगातार पिछड़ते जा रहे हैं।

यह भी पढ़ें : हिंदी दिवस: हिंदी को राष्ट्रीय भाषा का दर्जा दिलाने के लिए लाठियां खाईं, सरदार सिंह ने साझा किए संस्मरण
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इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की 10वीं, 12वीं की परीक्षाओं में औसतन हर साल 35000 तक विद्यार्थी फेल हो रहे हैं। फेल होने वाले विद्यार्थियों की संख्या 10वीं कक्षा में ज्यादा है। पिछले चार साल में 135181 परीक्षार्थी हिंदी विषय में फेल हो चुके हैं। संवाद 

हिंदी के शिक्षकों का टोटा, कैसे हो पढ़ाई
प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। शिक्षा मंत्री ने पिछले दिनों विधानसभा में बताया है कि राज्य के सरकारी स्कूलों में 35,980 पद अध्यापकों के खाली हैं। इनमें हिंदी विषय के अध्यापकों के काफी पद रिक्त है। जब स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षक ही नहीं है तो बच्चों की पढ़ाई कैसी होगी और शिक्षा व्यवस्था कैसी होगी सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। 

कब-कब कितने परीक्षार्थी हुए फेल
सेकेंडरी (10वीं कक्षा)
वर्ष                कुल परीक्षार्थी             कंपार्टमेंट                     फेल            पास प्रतिशत

  • 2019             364967                    547                      58405             83.62
  • 2020             337691                    338                      32205             90.30
  • 2022             326487                    2798                    34754             88.50


सीनियर सेकेंडरी ( 12वीं कक्षा) 
वर्ष                कुल परीक्षार्थी               कंपार्टमेंट              फेल            पास प्रतिशत

  • 2019             174304                    1066                   4180             96.99
  • 2020             194101                    1036                   3099             97.87
  • 2022             223223                     1369                   2538             98.27                       


एक्सपर्ट व्यू
हिंदी को आजकल बच्चे गंभीरता से नहीं लेते। बच्चे अन्य भाषाओं में ज्यादा जोर देते हैं। हिंदी का व्याकरण ज्ञान बच्चों में बहुत कम है। इसी कारण बच्चे ज्यादा गलतियां करते हैं। स्कूली शिक्षा में इसे सुधारा न जाए तो आगे यह समस्या बनती है। सोशल मीडिया ने आजकल बच्चों की पुस्तक पढ़ने की आदत को कम कर दिया है। अब नोवल, पुस्तकें बच्चे बहुत कम पढ़ते हैं। आज के बच्चे मोबाइल तक सीमित रह गए हैं। स्कूलों में हिंदी के अध्यापकों की भी कमी है। शिक्षकों की गुणवत्ता में भी काफी कमी आई है। यह भी एक बड़ा कारण है कि बच्चे हिंदी में पिछड़ रहे हैं। - बीडी आर्य, सेवानिवृत्त हिंदी प्रोफेसर और सेवानिवृत्त प्रिंसिपल।

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हिंदी हमारी मातृभाषा है और हिंदी का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा होना चाहिए। जब तक मातृभाषा का ज्ञान नहीं होगा तो बच्चे में नैतिक शिक्षा नहीं होगी। इसके बिना बच्चा गुरुजनों, माता-पिता का सम्मान नहीं करेगा। आज हमारे बच्चे अंग्रेजी शिक्षा, सभ्यता का अनुसरण कर रहे हैं, जो कि गलत है। हमें बच्चों को मातृ भाषा, शिक्षा का ज्ञान देना चाहिए। - प्रो. जगबीर सिंह, चेयरमैन, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड।

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