क्रिकेट कोच राजबीर मेहरा की 11वीं पुण्यतिथि पर त्रिवेणी रोपित करते चरणदास महाराज।
भिवानी। त्रिवेणी का आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दोनों कारणों से बहुत महत्व है। एक तरफ जहां माना जाता है कि त्रिवेणी को हिंदू देवताओं की त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु और महेश उनमें निवास करते हैं और दिव्य व सकारात्मक ऊर्जा से जुड़े है। वहीं दूसरी तरफ पूर्ण विकसित त्रिवेणी को प्राकृतिक धर्मशाला भी कहा जाता है। क्योंकि पर्यावरण के लिए एक बार जब हम उन्हें लगाते हैं, तो वे सैकड़ों वर्षों तक पर्यावरण को लाभ पहुंचाते हैं।
यह बात बालयोगी महंत चरणदास महाराज ने हनुमान ढाणी स्थित हनुमान जोहड़ी मंदिर धाम की श्रीराम वाटिका में क्रिकेट कोच राजबीर मेहरा की स्मृति पर त्रिवेणी रोपित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि राजबीर मेहरा क्रिकेट कोच के साथ-साथ पर्यावरण प्रेमी थी। इसीलिए उनकी 11वीं पुण्यतिथि पर युवा जागृति एवं जनकल्याण मिशन ट्रस्ट द्वारा महात्मा ज्योतिबा फूले धर्मार्थ ट्रस्ट के सहयोग से त्रिवेणी रोपित की गई। इस दौरान सान्निध्य बालयोगी महंत चरणदास महाराज का रहा।
चरणदास महाराज ने कहा कि पीपल या बरगद का वृक्ष एक हजार साल तक जीवित रह सकता है। नीम के पेड़ अधिकतम 100 साल तक जीवित रहते हैं। पीपल और बरगद में एक विशेष गुण भी होता है जो उन्हें दिन के 24 घंटे आक्सीजन छोड़ने की क्षमता देता है। इसलिए हमारे ऋषियों ने कहा कि ये पेड़ पवित्र हैं और इनमें देवताओं का निवास है। महात्मा ज्योतिबा फूले धर्मार्थ ट्रस्ट के अध्यक्ष रमेश सैनी ने कहा कि पीपल, नीम व बरगद के पेड़ न केवल पर्यावरण को संतुलित बनाते है, बल्कि इनमें औषधियों का भंडार है। इस मौके पर राजू मेहरा, पर्यावरण प्रहरी विजय सिंहमार, अमन मेहरा, अमरजीत मेहरा, राहुल मेहरा, राजेश मेहरा उपस्थित रहे। संवाद