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लाइसेंस फीस को लेकर दुकानदार लाल-पीले

Wed, 02 Sep 2015 12:44 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, भिवानी
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लाइसेंस फीस को लेकर शहर के लहगभग 13 हजार दुकानदार व छोटे व्यवसायी गुस्से में हैं। गुस्सा इस बात को लेकर है कि लाइसेंस फीस का प्रावधान इसी वर्ष किया गया, लेकिन नगर परिषद पिछले पांच साल से टैक्स वसूली पर आमादा है।
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 इसके लिए नप ने अब दुकानदारों को नोटिस जारी किए हैं। करीब पांच हजार दुकानदारों को नोटिस दिए गए हैं। नप अधिकारियों की दलील है कि लाइसेंस फीस का प्रावधान पहले से है, बस डिस कन्टीन्यू हो गया था। इस कारण पीछे की भी रिकवरी की जा रही है।


नगर परिषद ने इस वर्ष फरवरी-मार्च माह में हुई बैठक में सभी दुकानदारों, बैंक्वेट हॉल, होटल संचालकों समेत सभी कमर्शियल कार्य करने वालों से लाइसेंस फीस वसूलने का प्रस्ताव पास किया। चाय बेचने वाले से लेकर रेस्टोरेंट, बैंक्क्वेट हॉल संचालक, प्राइवेट अस्पताल यहां तक की प्राइवेट स्कूलों के लिए भी लाइसेंस फीस तय की गई।
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अब लाइसेंस वसूली के लिए नोटिस जारी किये गए है। नोटिस देख सभी हैरान रह गए। इस साल प्रावधान करने के बावजूद फीस वसूली जा रही है कि पिछले पांच वर्षों की।

जिनकी छोटी दुकानें हैं उनका भी सात सौ से एक हजार रुपये फीस बन रही रही है। जबकि बड़े बैंक्क्वेट हॉल संचालकों, होटल संचालकों के तो 20 से 25 हजार रुपये फीस बनती है।

नप की ओर से भेजे बिलों में बकायदा लिखा गया है कि 2010-11 से 2015-16 तक के लाइसेंस फीस ली जा रही है। पांच वर्ष की लाइसेंस फीस लिए जाने से दुकानदार खफा हैं और इसका विरोध कर रहे हैं।

दुकानदारों का कहना है कि जब प्रावधान इस वर्ष किया तो पिछले वर्षों का क्यों वसूला जा रहा है।
घंटाघर पर दुकान चलाने वाले इंद्र कुमार व अनिल ने बताया कि  नगर परिषद पिछले पांच वर्षों की लाइसेंस फीस वसूल रहा है।

यही सब प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली में किया जा रहा है। काफी दुकानदार हमेशा टैक्स भरते आए हैं मगर नप के पास रिकार्ड उपलब्ध नहीं है।

12 हजार दुकान, एक हजार होटल, रेस्टोरेंट, अस्पताल
शहर में करीब 12 हजार दुकानें हैं। इनके अलावा एक हजार होटल, रेस्टोरेंट, प्राइवेट अस्पताल, प्राइवेट स्कूल आदि है। नप ने सभी के लिए करीब दो सौ से पांच हजार रुपये तक लाइसेंस फीस लागू की है।
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इस साल बैठक में सभी कमर्शियल संस्थानों के लिए लाइसेंस फीस अनिवार्य की गई है। फीस पहले से ही वसूली जा रही है मगर बीच में कुछ वर्ष डिस कंटीन्यू हो गई थी। इस कारण पीछे की भी रिकवरी की जा रही है। फीस ज्यादा नहीं है और दुकानदार आसानी से वहन कर सकते हैं। सभी दुकानदारों को सहयोग करना चाहिए। लाइसेंस फीस और टैक्स से मिलने वाली राशि को शहर के विकास में ही खर्च किया जाएगा।
हरदीप सिंह, कार्यकारी अधिकारी
नगर परिषद


नगर परिषद कर्मचारी लापरवाही करते हैं और खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है। इस साल लाइसेंस फीस का प्रावधान किया है तो इस वर्ष से फीस ली जाए। पांच सालों की फीस क्यों ली जा रही है। ये तो कह सकते हैं कि पिछले 20 वर्षों की फीस ली जाएगी। ऐसी बातों का कोई औचित्य नहीं।
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भानूप्रकाश, अध्यक्ष
नगर व्यापार मंडल

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