सेक्टर 13 व 23 के बीच फोरलेन में बाधक बने 14 मकानों पर रविवार सुबह पीला पंजा चला। लोग गिड़गिड़ाते रहे, हाथ जोड़ते रहे मगर पीला पंजा एक-एक कर मकान ढहाता रहा। इस दौरान खूब हंगामा भी हुआ। लोगों ने विरोध भी किया मगर भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी के चलते किसी की एक न चली।
सेक्टर 13 व 23 के बीच भगत सिंह चौक से सिटी स्टेशन तक फोरलेन मार्ग बनाया गया है। फोरलेन के बीच करीब एक जगह करीब 15 मकान बीच में आ रहे हैं। इसको लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है और मामला कोर्ट तक भी गया। मगर कोर्ट ने भी फोरलेन में रोडा बने मकानों को हटाने के निर्देश दिए।
जिसके बाद 20 अगस्त को हुडा प्रशासन ने पुलिस फोर्स के साथ अवैध निर्माण ढहाने का कार्य शुरू किया। एक निर्माण गिराया तो लोगों के विरोध व सामान हटाने के लिए समय मांगा। प्रशासन ने एक सप्ताह का समय दिया।
समयावधि पूरी होने के बाद रविवार सुबह करीब नौ बजे हुडा विभाग के अधिकारी ड्यूटी मजिस्ट्रेट तहसीलदार संजय बिश्रोई और पुलिस फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे।
जेसीबी मशीन, अधिकारियों और पुलिस फोर्स को देख मकानों में रहने वाले लोग एकत्रित हुए और मकान नहीं तोडने की गुहार लगाने लगे। मगर अधिकारियों ने उन्हें फटाफट अपना सामान निकालने के निर्देश दिए।
सामान नहीं निकाला तो जेसीबी से मकान ढहाना शुरू कर दिया। इस पर मकानों में रहने वाले परिवारों ने फटाफट सामान निकाल सड़क पर रखा। लोग विरोध करते रहे, गुहार लगाते रहे, खरी खोटी सुनाते रहे लेकिन पीला पंजा लगातार चलता रहा है।
दोपहर करीब एक बजे तक चली कार्रवाई के दौरान हंगामे और लोगों के विरोध के बीच फोरलेन में बाधक बने 14 मकानों को पूरी तरह ढहा दिया गया।
जेसीबी के आगे खड़ी हुई युवती
प्रशासन का पीला पंजा एक-एक कर मकान ढहा रहा था और उनमें रहने वालों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। एक युवती रोते-रोते जेसीबी मशीन के आगे खड़ी हो गई। पुलिस और परिजनों ने उसे वहां से हटाया। बाद में जहां-जहां मकान गिराये गए वहां कोई भी परिवार का सदस्य न आए इसके लिए पुलिस तैनात की गई। मकानों को ढहाने के दौरान सभी महिलाएं एक मकान में एकत्रित होकर रोने लगी और बाहर निकलने से इंकार कर दिया। इस पर महिला पुलिस ने सभी को जबरबाहर निकाला।
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अब कहां जाएं
करीब 40 वर्षों से यहां रह रहे है। आंखों के सामने ताश के पत्तों की तरह आशियाने ढ़ह गए। सड़क पर सामान रख बैठे 14 परिवारों के सदस्यों को समझ नहीं आ रहा कि अब वे क्या करें और कहां जाएं। महिलाओं, बच्चों और युवतियों का रो-रोकर बुरा हाल है। माथे पर चिंता की लकीरे है कि अब क्या करें। अजीत, उमेद, धर्मबीर, राम कुमार ने बताया कि अब एकदम किसके मकान में चले जाए। हम तो सड़क पर आ गए। 40 वर्षों से यहां रह रहे है। रोड के लिए पहले ही काफी जगह है। उन्हें उजाड़कर क्या रोड बनाएंगे। आधे से ज्यादा सामान तोडफ़ोड़ में नष्ट हो गया। अब उनके पास न जमीन है न मकान और न ही इतने रुपये की दोबारा मकान बना सके।
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मकान तोडने पर विवाद, पहुंचे बीजेपी मंत्री पुत्र व कार्यकर्ता
मार्ग में बाधक जयबीर सिवाच के मकान को तोडने पर हंगामा हुआ। अधिकारियों और परिवार के सदस्यों के बीच तीखी नोंक-झोंक भी हुई। जनस्वास्थ्य मंत्री के पुत्र अमन, मंत्री के कार्यालय सचिव प्रेम धनानिया भी पहुंचे। काफी जद्दोजेहद के बाद मकान का अधिकतर हिस्सा तोड़ा गया। कुछ हिस्से को तोड़ने के लिए सोमवार को पैमाइश करवाई जाएगी। जयबीर ने कहा कि पहले उन्हें कही बसाओ तो सही। मकान हम अपने आप तोड़ लेंगे। उनके मकान की रजिस्ट्री भी है और इंतकाल भी। अगर मार्ग के बीच आ रहा है तो उन्हें दूसरी जगह जमीन दी जाए। अब एकदम परिवार और सामान को लेकर कहां जाए। वह स्वयं ही मकान खाली कर रहे थे मगर जबरन जेसीबी मशीन चलाकर अधिकतर सामान तोड़ दिया गया। जिससे उन्हें लाखों का नुकसान हुआ।
इस बारे में जनस्वास्थ्य मंत्री के कार्यालय सचिव प्रेम धनानिया ने बताया कि सामान का नुकसान न हो इसके लिए जयबीर मकान खुद ही तुड़वा रहा था और ठेका भी दे दिया था। तीन दिन पूर्व हुई बैठक में जनस्वास्थ्य मंत्री और डीसी के समक्ष सारी बात हुई। इसके बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों ने मकान तोड़ दिया। हुडा प्रशासन गैर कानूनी तरीके से काम कर रहा है। जब रोड के लिए जगह खाली नहीं थी तो करोड़ों रुपये खर्च कर रोड क्यों बनाया गया। रोड बनाना जरूरी था या सेक्टर की खस्ताहाल सड़कें, ठप सीवर लाइन व दूषित पेयजलापूर्ति की व्यवस्था सुधारना।
इनके मकानों पर चला पीला पंजा
* रामचंद्र, उमेद सिंह, अजीत, मोनू, रवींद्र, राम कुमार, कृष्ण, रामानंद, राम सिंह
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कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई की गई। नोटिस नहीं देने की बात गलत है। करीब 10 दिन पहले भी इन्हें जगह खाली करने के निर्देश दिए गए थे।
संजय बिश्नोई, ड्यूटी मजिस्ट्रेट व तहसीलदार भिवानी।
14 मकान अवैध थे। हुडा की जमीन पर जबरन कब्जे कर मकान बनाए गए थे। इनके पास न रजिस्ट्री है और न ही अन्य कोई कागजात। हुडा के पास सब है। कोर्ट ने भी जगह खाली करा रोड बनाने के निर्देश दिए हैं।
नरेश कुमार, एसडीओ हुडा