भिवानी। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में जिले के मरीजों को जहां ऑक्सीजन की भारी किल्लत की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। वहीं अब डेंगू के कहर के बीच ब्लड बैंकों के एसडीसी यानी सिंगल डोजर प्लेटलेट्स किट की बड़ी किल्लत है। जिले में डेंगू के फिलहाल 116 मरीज सामने आ चुके हैं। जिले में रक्तदाता होने के बावजूद कोई भी ब्लड बैंक या फिर अस्पताल एसडीपी नहीं ले पा रहा, क्योंकि एसडीपी किट का अभाव है। ऐसे में मरीजों को मजबूरी में एसडीपी की जगह आरडीपी की यूनिट ही उपलब्ध करवाई जा रही है। नागरिक अस्पताल की ब्लैंड बैंक में एसडीपी की व्यवस्था नहीं है, वहीं निजी ब्लड बैंकों में भी किट खत्म हो गई है।
खून में यदि प्लेटलेट कम हो जाते हैं तो पेट, आंत, मसूड़ा, नाक या दिमाग के अंदर भी ब्लीडिंग (रक्तस्राव) शुरू हो सकता है। यह ब्लीडिंग जानलेवा तक हो सकती है। डेंगू जैसी बीमारियों में प्लेटलेट कम होने पर कई बार इसी वजह से मरीज की जान चली जाती है। ऐसे में मरीज की हालत को ध्यान में रखते हुए उसे एसडीपी या फिर आरडीपी की यूनिट लगाई जाती है। जिले के एक निजी लैब में डेंगू के कहर में रोजाना औसत पांच से छह एसडीपी यूनिट मरीजों को उपलब्ध करवाई जा रही थी। अब तक कुल 70 यूनिट एसडीपी की दी जा चुकी है। मगर वीरवार को किट खत्म होने के कारण मरीजों को एसडीपी की सुविधा नहीं मिल रही। मजबूरी में उन्हें आरडीपी की लगाई जा रही है। वहीं मरीज की हालत गंभीर होने पर उसे पीजीआईएमएस रोहतक रेफर कर दिया जाता है।
किन परिस्थितियों में पड़ती है एसडीपी की जरूरत
डेंगू के मरीज की प्लेटलेट्स अगर 10 हजार से कम हो जाती है तो उसकी हालत गंभीर होने लग जाती है। साथ ही मरीज के शरीर से रक्तस्राव होने भी चिंताजनक है। ऐसी स्थिति में मरीजों को सिंगल डोनर प्लेटलेट्स देना जरूरी है। एसडीपी की एक यूनिट से मरीज के 35 से 40 हजार प्लेटलेट्स बढ़ने की उम्मीद रहती है। जिसके बाद मरीज रिकवरी कर सकता है। बावजूद एक यूनिट के अगर मरीज रिकवरी नहीं कर पाता है तो उसे चिकित्सक के परामर्श अनुसार ओर एसडीपी किट लगाई जा सकती है।
एसडीपी और आरडीपी में अंतर
एसडीपी और आरडीपी में दोनों अपने-अपने स्थिति पर मरीज के स्वास्थ्य को बेहतर करने का कार्य करती है। अगर मरीज की हालत गंभीर है और उसकी प्लेटलेट्स लगातार कम हो रही है तो उसे एसडीपी दी जाती है, क्योंकि यह एक बार में ही 35 से 40 हजार प्लेटलेट्स बना देती है। वहीं मरीज की हालत खतरे से बाहर है तो उसे आरडीपी लगाई जाती है, जोकि एक बार में पांच से छह हजार प्लेटलेट्स बनाती है। वहीं एसडीपी की कीमत 11 हजार रुपये और आरडीपी की कीमत महज 400 रुपये है।
जिले में डेंगू के मरीजों की स्थिति:
जिले में अबतक डेंगू के 116 मरीज सामने आ चुके है, जिनमें से 96 मरीज रिकवर हो चुके हैं। फिलहाल जिले में डेंगू के 20 मरीज अस्पताल में उपचाराधीन हैं। शुक्रवार को जिले में डेंगू के 12 नए मामले सामने आए हैं। शुक्रवार को मलेरिया की जांच के लिए शहरी क्षेत्र में 44 और ग्रामीण क्षेत्र में 213 ब्लड स्लाइड बनाई, जिनमें सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई। डेंगू के जांच के लिए 87 लोगों के सैंपल जांच के लिए लैब में भेजे हैं। वहीं डेंगू मच्छर का लारवा मिलने पर 3899 को चेतावनी नोटिस जारी किया है।
अधिकारियों से बात की है
एसडीपी किट खत्म होने के बारे में उच्च अधिकारियों से बात की है। पहले भी डिमांड भेजी गई है। उम्मीद है जल्द ही एसडीपी की किट मिलेगी। किट मिलते ही मरीजों के लिए एसडीपी यूनिट की सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी।
- डॉ. नवीन पंघाल, मैनेजिंग डायरेक्टर फ्रीडम ब्लड बैंक, भिवानी।
कमेटिी गठित करे सरकार
सरकार की ओर से जिला प्रशासन और रेडक्रॉस के माध्यम से एक कमेटी का गठन किया जाए। जो डेंगू के मरीजों को समय पर रक्त, प्लेटलेट्स उपलब्ध करवाएं। साथ ही मरीजों को रक्तदाताओं की व्यवस्था भी करें। लगातार बढ़ रहे डेंगू के मरीजों के चलते रक्त और प्लेटलेट्स की काफी जरूरत पड़ रही है। ऐसे में सरकार और प्रशासन मिलकर जिले के मरीजों को उचित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाएं।
- राजेश डुडेजा, रक्तवीर, भिवानी।
मशीन नहीं है
अस्पताल में एसडीपी मशीन की सुविधा नहीं है। अगर मरीज को एसडीपी यूनिट की जरूरत पड़ती है तो उन्हें समय पर रक्तदाता उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। साथ तरह की ब्लड यूनिट मरीजों को समय पर दिए जा रहे हैं।
- डॉ. मोनिका सांगवान, इंचार्ज ब्लड बैंक, नागरिक अस्पताल, भिवानी।