जिले के करीब तीन सौ प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। अब तक अधिकतर स्कूलों ने दमकल विभाग से निरीक्षण करवाकर एनओसी नहीं ली है। इसके अलावा कुछ स्कूलों ने मान्यता लेने के समय एनओसी की शर्तें तो पूरी की लेकिन ऑब्जेक्शन लगे तो दूर करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। इसके अलावा कई स्कूल एकबार मान्यता तो ले ली लेकिन इसके बाद न तो रिन्यू करवाने की जहमत उठाई और न ही फायर सिस्टम रिफिल करवाया। सरकारी स्कूलों का भी बुरा हाल है। करीब पांच साल पहले सरकारी स्कूलों के लिए फायर सिस्टम खरीदे गए थे। एक बार लगने के बाद इन्हें अब तक रिफिल नहीं करवाया गया है।
विदित हो कि दो साल पहले टाइयान पाना स्कूल प्राइमरी स्कूल में आग लगी थी और सारा सामान जल गया था। उस समय गनीमत रही कि कोई बच्चा आग की चपेट में नहीं आया। इससे पहले अंबाला के एक स्कूल में करीब चार वर्ष पहले अग्निकांड हुआ था। इन हादसों के बाद सरकार ने सभी स्कूलों को आग से निपटने के लिए फायर सिस्टम की व्यवस्था करने के निर्देश तो दिए लेकिन बाद में देकर भूल गई।
अब हालात ये है कि करीब तीन सौ प्राइवेट व अनेक सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की जिंदगी से स्कूल में ही खिलवाड़ हो रहा है। हरेक स्कूल में बिजली व जनरेटर व्यवस्था है। प्राइवेट स्कूल तो दो, तीन मंजिला तक है और अनेक स्कूल तो पूरी तरह बंद है। मतलब मुख्य गेट ही बाहर जाने का एक रास्ता है। ऐसे में यदि किसी स्कूल में हादसा हुआ तो भयानक परिणाम हो सकते है।
सिलिंडर नहीं करवाए जा रहे रिफिल
पांच साल पहले हाईकोर्ट ने सभी सरकारी स्कूलों के लिए फायर सिस्टम लगाने के निर्देश दिए थे। सभी सरकारी स्कूलों के लिए दो-दो फायर कंट्रोल सिस्टम सिलेंडर भी खरीदे गए। अब इन सिलेंडरों को रिफिल ही नहीं करवाया जा रहा है जबकि नियमानुसार एक से दो साल में रिफिल करवाने होते हैं। इसके अलावा लगभग सभी स्कूलों में कंप्यूटर लैब भी बनाई गई है। जिनमें अक्सर आग की घटनाएं होती है। इनके लिए अलग से फायर सिस्टम की व्यवस्था तो की गई मगर अब सिलेंडरों को रिफिल नहीं करवाया जा रहा।
नोटिस भेजे, नहीं आया कोई जवाब
दमकल विभाग ने पिछले दिनों एनओसी नहीं लेने, लाइसेंस रिन्यू नहीं करवाने पर करीब 70 स्कूलों को नोटिस भी भेजे थे। लेकिन स्कूलों ने नोटिस को फाइलों में दबा दिया और नोटिस का कोई जवाब भी नहीं दिया। अब दमकल विभाग ने स्कूलों के औचक निरीक्षण की योजना बनाई है। औचक निरीक्षण के बाद रिपोर्ट तैयार कर डीसी कार्यालय में दी जाएगी। जहां से स्कूलों पर कार्रवाई बाबत निर्णय लिया जाएगा। नियमानुसार स्कूलों पर जुर्माना लग सकता है।
निजी स्कूल दमकल विभाग से एनओसी नहीं ले रहे हैं। इसका कारण है कि एनओसी के लिए आवेदन करेंगे तो स्कूलों का निरीक्षण होगा और खामियां दूर करनी पड़ेंगी। पिछले दिनों 70 स्कूलों को नोटिस दिया गया है मगर अब तक कोई जवाब नहीं आया है। अब औचक निरीक्षण कर स्कूलों की रिपोर्ट तैयार की जाएगी। स्कूलों को सिर्फ मान्यता के लिए ही दमकल विभाग की एनओसी याद आती है और आवेदन करने के बाद आगे की कार्रवाई को लटका देते हैं।
शमशेर सिंह मलिक, फायर ऑफिसर
दमकल विभाग