भिवानी। जिले में धान कटाई के दौरान फसल अवशेष जलाने पर रोक के लिए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। डीसी साहिल गुप्ता के निर्देश पर 164 निगरानी अधिकारी तैनात किए गए हैं और उपग्रह से हर खेत पर नजर रखी जाएगी।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने धान उत्पादक गांवों में निगरानी अधिकारियों की नियुक्ति की है। जिले में धारा 163 लागू कर दी गई है। कृषि, राजस्व, पंचायत और पुलिस विभाग की संयुक्त प्रवर्तन टीमें गठित की गई हैं। पराली में आग लगाने पर तुरंत कार्रवाई होगी।
सरकार के निर्देशानुसार सातों दिन 24 घंटे उपग्रह निगरानी प्रणाली से खेतों पर नजर रखी जाएगी। पराली संरक्षण दल द्वारा आग की स्थिति का पता लगाने, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद और आधुनिक तकनीक की मदद से तत्काल कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने किसानों से किसी भी कीमत पर पराली नहीं जलाने की अपील की है।
75 हजार मीट्रिक टन पराली उत्पादन का अनुमान
उप कृषि निदेशक राजेश सिहाग ने बताया कि जिले के 105 गांवों में 50,157 एकड़ में धान की खेती हुई है। इससे करीब 75,000 मीट्रिक टन पराली उत्पादन का अनुमान है। किसानों को जागरूक करने के लिए गांवों और स्कूलों में विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं ताकि बच्चों के माध्यम से भी संदेश किसानों तक पहुंचे।
उन्होंने बताया कि पराली जलाने वाले किसानों पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। इसमें पांच हजार से 30 हजार रुपये तक जुर्माना, प्राथमिकी, मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर लाल प्रविष्टि और आगामी दो वर्ष तक न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल बिक्री पर प्रतिबंध का प्रावधान है।
100 किसानों पर एक निगरानी अधिकारी
सहायक कृषि अभियंता नसीब सिंह धनखड़ ने बताया कि प्रत्येक 100 किसानों पर एक निगरानी अधिकारी तैनात किया गया है। 164 अधिकारी किसानों से सीधा संवाद कर उन्हें पराली न जलाने के लिए प्रेरित करेंगे। पंजीकृत किसान आधुनिक कृषि यंत्रों से खेत में ही अथवा खेत से बाहर पराली का उचित प्रबंधन करें। इससे भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और किसान जुर्माने व कानूनी कार्रवाई से बच सकेंगे। साथ ही हरियाणा सरकार की ओर से 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि का लाभ भी मिलेगा।