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कवायद : पुल निर्माण से पहले फेल हुई निर्माण एजेंसियां, अब 20 नवंबर को फिर होंगे दो आरओबी के टेंडर

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46 फोटो तोशाम बाईपास पर दोहरा रेलवे फाटक। - फोटो : Bhiwani
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पुल निर्माण से पहले ही निर्माण एजेंसियों की काबिलियत बीएंडआर विभाग की कसौटी पर खरा नहीं उतरी। अब काबिल एजेंसियों की तलाश में एक बार फिर दो पुलों के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
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दरअसल, महम रोड पर गांव कालुवास रेलवे फाटक और शहर के तोशाम बाईपास पर खरकड़ी रेलवे फाटक पर 41.61 करोड़ की लागत से दो रेलवे ओवरब्रिज निर्मित किए जाएंगे। इन पुलों के निर्माण में पहले भी टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा चुकी हैं, लेकिन जो एजेंसियां इसमें शामिल होने पहुंची उनकी काबिलियत पर बीएंडआर विभाग ने आपत्ति जता दी, जिसके बाद टेंडर रद्द हो गए और फिर से इसकी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके लिए 20 नवंबर को बीएंडआर विभाग ने टेंडर आमंत्रित किए हैं। इस बार सबकुछ ठीक-ठाक रहा तो दिसंबर माह में दोनों पुलों के लिए निर्माण एजेंसियों को काम अलॉट कर निर्माण शुरू होने की उम्मीद बनी हैं।
भिवानी-महम मुख्य मार्ग पर कालुवास गांव के समीप रेलवे फाटक पर रेलवे पुल का निर्माण होगा। कालुवास रेलवे फाटक पर करीबन 700 मीटर लंबा रेलवे ओवरब्रिज बनेगा, जिस पर 17 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत आएगी। इस पुल निर्माण के बाद रेलवे हवाई पट्टी से शहर तक का सफर सिर्फ पांच मिनट का हो जाएगा। क्योंकि चांग हवाई पट्टी से शहर में आने के लिए रेलवे फाटक ही बाधक बना हुआ है। जबकि मुंढाल नेशनल हाईवे सड़क पर दौड़ने वाले वाहनों के लिए भी इस फाटक की बाधा सामने आ रही है। विधानसभा चुनाव से पहले इस पुल निर्माण के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थी। लेकिन जिन निर्माण एजेंसियों ने काम लेने की इच्छा जताई वो सभी एजेंसियां बीएंडआर की कसौटी पर खरा नहीं उतर पाई। यही वजह रही कि अब आचार संहिता समाप्ति के बाद एक बार फिर पुल निर्माण की कवायद फिर से शुरू की गई।
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तोशाम बाईपास पर खरकड़ी रेलवे फाटक हांसी मार्ग से तोशाम की तरफ जाने वाले वाहनों के लिए मुख्य बाधा है। इसके अलावा लाइन पार लाजपत नगर व तोशाम बाईपास क्षेत्र की रिहायशी कॉलोनी के लोगों के लिए भी एकमात्र यही मार्ग आवागमन का साधन है। ऐसे में इस मार्ग पर दोहरा फाटक लगता है। जिस पर शहर का सबसे लंबा पुल निर्माण भी होने जा रहा है। इस पुल की लंबाई करीब एक किलोमीटर होगी। जिस पर विभाग की 24.61 करोड़ की अनुमानित लागत आएगी। घनी आबादी के बीच बनने वाले इस रेलवे ओवर ब्रिज का फायदा गांव खरकड़ी व आसपास की सात कालोनियों के लोगों को होगा। पुल निर्माण के बाद यहां के लोगों को चार से पांच किलोमीटर लंबे बाईपास का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा, बल्कि हांसी गेट पहुंचने के लिए भी पांच मिनट का समय लगेगा।
वर्जन:::खरकड़ी और कालुवास के रेलवे ओवरब्रिज निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया 20 नवंबर को होगी। इसके बाद संभावित एजेंसियों को दिसंबर माह तक काम अलाट किए जाने की संभावना है। काम अलाट होने के करीबन एक साल की निर्धारित अवधि में दोनों ही पुलों को बनाकर तैयार किया जाएगा।
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- कृष्ण कुमार, कार्यकारी अभियंता, निर्माण विंग, बीएंडआर विभाग।
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