ट्रैफिक जाम पुलिस के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है। सोमवार को घंटाघर चौक पर इतने वाहन उमड़े की जाम लग गया। जाम से परेशान ट्रैफिक पुलिस ने व्यवस्था बनाने के लिए चौराहे को एक साइड रस्सी बांधकर तिराहा बना दिया। ऐसे में हांसी गेट, सराय चौपटा की ओर से रेलवे स्टेशन, सामान्य अस्पताल की ओर जाने के लिए करीब आधा किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ा। वाहनों को कृष्णा कॉलोनी मोड़ तक घुमाया गया। घंटाघर चौक ही नहीं रोहतक गेट, मिनी बाईपास, महम गेट पर भी जाम के हालात रहे। जाम सुबह 9 बजे से लगभग दोपहर के तीन बजे तक वाहन रेंगते रहे। इस दौरान मरीज को अस्पताल ले जा रही एंबुलेंस भी फंसी रही।
सोमवार का जाम हमेशा ही ट्रैफिक पुलिस के लिए परेशानी रहता है। इस बार भी ऐसा ही हुआ और शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पटरी से उतरी नजर आई। शहर के लगभग सभी मुख्य चौक-चौराहों पर जाम के हालात रहे। ज्यादा खराब स्थिति घंटाघर चौक, महम गेट, रोहतक गेट चौक की रही। यहां ट्रैफिक पुलिस और होमगार्ड के जवानों को यातायात व्यवस्था सुचारु रखने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी। हांसी गेट से घंटाघर चौक तक करीब तीन सौ मीटर तक लंबा जाम लगा था। ऐसा ही हाल रोहतक रोड पर था। रोहतक गेट से एमसी कॉलोनी तक वाहन जाम में फंसे थे। महम गेट पर भी खासी संख्या में वाहन जाम में फंसे थे। ट्रैफिक पुलिस ने घंटाघर चौक पर जाम की परेशानी को देखते हुए चौराहे को तिराहा बना दिया। एक साइड रस्सी बांधकर रास्ता बंद कर दिया गया। यहां ट्रैफिक पुलिस का एक जवान खड़ा होकर वाहनों को सीधे दिनोद रोड पर निकालने लगा। यहां रास्ता बंद होने के कारण वाहन चालकों को करीब आधा किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ा। कृष्णा कॉलोनी मोड़ पर भी जाम की स्थिति बनी।
गलियों में भी लगा जाम : मुख्य मार्गों खासकर सरकुलर रोड पर लगे जाम से बचने के लिए वाहन चालकों ने विभिन्न कॉलोनियों के रास्तों, गलियों को चुना। इस कारण इन मार्गों पर भी जाम के हालात रहे। खासकर कृष्णा कॉलोनी के अंदरूनी मार्गों पर।
ट्रैफिक लाइटों का नहीं हो पाया टाइम-सेट : वर्ष 2012 में शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए ट्रैफिक लाइटें लगाई गई थी। जो एक सप्ताह भी नहीं जली और टाइम सेटिंग के फेर में बंद कर दी गई। पिछले दिनों सीएम विंडो पर हुई शिकायत के बाद एक बार फिर इन्हें शुरू करने का प्रयास किया गया। एक दिन जलाई भी गई। मगर अब फिर से पिछले करीब दो महीने से ट्रैफिक लाइटें बंद है। टाइम सेटिंग के कारण ये लाइटें बंद है।
सोमवार को वाहनों की संख्या ज्यादा रहती है। घंटाघर चौक पर जाम के कारण ही एक साइड रस्सी बांधी गई थी। वाहनों का लोड कम होने पर रस्सी को खोला भी जा रहा था।
- इंस्पेक्टर बलजीत सिंह, एसएचओ ट्रैफिक
यूं हो सकता है जाम का समाधान
एक्सपर्ट व्यू : रिटायर्ड डीएसपी दिलबाग सिंह
- जाम की समस्या को देखते हुए महम गेट, घंटाघर चौक, हांसी गेट चौक के लिए पार्किंग की अलग-अलग व्यवस्था की गई थी। मगर पार्किंग की बजाए सड़क किनारे पर ही वाहनों की पार्किंग हो रही है। अगर वाहनों की पार्किंग सही हो तो जाम की समस्या को काफी कम किया जा सकता है।
- चारों ट्रैफिक लाइटों के बीच बहुत कम दूरी है। इसी कारण पहले ट्रैफिक लाइटें ऑन होने के बावजूद व्यवस्था बिगड़ी रही। ट्रैफिक लाइटों की सही टाइमिंग सेट करके जाम की समस्या को कम किया जा सकता है।
- शहर में करीब साढ़े तीन हजार ऑटो है, जो मनमाफिक तरीके से सवारियों के फेर में बीच सड़क भी ऑटो रोक देते है। लंबे प्रयास के बावजूद भी जिला प्रशासन इनके लिए ऑटो स्टैंड तय नहीं कर पाया है। करीब 40 फीसदी तक ऑटो ऐसे है, जिनके न कागजात पूरे है और रजिस्ट्रेशन कहीं और है और चलाये यहां जा रहे है। इन्हें व्यवस्थित कर समस्या को कम किया जा सकता है।
- शहर के चारों बाईपास निर्माण की बात कई दफा उठी मगर सिरे अब तक भी नहीं चढ़ी। बाईपास के निर्माण से भारी वाहनों को शहर में एंट्री करने से रोका जा सकता है। जिससे की जाम न लगे।
- सड़क पर किसी वाहन की पार्किंग न हो और न ही कोई रेहड़ी वाला खड़ा हो।
अतिरिक्त खर्च भी, परेशानी भी
जाम में फंसे वाहन चालक खासे परेशान दिखे। पांच मिनट का सफर तय करने में 35 से 40 मिनट तक लग गए। ऐसे में वाहन चालकों को न केवल परेशानी झेलनी पड़ी बल्कि अतिरिक्त खर्च भी पेट्रोल-डीजल की खपत के कारण वहन करना पड़ा। करीब डेढ़ लाख लोगों को दिनभर परेशानी झेलनी पड़ी।
शहर में आज दिनभर जाम रहा। अब जाना था सिविल अस्पताल। घंटाघर चौक के नजदीक पहुंचने के बाद कहा गया कि कृष्णा कॉलोनी मोड़ से घूमकर आओ। घंटाघर से अस्पताल की दूरी बमुश्किल 10 कदम की हैे र उनढ्हें 500 मीटर तक घूमकर जाना पड़ा। ऐसी व्यवस्था किसी शहर में नहीं होगी।
राजेश रंगा, वाहन चालक
रोहतक गेट पर भी जाम, महम गेट पर भी जाम, घंटाघर चौक पर भी जाम। जाम के कारण बमुश्किल 10 मिनट का रास्ता तय करने में पौना घंटा लग गया। यह हमारे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था है। ट्रक जैसे बड़े वाहन भी शहर के बीच से गुजर रहे है। किसी को इमरजेंसी हो तो यहां मर ही जाए मगर रास्ता नहीं मिलेगा। जिला प्रशासन को लोगों की परेशानी देखनी चाहिए और इनका बेहतर समाधान करना चाहिए।
किशन लाल, राहगीर