फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bhiwani News: रजिस्ट्री क्लर्क विकास ने तहसीलदार के साथ मिलकर रची थी दस्तावेजों में हेराफेरी की साजिश

Sat, 05 Jul 2025 12:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
विज्ञापन
पकड़े गए रजिस्ट्री क्लर्क विकास व नंबरदार ओमबीर के साथ एंटी करप्शन ब्यूरो टीम के सदस्य। 
विज्ञापन
भिवानी। बहुचर्चित बैप्टिस्ट चर्च भूमि घोटाले में रजिस्ट्री क्लर्क विकास ने तत्कालीन तहसीलदार रवींद्र मलिक से मिलीभगत कर दस्तावेजों में बड़े स्तर पर हेराफेरी की थी। जिसके बाद इन गलत दस्तावेजों को तहसील कार्यालय के कंप्यूटर में भी अपलोड करा दिया था। भूमि बिक्री के फर्जी दस्तावेजों के बावजूद क्रेता और विक्रेता को न जानते हुए भी गांव देवसर के नंबरदार ओमबीर सिंह ने तस्दीक कर दी थी।
विज्ञापन

हालांकि एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम इस मामले में तत्कालीन तहसीलदार सहित आठ आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है, जिनका चालान भी न्यायालय में पेश किया जा चुका है। अब एफआईआर दर्ज होने के 33 माह बाद बैप्टिस्ट चर्च भूमि घोटाले में आरोपी रजिस्ट्री क्लर्क विकास और नंबरदार ओमबीर की गिरफ्तारी हुई है। शहर के हांसी गेट पर करीब 200 करोड़ कीमत की 20 कनाल 11 मरले भूमि की फर्जी रजिस्ट्री का मामला अमर उजाला ने संवाद न्यूज एजेंसी के माध्यम से 2022 में उजागर किया था। मामले की जांच कर रही चरखी दादरी एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम इस घोटाले में अब भी कई अन्य लोगों की भूमिका खंगालने में जुटी हुई है।
भिवानी के पुलिस अधीक्षक को बैप्टिस्ट मिशनरी सोसायटी काॅरपोरेशन के पावर ऑफ अटारनी सुमित नाथ की तरफ से सितंबर 2022 में शिकायत दी गई थी। जिसमें उसने बताया था कि बैप्टिस्ट चर्च मिशनरी सोसायटी की भिवानी में तीन से चार जगह पर भूमि है। शहर के अंदर बेशकीमती भूमि पर भूमाफिया की नजर है। इसी के चलते इसके फर्जी दस्तावेज तैयार कराकर क्रेता और विक्रेता को खड़ा किया गया। इस पूरे प्रकरण में भिवानी तहसील के अधिकारियों और कर्मचारियों की भी मिलीभगत है। पुलिस अधीक्षक ने मामले की जांच तत्काल प्रभाव से आर्थिक अपराध शाखा को सौंप दी थी। जिसकी रिपोर्ट आने पर सिविल लाइन पुलिस थाने में सात अक्तूबर 2022 में धोखाधड़ी की संबंधित धाराओं के तहत सतीश जार्ज, जलजीत मलिक, राजेश, सज्जन वर्मा एडवोकेट, लियाकत अली खान, रोहित फौगाट, ओमबीर नंबरदार, विकास रजिस्ट्री क्लर्क, तहसीलदार रवींद्र मलिक सहित अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया था। बैप्टिस्ट भूमि बिक्री घोटाले में नामजद आठ आरोपियों की गिरफ्तारी एसीबी कर चुकी है।
विज्ञापन


रजिस्ट्री क्लर्क को निलंबित कर फिर कर दिया था बहाल
सिविल लाइन पुलिस थाने में धोखाधड़ी की एफआईआर में नामजद होने के बाद मामला एंटी करप्शन ब्यूरो के पास पहुंच गया। इस प्रकरण में अपना बचाव करने के लिए रजिस्ट्री क्लर्क विकास ने काफी प्रयास किए और बाद में वह भूमिगत हो गया था। कई महीनों तक पुलिस उसकी तलाश में जुटी रही। उसने हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत भी लगाई थी, लेकिन वह नामंजूर हो गई थी। इसके बाद भी विकास गिरफ्तारी से बचता रहा। हालांकि सरकार ने उसे निलंबित भी कर दिया था, मगर गिरफ्तारी से कुछ अर्से पहले ही उसे फिर से बहाल कर दिया गया। जिसके बाद उसे तोशाम के एक सरकारी कार्यालय से एसीबी की टीम ने वीरवार को गिरफ्तार कर लिया था।


राजेश उर्फ सरकारी का नाम बैप्टिस्ट चर्च प्रकरण में आया सामने
एंटी करप्शन ब्यूरो टीम की जांच में रोहतक के राजेश उर्फ सरकारी का नाम भी बैप्टिस्ट भूमि बिक्री प्रकरण में सामने आया है। हालांकि एफआईआर में भी उसका नाम शामिल है। लेकिन अभी तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। जबकि एफआईआर में दर्ज लोगों की गिरफ्तारी पुलिस अब कर चुकी है। राजेश सरकारी का भूमि खरीद मामले में भूमि प्रलेख में भी जिक्र किया गया था। हालांकि एसीबी अभी अन्य लोगों की भूमिका खंगालने और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है।

तत्कालीन उपायुक्त की भूमिका की भी एसीबी ने की थी जांच
बैप्टिस्ट चर्च भूमि बिक्री प्रकरण में तत्कालीन उपायुक्त की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठे थे। एसीबी की तरफ से गिरफ्तार किए गए तत्कालीन तहसीलदार रवींद्र मलिक ने भी हाई कोर्ट में उपायुक्त के खिलाफ गवाही दी थी। जबकि बैप्टिस्ट चर्च के सचिव साइमन जोसवा ने ये घोटाला उजागर होने से पहले ही शिकायत दी थी। जिसमें उसने बताया था कि 2017 में बैप्टिस्ट चर्च एसोसिएशन के हक में इंतकाल दर्ज किया गया था। वहीं 29 अगस्त 2022 को उपायुक्त ने बैप्टिस्ट चर्च एसोसिएशन के हक में दर्ज इंतकाल को खारिज कर दिया था। इस मामले में इंतकाल दर्ज करने और खारिज करने की भूमिका में ही उपायुक्त पर गंभीर आरोप लगे थे।


आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी, अभी जारी है जांच
एसीबी ने बैप्टिस्ट चर्च भूमि घोटाले में रजिस्ट्री क्लर्क विकास और गांव देवसर के नंबरदार ओमवीर को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया है। दोनों को जिला कारागार भेजने के आदेश हुए हैं। रजिस्ट्री क्लर्क विकास ने भूमि के फर्जी दस्तावेज तैयार किए थे जबकि नंबरदार ने इन फर्जी दस्तावेजों की तस्दीक कर दी थी। इस मामले में तत्कालीन तहसीलदार सहित आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं इस प्रकरण में जुटे राजेश उर्फ सरकारी व अन्य लोगों की गिरफ्तारी बाकी है। फिलहाल मामले की जांच चल रही है। जल्द ही अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जाएगा। -कुलवंत, निरीक्षक, एंटी करप्शन ब्यूरो, चरखी दादरी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें