भिवानी। नकीपुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) में प्रसव के बाद नवजात की मौत के मामले में बुधवार को हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने संबंधित स्टाफ नर्स के खिलाफ नियमित विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की सिफारिश की है। आयोग ने अधिकारियों को पीड़ित परिवार को आर्थिक मुआवजा देने पर विचार करने और कार्रवाई की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति ललित बत्रा की अध्यक्षता वाली पूर्ण पीठ ने शिकायत संख्या 2026 की सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए। पीठ में सदस्य (न्यायिक) कुलदीप जैन और सदस्य दीप भाटिया शामिल रहे। आयोग ने जिला चिकित्सा लापरवाही बोर्ड, भिवानी की जांच रिपोर्ट में चिकित्सा प्रोटोकॉल के कथित उल्लंघन संबंधी निष्कर्षों का संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने को कहा।
नागरिक अस्पताल भिवानी स्थित जिला चिकित्सा लापरवाही बोर्ड के सदस्य सचिव-सह-मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने 16 जून को जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। रिपोर्ट के अनुसार प्रसव के समय पीएचसी नकीपुर में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था और स्टाफ नर्स ने अन्य कर्मचारियों की सहायता से प्रसव कराया। गर्भावस्था उच्च जोखिम वाली होने के बावजूद निर्धारित चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया जबकि ऐसी स्थिति में चिकित्सक की उपस्थिति और जरूरी चिकित्सा सहायता सुनिश्चित होनी चाहिए थी।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक नवजात को बाद में भिवानी की विशेष नवजात देखभाल इकाई (एसएनसीयू) लाया गया जहां उसे मृत अवस्था में लाया घोषित किया गया। बोर्ड ने कहा कि नवजात को तत्काल पुनर्जीवन संबंधी चिकित्सा उपायों की जरूरत थी लेकिन इस गंभीर स्थिति के दौरान स्टाफ नर्स ने टीकाकरण में बहुमूल्य समय गंवा दिया। आयोग ने कहा कि ये निष्कर्ष बच्चे के जीवन के अधिकार और सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में उचित चिकित्सा देखभाल पाने के अधिकार के उल्लंघन को लेकर गंभीर चिंता पैदा करते हैं।
आयोग की पूर्ण पीठ ने हरियाणा सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सेवाएं विभाग के महानिदेशक और भिवानी के सिविल सर्जन को संबंधित स्टाफ नर्स के विरुद्ध लागू सेवा नियमों के तहत नियमित विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए। आयोग ने स्पष्ट किया कि घटना के गंभीर परिणामों को देखते हुए कार्रवाई केवल विभागीय प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि मृत नवजात के परिवार को मुआवजा देने के पहलू पर भी गंभीरता से विचार किया जाए।
प्राथमिकी की जांच में तेजी लाने के निर्देश
आयोग ने पुलिस थाना लोहारू से प्राप्त रिपोर्ट का भी अवलोकन किया। रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 106(1) के तहत एक अगस्त को दर्ज प्राथमिकी की जांच जारी थी। आयोग ने भिवानी के पुलिस अधीक्षक को जांच में तेजी लाने के निर्देश दिए। संबंधित जांच अधिकारी को अगली सुनवाई पर सभी संबंधित अभिलेखों सहित आयोग के समक्ष उपस्थित होना होगा और जांच की स्थिति संबंधी रिपोर्ट अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले निदेशक (जांच) के माध्यम से प्रस्तुत करनी होगी।
वरिष्ठ अधिकारियों को कार्रवाई रिपोर्ट देने के निर्देश
आयोग के सहायक रजिस्ट्रार डॉ. पुनीत अरोड़ा ने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य सेवाएं विभाग के महानिदेशक और भिवानी के सिविल सर्जन को विभागीय कार्रवाई तथा परिवार को मुआवजा देने पर विचार सहित सभी पहलुओं की अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। संबंधित अधिकारियों को 12 जनवरी 2027 को अगली सुनवाई पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपना पक्ष रखना होगा। सभी रिपोर्ट सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले आयोग के पास पहुंचनी अनिवार्य हैं।