फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bhiwani News: राजकुमार तंवर ने मधुमक्खी के मर्ज की ढूंढ ली दवा, 24 सालों से देश-विदेश में घोल रहा शहद की मिठास

विज्ञापन
शहद उत्पादक गांव पालुवास निवासी राजकुमार तंवर पीली दवाईवाला। 
विज्ञापन
भिवानी। मधुमक्खी पालन करते-करते राजकुमार तंवर शहद उत्पादन से उसका इतना गहरा लगाव हो गया कि उन्होंने मधुमक्खी की मर्ज की दवा भी ढूंढ निकाली और छह तरह की बीमारियों का सटीक इलाज का तरीका खोज लिया। इसकी वजह से उन्हें पीली दवाई वाला के नाम से नई पहचान भी मिल गई।
विज्ञापन


दरअसल भिवानी जिले के गांव पालुवास निवासी राजकुमार तंवर बीए तक पढ़े हैं। पिछले 24 सालों से वह मधुमक्खी पालन करते हुए देशभर में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपने शहद की मिठास घोल रहे हैं। लगातार 1999 से 2019 तक देश की राजधानी दिल्ली के प्रगति मैदान में शहद की स्टॉल लगाकर अपने शहद का स्वाद प्रदेश के तीन मुख्यमंत्रियों (मनोहर लाल, भूपेंद्र सिंह हुड्डा और बनारसी दास गुप्ता) से लेकर देश के नामी राजनेताओं को चखा चुके हैं। अब राजकुमार तंवर अपने शहद की खुद ब्रांडिंग और मार्केटिंग कर मधुमक्खी का सफल पालक बन चुके हैं। सालाना 100 क्विंटल शहद से वह लाखों रुपयों की आमदनी भी कर रहे हैं, साथ ही मधुमक्खी की बीमारियों का संक्रमण रोकने के लिए ईजाद की गई उनकी दवा की भी देश के विभिन्न प्रांतों में खूब डिमांड है।
राजकुमार तंवर ने बताया कि उन्होंने स्कूली पढ़ाई के दौरान ही 1994 में मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग की थी। जिसके बाद उन्होंने 1997 में मधुमक्खी का पालन कुछ डिब्बों के साथ शुरू किया था। शुरुआत में काफी मुश्किलें आईं और कई बार तो मधुमक्खी ही मर जाती थीं, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने मधुमक्खी पालन के साथ-साथ मधुमक्खियां में आने वाली विभिन्न
विज्ञापन

बीमारियों के बारे में भी गहनता से रिसर्च किया और फिर विदेशी विशेषज्ञ डॉ. जेबी सिंह के फार्मूले से खुद ही दवा तैयार की। इस दवा को उन्होंने अब रजिस्टर्ड भी करा दिया है। पिछले 15 सालों से वह मधुमक्खी की दवा बेचते-बेचते अब पीली दवाई वाला के नाम से भी पहचाने जाने लगे हैं। उनकी दवा जम्मू कश्मीर, हिमाचल, पंजाब, हरियाणा, यूपी, राजस्थान, गुजरात, असम, बंगाल, बिहार के विभिन्न शहरों में मधुमक्खी पालक खरीदकर ले जाते हैं। संवाद

मधुमक्खी की इन बीमारियों का है राजकुमार के पास सटीक इलाज

राजकुमार ने बताया कि मधुमक्खी में सैकब्रुड, फाउल ब्रुड, रेंगने वाली, ब्रुड का मुंह काटने वाली, यूरोपियन फाउल ब्रुड के अलावा जो बीमारी आंखों से दिखाई नहीं देती, उसे भी उसकी दवा कंट्रोल करती है। दो से ढाई हजार रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से राजकुमार दवा को ऑनलाइन अन्य प्रांतों में भी मधुमक्खी पालकों तक भेज रहे हैं। ये दवा राजकुमार ने खुद भारत सरकार से प्रमाणित भी करा ली है।
इन जगहों पर राजकुमार ले रहे हैं शहद उत्पादन

सरसों के सीजन में राजकुमार अधिकतर शहद उत्पादन भिवानी, लोहारू, हिसार, दादरी, रोहतक, जींद, कैथल में लेते हैं। इन जिलों में सफेदे के पेड़ पर भी मधुमक्खियों से शहद उत्पादन हासिल करते हैं। लेकिन आफ सीजन में वे शाहबाद मारकंडा, अलीगढ़, गढ़ गंगा में सूरजमुखी और राजस्थान के गोगा मेडी में जांटी के पेड़ से शहद उत्पादन लेने के लिए मधुमक्खियों के डिब्बे वहां तक लेकर जाते हैं। राजकुमार के अनुसार सरसों, सफेदा, जांटी, सीसम, बरसीम, सूरजमुखी सहित अन्य से मल्टी शहद उत्पादन भी लेते हैं।

नामी ब्रांडों के शहद में भी घुल रहा मिलावट का जहर
राजकुमार का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में स्वीट क्रांति लाना चाहते हैं, लेकिन नामी ब्रांडों के शहद में भी आज मिलावट का जहर घुल रहा है। उन्होंने बताया कि कुछ कंपनी अपने फायदे के लिए शहद में शुगर सिरप, राइस शिरप, कॉर्न सिरप की मिलावट कर रहे हैं। जिससे शहद का शरीर पर फायदा करने की बजाए उलटा असर होता है, बीमारियों का संक्रमण रोकने की बजाए बढ़ता है। उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखकर इस पर रोक लगाने की मांग की है।
देश में चार लाख मधुमक्खी पालक, 20 लाख लोगों को मिल रहा रोजगार
राजकुमार ने बताया कि देशभर में करीब चार लाख मधुमक्खी पालक हैं, जिससे 20 लाख लोगों का रोजगार जुड़ा है। उसके साथ भी मधुमक्खी पालन व्यवसाय से करीब 20 से अधिक लोग जुड़े हैं। अकेले हरियाणा में करीब ढाई हजार मधुमक्खी पालक शहद उत्पादन ले रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें