शहर के ट्रैफिक की लाइफ लाइन माने जाने वाला सरकुलर रोड तीन दिन की बरसात के बाद अब चलने लायक नहीं रहा। करीब चार किलोमीटर लंबे इस रोड में 25-30 बड़े गड्ढे समेत 100 गड्ढे बन गए हैं। ये गड्ढे आधे फुट से लेकर एक फुट तक गहरे हैं। दोबारा बरसात होने की स्थिति में ये गड्ढे राहगीरों के लिए हादसे का सबब भी बन सकते हैं। बहरहाल, इन गड्ढे को तुरंत पैचवर्क की दरकार है।
सरकुलर रोड (रिंग रोड) शहर के आवागमन के लिए कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिटी व बाहर का 90 प्रतिशत ट्रैफिक इसी रोड पर आश्रित है। लगभग चार किलोमीटर सरकुलर रोड पर जगह-जगह बने छोटे-बड़े करीब सौ गड्ढे न केवल यातायात को प्रभावित कर रहे है, बल्कि राहगीरों के लिए आकस्मिक दुर्घटना का कारण भी साबित हो रहे है।
वाहन चालक कर रहे मशक्कत
सरकुलर रोड पर आठ चौराहों से गुजरने में वाहन चालकों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। बारिश के कारण सड़कें खराब होने व जगह-जगह रोड़ी निकल आई है। वाहन चालक सीधे रास्ते आगे बढ़ने की बजाय गड्ढों से बचने के लिए इधर-उधर घुमा कर गुजर रहे हैं। महम गेट, रोहतक गेट, बावड़ी गेट, कृष्णा प्रणामी मंदिर, दादरी गेट, हालुवास गेट, देवसर चुंगी, घंटाघर चौक मार्ग पर बने गड्ढों से कई लोग चोटिल हो चुके हैं।
दुकानदार, रेहड़ी लगाने वालों का कहना है कि इलाके के लोगों को तो सड़कों की जर्जर हालात का अंदाजा होता है, लेकिन अनजान राहगीरों को चोटिल होने से बचाने के लिए आवाज लगाकर चेताना पड़ता है। बावजूद उसके कभी किसी की स्कूटी तो किसी की गाड़ी का पहिया निकालने के लिए मदद की जरूरत पड़ती है। पैच वर्क के माध्यम से ही वाहन चालकों की समस्या को कम किया जा सकता है।
आधा फुट से एक फुट गहरे हैं गड्ढे
बावड़ी गेट, दादरी गेट, महम गेट के अलावा नया बस स्टैंड के बाहर तकरीबन एक फुट गहरे गड्ढे हैं। घंटाघर, देवसर चुंगी, हालुवास गेट, हनुमान ढाणी आदि सड़कों पर जगह-जगह बने गड्ढे कम से कम से चार से छह इंच तक गहरे बने हुए है। एकाएक स्थिति सामने होने पर चालकों को वाहन की रफ्तार पर ब्रेक लगाने पड़ते है, तो कई रोककर फिर आगे बढ़ते है। गाड़ी, टेंपों, बसों तो फिर भी दुर्घटना से बच जाते है, पर दुपहिया वाहन चालक संतुलन बिगड़ने से दुर्घटना का शिकार बन बैठते हैं।