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बिगड़े हालात : 1.46 लाख कट्टे सिलाई और उठान के इंतजार में मंडियों में पड़े, बारिश में भीगी सरसों

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चारा मंडी में बारिश के दौरान भीगी खुले में पड़ी सरसों। - फोटो : Bhiwani
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लगातार चार दिनों से लॉकडाउन में जिले की 32 मंडियों के अंदर किसानों की सरसों खरीद हो रही है। अब तक सभी मंडियों में हैफेड और एचडब्ल्यूसी द्वारा 69760 मीट्रिक टन सरसों की खरीद की जा चुकी है। खरीद के बावजूद अब तक मंडियों से एक लाख 46 हजार 500 सरसों के कट्टों की सिलाई नहीं हुई है। सिलाई के बगैर इनका उठान भी संभव नहीं है। हालात इतने खराब है कि सरकारी एजेंसियां मंडी पहुंचने वाले किसान की सरसों तो खरीद रही हैं, मगर पहले से उठान के इंतजार में रखे लाखों कट्टों की वजह से फसल रखने के लिए भी जगह नहीं है। वहीं, आढ़ती सिलाई और उठान नहीं होने के पीछे अपना ही राग अलाप रहे हैं।
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आढ़तियों का कहना है कि मंडियों में सिलाई और उठान का कार्य ठेके पर होता था, लेकिन इस बार सिलाई और उठान के लिए कोई ठेकेदार ही नहीं मिल रहा है। जैसे तैसे किसान से खरीदी फसल हैंडलिंग एजेंट फसल झराई के बाद भराई और तुलाई का ही काम करा पा रहे हैं। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद किसान भी सहमें हुए हैं। वहीं, सरकारी खरीद एजेंसियों को भी चिंता सता रही है कि अगर बारिश हुई तो उठान नहीं हुए ये कट्टे बारिश की भेंट चढ़ जाएंगे। मंडियों में उचित प्रबंध नहीं होने की वजह से शनिवार को हुई बारिश में मंडियों में किसानों की सरसों और खरीद किया हुआ माल भी बारिश की भेंट चढ़ गया।
भिवानी जिले में 15 अप्रैल से ही सरसों की सरकारी खरीद की जा रही है। शुक्रवार तक हैफेड 3708 मीट्रिक टन और एचडब्ल्यूसी (हरियाणा वेयर हाउस) द्वारा 3368 मीट्रिक टन सरसों खरीद कर चुकी है। जबकि शनिवार को भी हजारों मीट्रिक टन सरसों खरीद की गई है। लगातार चार दिनों से मंडियों में चल रही खरीद के बाद सरसों के कट्टों का उठान नहीं होने से जहां तक नजर दौड़ाओं वहां तक केवल बिना सिलाई किए कट्टे ही नजर आ रहे हैं। लॉकडाउन से पहले और बाद में हजारों प्रवासी मजदूर पलायन कर चुके हैं। काफी मजदूर शेल्टर होम में फंसे हुए हैं, जो मंडियों में काम करने तक को तैयार नहीं है। भिवानी जिला में 16 मंडियों के अंदर हैफेड और 16 मंडियों में एचडब्ल्यूसी सरसों की खरीद में जुटी है। लेकिन सभी मंडियों मेें मजदूरों को लेकर काफी परेशानियां बनी हैं। रोजाना ही सुबह और शाम 50-50 किसानों की सरसों फसल खरीदी जा रही है, लेकिन पहले से खरीदी सरसों की सिलाई और ढुलाई नहीं होने की वजह से खरीद भी प्रभावित हो रही है। अब तक दोनों खरीद एजेंसियां एक लाख 46 हजार 500 कट्टों की खरीद कर चुकी है।
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सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के हिसाब से हैफेड सरसों की खरीद कर रही हैं, लेकिन आढ़तियों के पास सिलाई मशीनें तक नहीं है। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा दिया है। वहीं, आढ़तियों को जल्द से जल्द सिलाई और उठान कराने के संबंध में भी सख्त हिदायतें दी गई हैं। चारा मंडी खरीद केंद्र में कोई शेड नहीं हैं, मौसम से फसल बचाव को लेकर भी काफी सतर्कता बरती जा रही है।
- अमित नैन, इंचार्ज चारामंडी खरीद केंद्र भिवानी।
हर बार मंडियों में झराई, भराई और तुलाई के साथ ही सिलाई और ढुलाई का कार्य आढ़तियों द्वारा ठेके पर दिया जाता था। लॉकडाउन की वजह से सिलाई और ढुलाई के ठेकेदार नहीं मिल रहे हैं। इसलिए परेशानी बनी है। लेकिन फिर भी कुछ आढ़ती अपने स्तर पर सिलाई का प्रबंध कर रहे हैं।
- रामनिवास गुप्ता सिवानीवाला, प्रधान ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन भिवानी।
जिले की अधिकांश मंडियों में सिलाई मशीनें नहीं हैं, शनिवार को ही कुछ सेंटरों पर सिलाई मशीन उपलब्ध कराई गई हैं। शनिवार को हुई बारिश ज्यादा नहीं हुई और इसका सरसों में कोई नुकसान भी नहीं है। अब तक करीब डेढ़ लाख कट्टों की दोनों एजेंसियां खरीद कर चुकी हैं।
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- संतराम, जिला प्रबंधक हैफेड भिवानी।
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