शहर के लोगों की दो रेलवे अंडरब्रिज (आरयूबी) की मांग पूरी होती दिख रही है। रेलवे और पीडब्ल्यूडी विभाग के सर्वे के बाद दोनों आरयूबी का रास्ता साफ हो गया है। सर्वे रिपोर्ट और इस्टीमेट रेलवे और बीएंडआर अधिकारियों ने सरकार को भेज दी है। अब मंजूरी का इंतजार है। दोनों आरयूबी के निर्माण पर करीब पांच-पांच करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है।
तोशाम बाईपास ओवरब्रिज बनने के बाद यहां बने रेलवे फाटक को बंद कर दीवार खींच दी गई है। फाटक के उस पार भी करीब आधा आधा दर्जन कॉलोनियां है। ऐसे में लोगों को अब ओवरब्रिज पार कर घूमकर जाना पड़ता है। दीवार बनाने और फाटक हटाने का कॉलोनी के लोगों ने विरोध भी किया और बीते 18 जुलाई को भिवानी आगमन पर मुख्यमंत्री के समक्ष भी अपनी मांग रखी।
सरकार के निर्देश पर संभावनाएं तलाशने के लिए बीएंडआर व रेलवे अधिकारियों ने पिछले महीने यहां सर्वे किया। इसके अलावा कृष्णा कॉलोनी फाटक भी शहर वासियों के लिए बड़ी समस्या है और लोगों को काफी समय तक फाटक खुलने का इंतजार करना पड़ता है। अधिकारियों ने सरकार के निर्देश पर यहां भी आरयूबी की संभावनाएं तलाशने के लिए सर्वे किया। अधिकारियों ने अपने सर्वे में पाया कि यहां आरयूबी बनाए जा सकते हैं। सर्वे की रिपोर्ट पिछले महीने ही सरकार और उच्च अधिकारियों के पास भेजी गई है। अब बस रिपोर्ट के आधार पर इस प्रपोजल को मंजूरी का इंतजार है। मंजूरी मिलते ही इसकी लंबाई, चौड़ाई बनाकर इसका इस्टीमेट बनाया जाएगा।
छोटे व्हीकल ही निकल सकेंगे
आरयूबी से छोटे व्हीकल कार, दोपहिया वाहन, रेहड़ी आदि ही निकल सकेंगे। ट्रक या अन्य बड़े वाहनों को ओवरब्रिज से ही जाना होगा। दोनों आरयूबी के बनने से सैकड़ों छोटे वाहनों चालकों को फायदा होगा।
दर्जन भर से अधिक कॉलोनी वासियों को होगा फायदा
दो आरयूबी बनने से शहर की दर्जनभर से अधिक कॉलोनियों के हजारों लोगों को फायदा होगा। तोशाम ओवरब्रिज के पास लाइन पार दुर्गा कॉलोनी, एमसी कॉलोनी, ग्वार फैक्ट्री के पीछे की कॉलोनी, लाइनपार बस्ती, बालाजी कॉलोनी, शास्त्री नगर, बृजवासी कॉलोनी आदि दर्जनभर से अधिक कॉलोनियां है। कृष्णा कॉलोनी के फाटक के पार भी जीतूवाला जोहड़ क्षेत्र व अन्य काफी कॉलोनियां है।