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Bhiwani News: बगैर अनुमति के चलाए जा रहे आश्रम पर छापा, दो बच्चियों को रेस्क्यू किया

Tue, 25 Mar 2025 12:09 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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संस्था द्वारा जारी किया गया बच्चों का पंजीकरण फार्म।
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भिवानी। बाल कल्याण समिति, स्टेट क्राइम ब्रांच और जिला श्रम विभाग की संयुक्त टीम ने सोमवार को रोहतक रोड स्थित नए बस स्टैंड के सामने गली नंबर दो में पिछले चार साल से बगैर अनुमति के ही चल रहे एक आश्रम पर छापा मारा। टीम ने आश्रम के दस्तावेजों की जांच की। जांच के दौरान ये तथ्य सामने आया कि सोसाइटी ने जुवेनाइनल एक्ट के तहत नेत्रहीन बच्चों को रखने के लिए कोई अनुमति नहीं नहीं ली थी। इस दौरान आश्रम से दो नाबालिग दिव्यांग बच्चियां भी मिलीं।
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सोमवार को जिला बाल कल्याण समिति सदस्य रमेश कुमार और सतेंद्र तंवर, जिला श्रम विभाग के इंस्पेक्टर रवि शंकर, इंस्पेक्टर प्रदीप कुमार के अलावा स्टेट क्राइम ब्रांच के एएसआई प्रदीप, महिला एएसआई मंजीता, हेड कांस्टेबल जयवीर, जिला बाल संरक्षण इकाई से सोशल वर्कर रिंकू की संयुक्त टीम ने नया बस स्टैंड के सामने गली नंबर दो के एक मकान पर छापा मारा। इस स्थान पर अवैध रूप से दिव्यांग बच्चोंं और वृद्ध आश्रम चलाया जा रहा था। इस आश्रम में 12 से अधिक बुजुर्ग भी थे।
टीम ने जांच में पाया गया कि श्री श्याम मानव जन सेवा कल्याण सोसाइटी के नाम से यहां दिव्यांग बच्चों और वृद्ध आश्रम 2021 से चलाया जा रहा था। यहां पर आठ साल और दस साल की दो दिव्यांग बच्चियां भी मिलीं। टीम ने इन दोनों बच्चियों को यहां से रेस्क्यू किया और उनकी दादी को सौंप दिया। टीम ने आश्रम से नेत्रहीन दिव्यांग बच्चों के दाखिला संबंधी दस्तावेज भी कब्जे में ले लिए।
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संस्था का लेटर हेड पर सोसाइटी का पंजीकरण भी दर्शाया गया है। हालांकि नेत्रहीन दिव्यांग बच्चों से जुड़ा आश्रम संचालन के लिए जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत कोई भी अनुमति सोसाइटी के पास नहीं थी। टीम ने संचालक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए औद्योगिक पुलिस थाना में शिकायत दर्ज कराई है। संवाद
छोटे बच्चों से कराया जा रहा था काम, चंदे पर चल रहा था आश्रम का धंधा
नेत्रहीन दिव्यांग बच्चों के नाम पर चल रहे अवैध आश्रम के अंदर छोटे बच्चों से काम कराया जा रहा था, जबकि चंदे पर ही आश्रम का धंधा चलता था। इस संबंध में गुप्त शिकायत करने वाले ने बताया कि यहां छोटे बच्चों से बाल श्रम कराया जा रहा है। वहीं, कुछ बुजुर्गों को भी यहां रखा गया है। ये आश्रम बिना अनुमति के एक सोसाइटी बनाकर चलाया जा रहा है।
अभिभावकों की मर्जी से रखे जा रहे थे बच्चे, नहीं लिया जा रहा था कोई शुल्क
अभिभावकों की अनुमति से आश्रम में बच्चे रखे जा रहे थे। इनके पालन पोषण और शिक्षा के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा था। अभिभावकों ने खुद इसकी लिखित अनुमति उन्हें दी थी। आश्रम में कोई अनाथ बच्चा नहीं है। हमने जेजे एक्ट की अनुमति की प्रक्रिया शुरू की हुई है, जबकि हमारी संस्था पंजीकृत संस्था है।
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-संदीप वैद्य, संचालक, श्रीश्याम मानव जन सेवा कल्याण सोसाइटी, भिवानी।
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