अरविंद केजरीवाल के पैतृक गांव सिवानी में जश्र का माहौल है। लोगों ने कहा कि दिल्ली का दिल जीता और पंजाब में भी बल्ले बल्ले हो गई। लोग चाहते हैं कि अरविंद हरियाणा में भी मजबूती से चुनाव लड़े। दिल्ली के बाद पंजाब में भी आम आदमी पार्टी कांग्रेस व भाजपा के खिलाफ विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया है। इस खबर के बाद अरविंद केजरीवाल के पैतृक गांव और अरविंद की जन्मभूमि सिवानी में खुशियों का माहौल है।
जैसे ही उनके शानदार प्रदर्शन के बारे में लोगों को पता चला तो कस्बे के लोगों में उत्साह का माहौल है। इस दौरान आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता अरविंद के इस शानदार प्रदर्शन पर काफी उत्साहित नजर आए। लोग चाहते हैं कि अरविंद हरियाणा की राजनीति में भी आए ताकि यहां भी एक शानदार प्रदर्शन कर सके।
बता दें कि अरविंद केजरीवाल मूल रूप से भिवानी जिला के सिवानी के रहने वाले हैं। सिवानी इलाके के लोगों को अपने इलाके के इस धुरंधर की पार्टी पर नजर टिकी हुई थी। जैसे ही परिणाम आए तो आप के पक्ष में बढ़ते जनसमर्थन से लोग झूम उठे और सुबह से टीवी चैनलों पर चिपके रहे।
लोगों से बात की गई तो उनका कहना था कि अरविंद की यह बढ़त लोकतंत्र की जीत है और उन्हें अब हरियाणा की राजनीति में भी आना चाहिए ताकि यहां के लोगों को भी भ्रष्टाचार से निजात मिल सके।
देश और दुनिया के नक्शे में अरविंद ने दिलाई सिवानी को अलग पहचान
अरविंद केजरीवाल ने हरियाणा के भिवानी जिले के गांव सिवानी का नाम देश और दुनिया के नक्शे पर ला दिया है। पढ़ाई के समय से अरविंद केजरीवाल में समाजसेवा का जुनून था। समाजसेवा के इस जजबे ने उन्हें आरटीआई कार्यकर्ता और फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ अन्ना की टीम के प्रमुख सदस्य के रूप में पहचान दी। देश में अब उनकी पहचान मफलर मैन के रूप में होती है। हरियाणा से अरविंद केजरीवाल पहले ऐसे सख्स हैं जो लगातार तीसरी बार दिल्ली के सीएम की गद्दी संभाली।
सोनीपत और हिसार में हुई पढ़ाई
16 अगस्त 1968 को सिवानी में जन्में अरविंद केजरीवाल की प्रारंभिक शिक्षा सोनीपत तो उच्च शिक्षा हिसार में हुई। पहली से चौथी कक्षा अरविंद ने सोनीपत में की और बाद में सातवीं तक वे गाजियाबाद में पढ़े। आठवीं और नौवीं की पढ़ाई उन्होंने सिवानी के साथ लगते गांव न्यांगल के स्कूल में की और दसवीं की कक्षा एचएयू कैंपस के स्कूल से पास की। 11वीं और 12वीं की परीक्षा अरविंद ने हिसार के दयानंद कॉलेज से पास की। 12वीं के बाद में उनका प्रवेश आईआईटी खडक़पुर में हो गया। वहां से र्इंजीनियरिंग की परीक्षा पास करके अरविंद ने 2 साल तक टाटा कंपनी में नौकरी भी की। इसके बाद सिविल सेवा पास करके वे आयकर विभाग में ज्वाईंट कमीशनर बन गए।
समाजसेवा थी मंजिल
अरविंद की मंजिल नौकरी नहीं समाजसेवा थी और इसे उन्होंने बखूबी निभाया भी। उन्होंने नौकरी से इस्तीफा देकर समाजसेवा की राह चुन ली और परिवर्तन नाम की एक संस्था बनाकर समाजसेवा में जुट गए। इसी बीच उनका संपर्क अन्ना हजारे से हुआ और उनके साथ मिलकर उन्होंने काम शुरू कर दिया। अमर उजाला द्वारा दूरभाष पर संपर्क करने पर अरविंद के पिता गोबिंद और मां गीता का कहना है कि अरविंद बचपन से ही मेहनती और संघर्षशील रहा है। सूचना का अधिकार कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने जो काम किया है वह लोगों के सामने एक मिशाल बनकर सामने आया है। उन्हें इस क्षेत्र में अवॉर्ड भी मिल चुका है।