भिवानी। ईसा भूंडा गेहूं तै म्हारे डांगर भी कोनी खावैं, तीन महीनया तै यो ए गेहूं आवै सै। यह कहना है नया बाजार और ढाणी सरोगियान क्षेत्र की महिलाओं का। रविवार को ढाणी सरोगियान स्थित डिपो पर राशन लेने पहुंची महिलाओं ने सड़ा हुआ खराब गेहूं देखते ही इसे लेने से साफ इंकार कर दिया। वहीं डिपो पर गीली चीनी भी आई है, जिसे भी उपभोक्ता लेने से इंकार कर रहे हैं। शहरी दायरे के कई डिपो पर सड़ा हुआ खराब गेहूं आने से उपभोक्ताओं में भी नाराजगी देखी जा रही है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने कई डिपो पर खराब राशन की शिकायतें मिलने के बाद राशन भी बदलाया है।
कोविड-19 के दौरान राशन डिपो पर बीपीएल, डबलएवाई (अंत्योदय अन्न योजना) और प्राथमिक परिवार (ओपीएच) श्रेणी के करीब एक लाख 36 हजार पांच सौ परिवारों को अक्तूबर माह के दौरान पांच किलोग्राम गेहूं अतिरिक्त मुफ्त दिया जा रहा है। जबकि नियमित तौर पर रियायती दरों पर मिलने वाला राशन भी मिल रहा है। लेकिन अक्तूबर माह की सप्लाई में कई डिपो पर सड़ा हुआ खराब गेहूं भेजा गया है। गेहूं न केवल काला व सड़ा हुआ है, बल्कि फफूंद लगा होने की वजह से गांठें बन गई हैं, जिससे दुर्गंध भी आ रही है। डिपो पर भेजी गई चीनी भी गीली होने की वजह से गांठें बनी हुई हैं। इसका स्वाद भी कड़वा हो गया है। डिपो पर आए खराब राशन की वजह से गरीब परिवारों का निवाला भी छीन गया है, क्योंकि खराब राशन किसी भी लिहाज से खाने के लायक नहीं हैं, ऐसे में उपभोक्ता लेने से भी इंकार कर रहे है। जबकि डिपो संचालक एक ही जवाब दे रहे है कि ये ही सप्लाई में आया है।
कोट्स-
पिछले तीन महीनों से डिपो पर खराब गेहूं आ रहा हैं। मैंने खराब गेहूं लेने से मना किया तो डिपो वाला बोला, मैं क्या करूं ऊपर से सप्लाई में ही खराब आ रहा है। इस खराब गेहूं को खाने में प्रयोग करना तो दूर हाथ में लेने भर से दुर्गंध आ रही है। हम गरीबों की कोई नहीं सुनता।
- कृष्णा देवी, नया बाजार क्षेत्र वासी।
डिपो पर मैं राशन लेने के लिए तीन बार चक्कर लगा चुकी हूं, लेकिन डिपो पर खराब ही राशन बांटा जा रहा है। इस राशन को खाने में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, क्योंकि गेहूं तो पूरी तरह से सड़ चुका है। इसकी दुर्गंध से ही उल्टी आने लगती है। बच्चों को अगर सड़ा हुआ गेहूं का आटा खिलाया तो बीमार हो जाएंगे। पहले ही कोविड ने कामधंधा छीन लिया है, अब बीमारी का इलाज कहां से कराएंगे।
- कविता, ढाणी सरोगियान क्षेत्रवासी।
सुबह डिपो पर राशन लेने आई थी। डिपो धारक ने अनाज कट्टे में तोल दिया, लेकिन जब घर जाकर देखा तो कट्टे के अंदर गेहूं के सड़े हुए गांठें बनी हुई थी। इसमें कुछ सही गेहूं भी मिलावट किया हुआ था। मैंने पूरा गेहूं डिपो पर वापस कर दिया है, अब बदली होने के बाद ही मुझे सही राशन मिल पाएगा। लेकिन राशन कब तक बदला जाएगा, इसका कुछ पता नहीं है।
- इंदु नया बाजार क्षेत्रवासी।
डिपो पर आई चीनी गीली और खराब है। इसका स्वाद मीठा होने की बजाए थोड़ा कड़वा और खट्टा हो गया है। मैंने डिपो पर चीनी वापस लौटा दी है, क्योंकि इसका इस्तेमाल करने से चाय का स्वाद भी बिगड़ रहा है। पिछले कई महीनों से ऐसा ही खराब राशन पहुंच रहा है, इस वजह से मुझे परिवार के लिए राशन खरीदकर लाना पड़ता है।
- पुष्पा, नया बाजार क्षेत्रवासी।
51 किलो गेहूं बदलने पर दे रहे 45 किलो, किराया भी खुद ही भुगत रहे डिपो धारक
खराब राशन की पड़ताल में डिपो होल्डरों का कहना है सप्लाई तो खुद ही डिपो पर विभाग पहुंचा रहा है, मगर खराब गेहूं को बदली कराने के लिए उसे गोदाम तक ले जाने व लाने का खर्च उन्हें ही उठाना पड़ता है। जबकि 51 किलोग्राम गेहूं के कट्टे के बदली करने पर केवल 45 किलो गेहूं ही दिया जा रहा है। जबकि छह किलोग्राम गेहूं की कटौती की जा रही है। इसका विरोध करने पर भी डिपो धारकों को बेवजह दबाया जा रहा है।
वर्जन-
मेरे पास खराब गेहूं सप्लाई की शिकायत नहीं आई है। अगर किसी भी डिपो पर कोई खराब राशन पहुंचा है, तो उसे तुरंत बदली कराया जाएगा। सभी डिपो धारकों को भी सख्त हिदायतें दी हुई हैं कि सभी उपभोक्ता को उच्च गुणवत्ता वाला राशन ही वितरित किया जाए। अगर राशन को लेकर किसी तरह की कोई दिक्कत आ रही है तो इसकी सूचना भी संबंधित अधिकारियों को तुरंत दें।
- अनिल कालरा, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक भिवानी।