भारत नगर कॉलोनी में सड़क पर जमा गंदा पानी।
भिवानी। शहर की पॉश कॉलोनियों में शुमार भारत नगर में ठप पड़े सीवर और दूषित पानी की समस्या ने स्थानीय लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। बारिश के बाद पानी की निकासी न होने से गलियों में जलभराव हो रहा है। सीवर मैनहोल जगह-जगह ओवरफ्लो हो रहे हैं जबकि नलों से गंदा पानी घरों तक पहुंच रहा है। लोगों का कहना है कि बार-बार शिकायत के बावजूद अधिकारी कोई स्थायी समाधान नहीं कर पा रहे।
रोहतक रोड स्थित इस कॉलोनी में मूलभूत सुविधाएं तो हैं मगर चार दशक पुरानी पानी की लाइनों में लीकेज की समस्या बनी हुई है। अधिकारियों ने कुछ जगह लीकेज सुधारने के लिए गड्ढे खोदे थे जिन्हें पाटना भूल गए। नतीजतन सीवर का दूषित पानी पेयजल आपूर्ति में मिलकर घरों तक पहुंच रहा है। स्थानीय निवासी महावीर, दयाराम, कमला, संतोष व माया ने बताया कि इंटरलॉकिंग गलियां तो बनी हैं लेकिन लेवल ठीक न होने से बारिश के बाद पानी का ठहराव हो जाता है। कई मैनहोल लंबे समय से ठप पड़े हैं और गंदा पानी गलियों में फैला रहता है। कर्मचारियों के मौके पर आने के बाद भी समस्या जस की तस बनी रहती है। कुछ गलियों में बारिश से पहले लीकेज ढूंढने के लिए खोदे गए गड्ढे अब तक नहीं भरे गए जिससे दोपहिया वाहन चालकों को हादसे का डर बना रहता है।
भारत नगर कॉलोनी शहर की पुरानी कॉलोनियों में से एक है। यहां सबसे बड़ी समस्या दूषित पेयजल आपूर्ति की है। गर्मियों में तो पानी की भारी किल्लत रहती है और अन्य दिनों में गंदा पानी आता है। करीब चार दशक पुरानी पाइप लाइन में लीकेज हो चुकी है। सीवर मैनहोल जगह-जगह से ओवरफ्लो हो रहे हैं और गंदे पानी की निकासी भी ठीक से नहीं हो पा रही। हमारी प्रशासन से मांग है कि पेयजल और सीवर व्यवस्था को दुरुस्त कराया जाए। -अशोक, कॉलोनीवासी
गलियों का लेवल सही न होने से बारिश में जलभराव हो जाता है। लीकेज के कारण स्वच्छ पानी व्यर्थ बहता है और घरों तक दूषित पानी पहुंचता है। शिकायतों पर अस्थायी समाधान के बाद फिर वही पुरानी समस्या लौट आती है। इसलिए प्रशासन से गुजारिश है कि स्थायी समाधान कराया जाए। -संजय, कॉलोनीवासी
भारत नगर में फिलहाल कोई शिकायत दूषित पानी व सीवर समस्या की नहीं आई है। शहर के जिन हिस्सों से हमारे पास ऑनलाइन या ऑफलाइन शिकायतें आती हैं उनका प्राथमिकता के आधार पर निपटारा कराया जा रहा है। बारिश के मौसम में पेयजल आपूर्ति में थोड़ी दिक्कत रहती है क्योंकि ऐसे मौसम में पानी पूरी तरह क्लोरिफिकेशन के बाद भी शुद्ध नहीं हो पाता। -सुनील कुमार रंगा, कार्यकारी अभियंता, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, भिवानी