भिवानी । 12वीं के बाद अधिकतर विद्यार्थियों का यही मकसद होता है कि वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करें। इसके लिए वह कोचिंग सेंटर में दाखिला ले लेते हैं। वे सरल विषय के साथ प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करें। वहीं आगे की पढ़ाई भी जारी रहेगी।
कुछ ऐसे विद्यार्थी भी होते हैं जो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के साथ-साथ पढ़ाई भी करना चाहते हैं। उनके लिए शहर के हर कॉलेज और आईटीआई में कुछ ऐसे विषय हैं। इसमें दाखिला लेकर वह एक तरफ जहां अपने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं। वहीं अपनी पढ़ाई भी जारी रख सकते हैं। इसमें उनके लिए कला विषय एक बेहतर विकल्प साबित होता है। क्योंकि नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षा प्रणाली में जो बदलाव किया गया है। उसमें विद्यार्थियों को विषय के कई विकल्प दिए गए हैं। जो उनके लिए मददगार साबित हो सकते हैं।
विज्ञान और कला विषयों से संबंधित विद्यार्थी हो रहे हैं सफल
जिस विद्यार्थी ने 11वीं या 12वीं कक्षा में विज्ञान विषय में पढ़ाई करके फिर कला विषय में दाखिला लेते हैं तो वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी अच्छे से कर पाते हैं। क्योंकि सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी करने के लिए जब तक विद्यार्थी पढ़ाई को 6 से 8 घंटे का समय नहीं देंगे तब तक वह सफल नहीं हो सकते। यह वह विद्यार्थी अच्छे से जानते हैं जिन्होंने 11वीं 12वीं में विज्ञान को पढ़ा और समझा हो।
गणित से न भागे विद्यार्थी
प्रतियोगी परीक्षा में ज्यादातर विद्यार्थी गणित में ही पास नहीं हो पाते हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि गणित को ज्यादा मुश्किल समझते हैं। इससे भागने के बजाए उन्हें इसमें अधिक मेहनत करनी चाहिए। उन्हें गणित जरूर पढ़ना चाहिए क्योंकि कॉलेज में मैथ बेसिक से सिखाया और पढ़ाया जाता है। परंतु जब वह कोचिंग सेंटर में जाते हैं तो वहां पर बेसिक नहीं सिखाया जाता, यही वजह है कि विद्यार्थी ज्यादातर गणित में ही रह जाते हैं।
विद्यार्थी ने जिस भी क्षेत्र से जुड़ी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करनी है, उसे लेकर उन्हें पूरी मेहनत करनी चाहिए। इस लिए अगर उन्होंने कॉलेज में दाखिला लिया है और मैथ विषय पढ़ रहे हैं तो कॉलेज में भी जरूर जाकर बेसिक मैथ पढ़ना चाहिए। इसके अलावा जितना ज्यादा हो सके उतना उन्हें स्वयं पढ़ाई करनी चाहिए। प्रतियोगी परीक्षा के लिए विद्यार्थी का अधिक से अधिक समय पढ़ाई की आदत डालनी होगी। उन्हें यह पता होना चाहिए कि उनका क्या पढ़ना है कहां से शुरुआत करनी है कैसे पढ़ाई का पैटर्न बनाना है। फिर ही वह सिविल सर्विस परीक्षा की तैयारी शुरू कर सकते हैं।
- श्रुति रानी, एचओडी गणित विभाग, वैश्य कॉलेज भिवानी।
अगर विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी करना चाहते हैं और साथ-साथ पढ़ना भी चाहते हैं तो मैं उनके लिए कला विषय ही अच्छा विकल्प मानती हूं। इसमें हिस्ट्री, पॉलीटिकल और भाषा के बारे में पढ़ाया जाता है। जो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए बहुत जरूरी है। कला विषय में अगर वह दाखिला लेते हैं तो इनमें उन्हें अधिक मेहनत करने की भी जरूरत नहीं पड़ती। वह साथ-साथ कोचिंग सेंटर से अपनी तैयारी भी जारी रख सकते हैं। कला में वह विषय है जो विद्यार्थियों के लिए जरूरी है।
- डॉ. रिंकू अग्रवाल, प्रोफेसर अंग्रेजी विभाग, आदर्श महिला महाविद्यालय भिवानी।
विद्यार्थी के रूचि के ऊपर आधारित करता है कि उसे कौन सा विषय पढ़ना है और किस विषय के साथ वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना चाहता है। जिन विद्यार्थियों ने विज्ञान पढ़ने का सोचा है तो उन्हें एंथ्रोपोलॉजी, जियोलॉजी पढ़ना चाहिए। वह नॉन मेडिकल में जाना चाहते हैं तो उन्हें फिजिक्स और मैथमेटिक्स पढ़ना चाहिए, यह थोड़ा मुश्किल जरूर है। मगर इसके अच्छे नंबर मिल जाते हैं। इसके अलावा सोशियोलॉजी, पॉलीटिकल और हिस्ट्री तो विद्यार्थियों के लिए अच्छा विकल्प है। यह विषय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में बहुत सहायक है।
- डॉ. मोहन लाल, एचओडी, बॉटनी विभाग, वैश्य कॉलेज भिवानी।