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Bhiwani News: हस्तशिल्प प्रदर्शनी में महिलाओं की दमदार भागीदारी, हाथ की कारीगरी बनी आकर्षण का केंद्र

Fri, 13 Mar 2026 11:34 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
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​भिवानी की चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के पुराने कैंपस में आयोजित हस्तशिल्प प्रदर्शनी-मेले में 
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भिवानी। एमएसएमई मंत्रालय की प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय (सीबीएलयू) के ओल्ड कैंपस में आयोजित तीन दिवसीय हस्तशिल्प प्रदर्शनी मेले में महिलाओं की दमदार भागीदारी और हाथ की बारीक कारीगरी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। शुक्रवार को मेले के दूसरे दिन स्वयं सहायता समूहों, हस्तशिल्प कारीगरों, शिल्पकारों और छोटे उद्यमियों की विभिन्न स्टॉल लगाई गईं जिनमें अधिकांश स्टॉलों की कमान महिलाओं ने संभाली। इन स्टॉलों पर हाथ से तैयार किए गए उत्पादों के साथ खाद्य सामग्री भी प्रदर्शित की गई।
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मेले में हैंडमेड क्राफ्ट, पारंपरिक वस्त्र, हैंडमेड ज्वेलरी सहित अनेक उत्पाद प्रदर्शित किए गए। प्रदर्शनी में कई ऐसे उत्पाद भी शामिल रहे जिन पर बारीकी से कारीगरी की गई है और जिनका उपयोग लोग रोजमर्रा के जीवन में करते हैं।
एमएसएमई स्थानीय कार्यालय की सहायक निदेशक एवं प्रभारी रचना त्रिपाठी ने बताया कि हस्तशिल्प प्रदर्शनी-मेले का मुख्य उद्देश्य कारीगरों और शिल्पकारों को उनके उत्पाद बेचने का एक मंच प्रदान करना है। मेले में कारीगरों और शिल्पकारों की हस्तशिल्प कला लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थियों के साथ-साथ चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय के विद्यार्थी भी प्रदर्शनी को देखने में काफी रुचि ले रहे हैं।
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उन्होंने बताया कि शनिवार शाम को प्रदर्शनी का समापन होगा। समापन अवसर पर शाम करीब तीन बजे चौधरी बंसीलाल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. दीप्ति धर्माणी मुख्य अतिथि होंगी। रचना त्रिपाठी ने बताया कि अपना कार्य शुरू करने के लिए शुरुआत में एक लाख रुपये का ऋण लिया जा सकता है। ऋण लेने के बाद छह महीने का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के बाद ऋण राशि को बढ़ाकर दो लाख रुपये तक किया जा सकता है और इस पर पांच प्रतिशत ब्याज दर रहती है।

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अनौखी की हैंडमेड आभूषणों की स्टॉल बनी महिलाओं के लिए प्रेरणा
प्रदर्शनी में सोनीपत जिले के गांव जटिया निवासी अनौखी शर्मा द्वारा लगाई गई हैंडमेड आभूषणों की स्टॉल अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई है। अनौखी हस्तकला के क्षेत्र में कार्य कर रही हैं और राधे-राधे स्पेशल हेल्प ग्रुप से जुड़ी हुई हैं। उन्हें इस समूह से जुड़े हुए लगभग आठ वर्ष हो चुके हैं। अनौखी शर्मा हस्तकला के माध्यम से हाथों से ज्वेलरी मटरमाला, कंठी, गलसरी, मंगलसूत्र, बोरला, नजरिये तथा हरियाणा और राजस्थान की संस्कृति को दर्शाने वाली मोतियों की माला व आभूषण तैयार करती हैं। उन्होंने अपने इस कार्य की शुरुआत सरकारी योजना के तहत प्राप्त 10 हजार रुपये के स्टार्टअप लोन से की थी। अब वे अन्य महिलाओं को भी हस्तकला का प्रशिक्षण दे रही हैं। वे हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, पंचकूला और चंडीगढ़ में आयोजित होने वाले मेलों और प्रदर्शनियों में भाग लेकर अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर चुकी हैं। अनौखी शर्मा अब तक लगभग 100 से 200 महिलाओं को अपने इस अभियान से जोड़ चुकी हैं और उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में प्रेरित कर रही हैं।

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नरेश और सतबीर ने देसी उत्पादों से बनाई अलग पहचान
प्रदर्शनी में देसी उत्पादों की स्टॉल लगाने वाले नरेश कुमार ने बताया कि वह वर्ष 2022 से देसी और पारंपरिक उत्पादों का निर्माण कर रहे हैं। वे लगभग 60 प्रकार के अचार, आठ प्रकार की चटनियां और 15 प्रकार के मुरब्बे तैयार करते हैं। इसके साथ ही गुड़ और खांड से बने उत्पाद, हल्दी की खेती, आंवला कैंडी और आंवला के लड्डू भी बनाते हैं, जिन्हें लोग काफी पसंद कर रहे हैं।
नरेश कुमार के साथ काम करने वाले सतबीर गोरैया शहद उत्पादन का कार्य करते हैं। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा 8 से 10 प्रकार का शहद तैयार किया जाता है जो ग्राहकों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। नरेश कुमार गुरु रविदास सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़े हुए हैं। उन्होंने अपने व्यवसाय की शुरुआत 30 हजार रुपये के ऋण से की थी जो सरकारी सहायता से बढ़कर अब दो लाख रुपये तक पहुंच चुका है। उनके समूह के साथ दस महिलाएं भी जुड़ी हुई हैं जिन्हें इस कार्य से रोजगार मिल रहा है। बढ़ती मांग को देखते हुए उनके उत्पादों की 2-3 फ्रेंचाइजी भी शुरू की जा चुकी हैं। नरेश कुमार की मेहनत और नवाचार को कई मंचों पर सम्मान भी मिल चुका है। उन्हें आठ फरवरी को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जा चुका है। वर्ष 2026 में आयोजित कृषि एवं किसान मेले में भी उनके देसी उत्पादों के लिए उन्हें सम्मान मिला। इसके अलावा राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) तथा खादी और ग्रामोद्योग आयोग द्वारा भी उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि उनके स्वयं सहायता समूह को आगे बढ़ाने में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. नरेंद्र कुमार द्वारा लगातार मार्गदर्शन और प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
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