सप्ताह भर में फिर दूसरी बार शहर में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर को पार कर गया। प्रदूषण का स्तर 417 एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) पहुंच गया है। प्रदूषण के पार्टिकल 2.5 की मात्रा भी 480 तक पहुंच गई है जबकि पीएम 10 भी 424 दर्ज की गई। शहर की आबोहवा खतरनाक स्तर तक पहुंच गई है। पूरे दिन फिजां में धुंध की चादर छाई रही। बढ़े प्रदूषण के कारण लोग एक बार फिर आंखों में जलन और सांस लेने में परेशानी की समस्या से जूझते रहे।
दिवाली के बाद से बिगड़ा प्रदूषण लोगों के लिए परेशानी बना हुआ है। पिछले सप्ताहभर लोगों को इस प्रदूषण से थोड़ी राहत मिली मगर फिर से अब ये खतरनाक हो गया है। पिछले दो दिन से प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा और मंगलवार को एक्यूआई 398 दर्ज किया गया। मंगलवार को सुबह-सवेरे उठे तो उन्हें आसमान में सफेद चादर नजर आई। यह स्मॉग की चादर दिनभर छाई रही और धूप भी बेहद कम रही। इतना ही नहीं चार बजे ही दिन ढलने लगा था और ऐसे लगने लगा था मानो छह-सात बज चुके हो।
खतरनाक हुई हवा का लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ा। अधिकतर लोग आंखों में जलन से परेशान रहे तो खांसी, नाक और गले में इंफेक्शन की समस्या भी रही। बुजुर्गों और बच्चों में सांस लेने की समस्या रही। दमा के शिकार बुजुर्गों के लिए तो स्थिति बेहद गंभीर रही। चिकित्सकों ने सभी लोगों को घर से बाहर निकलते समय मास्क लगाने की सलाह दी है।
पीएम 2.5 की मात्रा पहुंची 480
प्रदूषण में पार्टिकल पीएम 2.5 और पीएम 10 का अहम रोल होता है। मंगलवार को पीएम 2.5 की मात्रा 480 और पीएम 10 की मात्रा 424 दर्ज की गई। ये बहुत खतरनाक स्तर है। एक से तीन नवंबर के तीन दिन के दौरान भी पीएम 2.5 की मात्रा 500 के पार दर्ज की गई थी।
नाक, आंख, गले के लिए खतरनाक हो रहा सांस लेना
प्रदूषण के कारण आसमान में स्मॉग रही। विशेषज्ञों के अनुसार जब हम सांस लेते है तो नाक के माध्यम से ये कण शरीर में प्रवेश करते है। सबसे पहले नाक में इरिटेशन होती है और छींके आती है। जिसके बाद जुकाम होता है।गले के अंदर बलगम जाने और ये प्रदूषण के कण जाने से इंफेक्शन बनता है और गले में खरास की स्थिति, दर्द की स्थिति पैदा होती है। विशेषज्ञों के अनुसार यहीं हालत आंखों की होती है और ये कण जब आंख में जाते है तो जलन पैदा होती है।
पिछले कुछ दिनों का एयर क्वालिटी इंडेक्स
तिथि एक्यूआई
12 नवंबर 417
11 नवंबर 271
10 नवंबर 185
09 नवंबर 179
08 नवंबर 214
07 नवंबर 211
06 नवंबर 196
05 नवंबर 200
04 नवंबर 359
03 नवंबर 409
02 नवंबर 500
01 नवंबर 500
प्रदूषण का स्तर बढ़ा है। बारिश के बाद ही प्रदूषण के स्तर में सुधार होगा। कारणों का अभी कुछ नहीं कहां जा सकता। कचरा जलाना, पटाखे चलाना, पराली जलाना ये सभी प्रदूषण बढ़ने के कारण है।
-हरीश कुमार, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
प्रदूषण का बढ़ता स्तर बच्चों के लिए खतरनाक है। बच्चों में सांस लेने में तकलीफ की समस्या बढ़ रही है। इसके अलावा यह दमा मरीजों के लिए भी खतरनाक है। इससे बचाव के लिए जरूरी है कि जहां तक संभव हो घर के अंदर ही रहे। बाहर जाना पड़े तो मास्क का प्रयोग करें। आंखों के बचाव के लिए बार-बार आंखों को धोये।
डॉ. राज महता, बाल रोग विशेषज्ञ