भिवानी। साहब, हम भूखे रह लेंगे, लेकिन अब यहां नहीं रहेंगे, हमें तो अपने गांव भिजवा दो। बस अब घर जाने में देरी पर और सब्र नहीं होता। हमें किसी से कुछ नहीं चाहिए, बस हमारे जाने का इंतजाम करा दो या फिर पैदल जाने दो। यह दर्द किरोड़ीमल पार्क में जुटे मजदूरों की जुबां पर था। कइयों की तो आंखें छलक आईं। घर जाने की आस में किरोड़ीमल पार्क में करीब पांच सौ मजदूर जुटे थे। व्यवस्था नहीं होने पर नारेबाजी कर रोष जताया तो पुलिस ने मजदूरों को खदेड़ दिया। सभी बचाव में इधर-उधर गलियों में दौड़ रहे थे।
शहर के किरोड़ीमल पार्क में बुधवार को करीब पांच सौ प्रवासी मजदूर बिहार के पूर्णिया, मोतीहारी, गया, अररिया सहित विभिन्न जिलों में जाने के लिए पहुंचे। इन मजदूरों के हाथों में गांव जाने के लिए रजिस्ट्रेशन और मेडिकल की पर्ची भी थी। करीब तीन घंटे तक ये मजदूर पहले तो सड़क पर जुटे रहे। जब पुलिस को इसकी भनक लगी तो उन्हें किरोड़ीमल पार्क में खदेड़ दिया। यहां पर भी मजदूर सामुदायिक दूरी भूल गए और गांव जाने की जिद पर अड़े रहे। इसी बीच प्रशासन की तरफ से कोई संतोषजनक जवाब या व्यवस्था नहीं बन पाने को लेकर प्रवासी मजदूरों ने रोष प्रदर्शन कर नारेबाजी भी की। काफी इंतजार के बाद भी ये मजदूर नहीं हटे तो आखिर ड्यूटी मजिस्ट्रेट के साथ सिटी पुलिस का अमला किरोड़ीमल पार्क में पहुंचा। इसके बाद तो डंडे के बल पर किरोड़ीमल पार्क में जुटे मजदूरों को खदेड़ दिया। सुबह से ही भूखे-प्यासे ये प्रवासी मजदूर यहां से निकलकर सड़कों पर ही लंबी कतारों में निकल पड़े। सबसे अहम बात तो यह कि बुधवार को जिला प्रशासन की तरफ से भी शहर के शेल्टर होम बंद करा दिए गए, क्योंकि इनमें रहने वाले प्रवासी मजदूरों को रोडवेज बसों के जरिये भेजा जा चुका था।
बच्चों और महिलाओं के साथ सड़क आ गए हैं...
लॉकडाउन में फंसे बिहार के पूर्णिया, मोतीहारी, गया, अररिया निवासी महेश राय, दीपक कुमार, श्यामकिशोर, दयाकिशन, मुन्नालाल, कमलकांत, विष्णुदत्त, बुद्धिराज ने कहा कि हम भूखे रह लेंगे, लेकिन हर हाल में घर जाएंगे। उनका कहना है कि गांव जाने के लिए 10 दिनों से मेडिकल सर्टिफिकेट और उससे भी पहले रजिस्ट्रेशन होने के बावजूद उन्हें गांव नहीं भेजा जा रहा। आज वे आए तो अधिकारियों ने कहा कि फोन पर मैसेज आएगा, लेकिन नहीं आया है। उनके रहने और ठहरने की भी कोई व्यवस्था नहीं रही है। बच्चों और महिलाओं के साथ सड़क पर आ चुके हैं। पैदल गांव चले जाएंगे, इसकी भी अनुमति नहीं मिल रही है।
जिले भर से शहर में जुटने लगे प्रवासी मजदूर
पिछले दो दिनों से जिले भर से प्रवासी मजदूर शहर में जुटने लगे हैं। अचानक मजदूरों की भीड़ बढने से प्रशासन की चिंता भी बढ़ गई है। मजदूर पहले वाले स्थान को स्थायी रूप से छोड़ने की जिद पर अड़े हैं। उनके सामने वापस जाने का भी विकल्प नहीं है और शेल्टर होम खत्म होने से ठहरने का भी कोई जरिया नहीं बचा है।
करीब 10 हजार मजदूर और फंसे..
चरखी दादरी और भिवानी जिला प्रशासन ने साढ़े चार से पांच हजार प्रवासी मजदूरों को अब तक स्पेशल ट्रेन और बसों के माध्यम से उनके घर भेजा जा चुका है। स्पेशल ट्रेन से नौ मई को 1198 प्रवासी मजदूर बिहार के पूर्णिया, अररिया, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल भेजे जा चुके हैं। 1200 प्रवासी मजदूर दस मई को स्पेशल ट्रेन से छत्तरपुर भेजे गए। इसके बाद 12 मई को 1400 प्रवासी मजदूर बिहार भेजे गए। इसके अलावा रोडवेज बसों से भी प्रवासी मजदूरों की घर वापसी हुई। मगर अभी भी करीब दस हजार से अधिक प्रवासी मजदूर ऐसे हैं, जिनके दिल में अपनों से मिलने की टीस और व्यवस्था की मजबूरी आड़े आ रही है।
सभी प्रवासी मजदूरों को जिला प्रशासन और सरकार की तरफ से घर भिजवाने की व्यवस्था की जा रही है। मजदूरों को अचानक सड़क पर आने या एक जगह पर एकत्रित होने की अनुमति नहीं है। इसलिए इन्हें जहां पहले थे, वहीं भेजा गया है। जिनका रजिस्ट्रेशन हो चुका है, उनकी व्यवस्था हो रही है। - मंजीत सिंह ड्यूटी मजिस्ट्रेट एवं एसडीओ सिंचाई विभाग।
लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों को शेल्टर होम से निकाल गांव भेजा जा रहा है। जिन मजदूरों की व्यवस्था अभी नहीं बनी हैं, उन्हें अपने स्थान पर ही बने रहने की हिदायतें हैं, अचानक किरोड़ीमल पार्क में भीड़ जुटाकर नियमों का उल्लंघन करना गलत है, इसलिए इन्हें वापस भेजा गया है। - रवींद्र कुमार एसएचओ सिटी पुलिस थाना भिवानी।
पुलिस द्वारा खदेड़े जाने के बाद संकरी गली में जुटे मजदूर।- फोटो : Bhiwani