शहर के मुख्य मार्गों पर जाम लगा रहता है और चौक-चौराहों के साथ छोटे मार्गों पर खड़े होकर ट्रैफिक पुलिस के जवान चालान काटने में मशगूल हैं। शहर के अनेक मार्ग तो ऐसे है जहां दिनभर जाम लगा रहता है और जाम खुलवाने वाला कोई नहीं होता। यहां पुलिस कर्मियों पर भी 40 से 50 चालान काटने का दबाव है। जिस कारण उनका ध्यान ट्रैफिक व्यवस्था की ओर कम और चालान करने में ज्यादा रहता है।
सीन एक
मध्याह्न 12 बजे अनाज मंडी पुलिस चौकी के पास जाम लगा, लेकिन खुलवाने के लिए कोई ट्रैफिक पुलिस कर्मी मौजूद नहीं था। फिर साढ़े 12 बजे घंटाघर चौक, शाम साढ़े चार बजे महम गेट चौक और पांच बजे आदर्श कॉलेज के बाहर लंबा जाम लगा, पर ट्रैफिक कंट्रोल करने के लिए कोई पुलिस कर्मचारी नहीं पहुंचा।
सीन दो
घंटाघर, हांसी गेट व रोहतक गेट, इन तीन चौक पर ट्रैफिक पुलिस अमला मुस्तैद रहा। लेकिन, ट्रैफिक कंट्रोल करने के लिए नहीं, चालान काटने के लिए। हर चौक पर तैनात चार-पांच पुलिस के जवानों का ट्रैफिक व्यवस्थित करने से कोई सरोकार नहीं । केवल चालान काटते रहे।
इन दृश्यों से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था की जमीनी हकीकत समझी जा सकती है। शहर की ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरी हुई है। ट्रैफिक पुलिस बेहतर व्यवस्था के लिए अनेक प्लानिंग बनाती है मगर कहीं ना कहीं स्वयं ट्रैफिक पुलिस ही व्यवस्था बिगाड़ने के लिए भी जिम्मेदार है। ट्रैफिक पुलिस में करीब 22 कर्मचारी है। इनके सहयोग के लिए 35 होमगार्ड के जवान है। जिनकी मुख्य चौक-चौराहों पर ड्यूटी लगाई हुई है। मगर अक्सर देखने में आता है कि ये जवान ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने की बजाए चालान काटने में व्यस्त रहते हैं। इनके सहयोग के लिए दिए गए होम गार्ड के जवान भी ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने में कम समय देते हैं और जांच के लिए वाहन रोकने में ज्यादा।
चालान का दबाव, कैसे खुलवाएं जाम
ट्रैफिक पुलिस भी स्टाफ की कमी से जूझ रही है। पुलिस के 22 जवान है, जिनमें पांच ही इंचार्ज है। इनमें भी एक-दो कोर्स पर चले जाते है। बाकी सहयोग के लिए सिपाही है। जिनकी इंटरसेप्टर, चालानिंग ब्रांच, एसएचओ गाड़ी, वाहन जब्त करने वाली गाड़ी पर ड्यूटी है। स्टाफ की कमी के कारण अब शेष बचे इंचार्ज पर ही चालान का दबाव है। हरेक इंचार्ज पर 40 से 50 तक चालान काटने का दबाव है। ऐसे में इंचार्ज अक्सर चालान काटने में व्यस्त रहते हैं और जाम खुलवाने के लिए उनके पास समय ही नहीं होता।
यहां लगा रहता है जाम
शहर के ऑटो मार्केट, अनाज मंडी ओवरब्रिज, दिनोद गेट चौक, हालुवास गेट ओवरब्रिज के पास, बस स्टैंड, केएम स्कूल के सामने हांसी मार्ग, ऑटो मार्केट दादरी मार्ग, विश्वकर्मा मंदिर के सामने वाले बाईपास मार्ग पर अक्सर जाम लगा रहता है मगर यहां कोई ट्रैफिक पुलिस कर्मी नहीं होता। इसके अलावा घंटाघर चौक, रोहतक गेट चौक, महम गेट, दादरी गेट पर भी सुबह नौ से साढ़े 10 बजे तक और दोपहर करीब साढ़े 12 बजे डेढ़ बजे तक जाम लगता है। दोपहर वाले जाम के समय तो पुलिस कर्मी नजर ही नहीं आते और सुबह के समय चालान काटने में व्यस्त नजर आते हैं।
अप्रोच रोड पर चालान
हांसी गेट अशोका मार्ग व इसी के सामने पटेल नगर मार्ग पर अप्रोच रास्ते है। मगर यहां ट्रैफिक पुलिस कर्मी चालान काटने के लिए डेरा डालते है। इसके अलावा तोशाम बाईपास ओवरब्रिज के पास, पंचायत भवन के सामने से महम रोड की ओर जाने वाले मार्ग, केएम गवर्नमेंट स्कूल के पास, बावड़ी गेट के पास ज्यादा ट्रैफिक नहीं होता मगर सिर्फ चालान के लिए ट्रैफिक पुलिस के जवान अक्सर नजर आते हैं।
वर्जन:::
स्टाफ की कमी है। फिलहाल ट्रैफिक पुलिस में 22 ही कर्मचारी है जबकि शहर में 15 से 17 ऐसे प्वाइंट है जहां जाम के स्थिति बनती है। इनमें भी इंचार्ज महज पांच ही है। चालान काटने का भी दबाव रहता है। मुख्य समस्या स्टाफ की कमी है।
- सतवीर सिंह, कार्यकारी एसएचओ, ट्रैफिक थाना पुलिस