भिवानी। मरीजों का मर्ज दूर करते-करते अब जिला नागरिक अस्पताल की मशीनरी भी जवाब देने लगी है। नागरिक अस्पताल के फिजियोथेरेपी केंद्र की मशीनें भी अब डेढ़ दशक पुरानी होने की वजह से बूढ़ी हो चुकी हैं, जिनके अंदर अब कंपन नहीं हो रहा है। ऐसे में मरीजों को घुटनों, कमर और गर्दन के दर्द से निजात नहीं मिल पा रही है। हालांकि फिजियोथेरेपी केंद्र में मरीजों की संख्या बढ़ने पर नई मशीनों की दरकार भी बनी है। क्योंकि घुटनों, कमर, गर्दन दर्द से पीड़ित 50 से अधिक मरीज यहां रोजाना पहुंच रहे हैं। इन मरीजों को फिजियोथेरेपिस्ट अभ्यास करवा रहे हैं।
जिला नागरिक अस्पताल भिवानी में करीब डेढ़ दशक पुरानी मशीनें मैनुअल तरीके से ही संचालित हो रहीं हैं जबकि फिजियोथेरेपी की काफी अत्याधुनिक स्वचालित मशीनें आ चुकी हैं। इन मशीनों में फिजियोथेरेपिस्ट को कम मशीन को ही ज्यादा काम करना पड़ता है। ये मशीनें न केवल दर्द वाली जगह पर तत्काल राहत देती हैं, बल्कि पूरे शरीर में भी खून का संचार ठीक रखने में भी मददगार होती हैं। अस्पताल के फिजियोथेरेपी सेंटर में स्वचालित मशीनें भी नहीं हैं।
फिजियोथेरेपी सेंटर में घुटनों के दर्द वाले मरीजों के लिए लगी साइकिल टूटी पड़ी है। इनका इस्तेमाल करने वाला मरीज खुद चोटिल हो सकता है। सबसे अधिक दिक्कत तो यह बनती है कि जब एक मरीज अभ्यास करता है तो दूसरा घंटों तक बैठा इंतजार करता है। एक मरीज को पुरानी मशीन इस्तेमाल के लिए थमाई जाती है तो उसे 15 से 20 मिनट अभ्यास में लगता है। दिनभर करीब 50 से अधिक मरीज आते हैं, ये मशीन घंटों थका देने वाला इंतजार करते ही अपने दर्द से परेशान हो जाते हैं।
नागरिक अस्पताल के फिजियोथेरेपी केंद्र के अंदर खराब मशीनों की जानकारी मुझे नहीं है। मैं इस पर संज्ञान लूंगा। अगर ऐसा है तो वहां की व्यवस्था को दुरुस्त कराया जाएगा। फिलहाल विभाग के समक्ष नई मशीनों का भी कोई मसौदा नहीं आया है। -डॉ. एडमिन, पीएमएस, जिला नागरिक अस्पताल, भिवानी।