हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड पर नगर परिषद का करीब तीन करोड़ रुपये टैक्स बकाया है। अकेला शिक्षा बोर्ड ही नहीं अनेक सरकारी विभाग, स्कूल, कॉलेज ऐसे है जिन पर लाखों-करोड़ों रुपये का टैक्स बकाया है। अंदाजन करीब साढे़ पांच करोड़ रुपये नप के प्रॉपर्टी टैक्स में फंसे है। अगर यह राशि मिल जाए तो शहर के अनेक विकास कार्यों को रफ्तार मिल सकती है। कर्मचारियों की कमी झेल रहा नगर परिषद इस टैक्स की रिकवरी के लिए भी कोई खास प्रयास नहीं कर रहा है।
शहर के सरकारी विभागों में फंसी टैक्स राशि के कारण नगर परिषद खुद कर्जदार है। हालात ये है कि नप बिजली का बिल तक नहीं भर पा रहा है। नगर परिषद का करोड़ों रुपया टैक्स के रूप में विभिन्न सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थाओं और प्राइवेट भवनों में फंसा है। आय के साधन नहीं होने और करोड़ों रुपये टैक्स में फंसे होने से नप की आर्थिक हालत कैसी होगी, सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
किस पर कितना बकाया
हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड पर करीब तीन करोड़ की बकाया राशि के अलावा बीडीपीओ कार्यालय पर 12 लाख 34 हजार, हुडा पर करीब 86 हजार चार सौ, स्टेट ऑफ हुडा (इंडस्ट्रीज एरिया) करीब तीन लाख, एफसीआई गोदाम पर एक लाख आठ हजार, प्रसार भारती पर करीब डेढ़ लाख, जनस्वास्थ्य विभाग पर करीब चार लाख, गवर्नमेंट कॉलेज पर करीब 14 लाख 16 हजार, वैश्य कॉलेज पर करीब 21 लाख, गवर्नमेंट गर्ल्स स्कूल पर करीब सात लाख, बाल भवन स्कूल पर करीब पांच लाख, गवर्नमेंट ब्वायज स्कूल पर करीब साढे़ 11 लाख, आदर्श कॉलेज पर करीब 57 लाख रुपये का टैक्स बकाया है। करीब 70 फीसदी मकान मालिक व दुकानदार भी टैक्स नहीं भर रहे।
वेतन तक नहीं मिल रहा कर्मचारियों को
नगर परिषद की आर्थिक हालत कितनी खस्ता है इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को छोड़ बाकी नियमित कर्मचारियों को पिछले करीब तीन माह का वेतन नहीं मिला है। शहर के विकास कार्य भी लगभग ठप है।
बिना कर्मचारी, कैसा टैक्स
नगर परिषद का भले ही करोड़ाां रुपये टैक्स में फंसे है मगर नप अधिकारियों की फिलहाल टैक्स रिकवरी की भी कोई खास योजना नहीं है। अधिकारियों की माने तो उनके पास टैक्स बिल बनाने के लिए भी कर्मचारी नहीं है। एक अनुभवी कर्मचारी सस्पेंड चल रहा है। जिसके बाबत डीसी को पत्र लिखा गया है।