भिवानी। जिले में पराली को लेकर किसान को जागरूक किया जा रहा है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से चलाए गए जागरूकता अभियान की प्रेरणा से जिले में अब तक 1,871 किसानों की ओर से 12,325 एकड़ धान फसल के प्रबंधन के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करवाया है। कृषि विभाग की वेबसाइट agriharyana.gov.in पर 30 नवंबर तक ऑनलाइन पंजीकरण करवाया जा सकता है।
डीसी महावीर कौशिक ने बताया कि येलो जोन में पंचायतों को जीरो बर्निंग लक्ष्य हासिल करने पर 50,000 रुपये प्रोत्साहन राशि के रूप में दिए जाएंगे। पिछले वर्ष धान की पराली जलाने की घटनाओं के आधार पर गांव को रेड जोन, येलो जोन और ग्रीन जोन में वर्गीकृत किया था। रेड और येलो जोन में गांवों में पराली जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सरकार द्वारा पंचायतों को भी प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। भिवानी जिले के तीन गांव सैय, चांग और सुई यलो जोन में है। डीसी ने बताया कि पराली की खपत के लिए दिनोद गांव में जीईएमसीओ एनर्जी पावर प्लांट लगा हुआ है, इस प्लांट में कोई भी किसान गांठें बनाकर कर बेच सकता है।
फसल अवशेष प्रबंधन बारे विस्तार से जानकारी देते हुए कृषि उप निदेशक डॉ. विनोद फोगाट व सहायक कृषि अभियंता नसीब सिंह धनखड़ ने बताया कि भिवानी जिले में इस वर्ष पराली जलाने की कोई भी घटना नहीं हुई। कृषि विभाग, राजस्व विभाग, पंचायत विभाग, पुलिस विभाग व अन्य विभागों की टीमें भी दिन-रात किसानों को जागरूक करने, निगरानी और फील्ड का दौरा कर निगरानी कर रही है। इसके अलावा हरसेक सेटेलाइट द्वारा भी 24 घंटे धान वाले क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है।
जागरूकता अभियान के तहत कृषि विभाग की टीम ने जिले के धान बिजाई वाले अनेक गांवों का दौरा किया और किसानों को धान की पराली के प्रबंधन के विभिन्न विकल्पों के बारे में अवगत करवाया। कृषि विशेषज्ञों एवं कृषि विकास अधिकारी तरुण कुमार ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के उपयोग, अवशेषों को अधिक से अधिक मिट्टी में मिलाने आदि की विस्तार से जानकारी दी।