भिवानी। शिवरात्रि पर शुक्रवार को छोटी काशी के शिवालयों में बम-बम भोले के जयकारे गूंजेंगे। जिलेभर में हरिद्वार और गोमुख से करीब तीन हजार से अधिक कांवड़ लाई गई हैं, जिनमें पवित्र गंगाजल से भगवान शिव का जलाभिषेक किया जाएगा। मंदिरों में कांवड़ियों के लिए शिविर लगाए गए हैं।
जोगीवाला मंदिर के महंत वेदनाथ महाराज ने कहा कि शिवभक्तों की यह यात्रा अत्यंत श्रद्धा और भक्ति से भरी होती है। गंगाजल के साथ कांवड़ चढ़ाने से शिवलिंग पर विशेष महत्व होता है। यह पर्व भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, शिवरात्रि पर भक्त अपनी भक्ति और श्रद्धा प्रकट करेंगे।
300 साल पुराना है जोगीवाला मंदिर
महंत वेदनाथ महाराज ने बताया कि कहा कि 300 साल पहले भगवान शिव की मूर्ति को जींद ले जाने वाला एक गाड़ीवान रात्रि विश्राम के लिए जोगीवाला मंदिर में रुके हुए थे। जब वह ठेले वाले सुबह आगे बढ़ने लगे तो गाड़ी वहां पर फंस गई और उनके बहुत कोशिश करने के बाद भी वे मूर्ति को यहां से नहीं ले पाए। यह सब देखने के पश्चात बाबा मेहुनाथ ने गाड़ीवान से प्रार्थना की और इस मूर्ति को यहां स्थापित करवा दिया। यहां शिवरात्रि पर भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है। महंत के अनुसार यहां पर जो भी शिव भक्ति पूजा अर्चना करते हैं, उनकी हर मनोकामना पूरी होती है। चरणामृत से भगवान शिव के आदि-अनन्त स्वरूप की पूजा की जाती है। चरणामृत पांच पदार्थों से बनता है।
कांवड़ियों के रुकने के लिए बना है हाल
मंदिर में कांवड़ियों को रोकने के लिए विशेष हाल मनाया गया है। इसमें हर साल का कांवड़िये कांवड़ लेकर आते हैं और विश्राम करते हैं। जोगीवाला मंदिर में हजारों की संख्या में कांवड़ चढ़ाई जाती हैं, जिससे भक्तों की मनोकामना पूरी होती है।
जोगीवाला मंदिर 300 साल पुराना मंदिर है। इसमें शिवजी की विशेष तौर पर पूजा की जाती है। दोनों शिवरात्रि पर हजारों की संख्या में शिव भक्त यहां पर इकट्ठे होते हैं और शिवलिंग का जलाभिषेक करके उनकी पूजा करते हैं।
- महंत वेदनाथ महाराज, मंदिर मठाधीश।