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दुपहिया वाहन एजेंसियां ही कर रही तेल के नाम पर खेल

Wed, 02 Dec 2015 12:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला भिवानी
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चरखी दादरी। अगर आप अपने दुपहिया वाहन की ऑयल सर्विस एजेंसी में करवाते हैं तो भी आपको सतर्क रहने की जरूरत है। यहां भी उपभोक्ताओं के हितों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। शायद ये पढ़कर थोड़ा अजीब लगे, पर यहां की जमीनी हकीकत ये ही है। इन एजेंसियों में सर्विस के दौरान डाले जाने वाले इंजन ऑयल(ल्यूबरिकेंट) के नाम पर उपभोक्ताओं से ठगी मारी जा रही है। सर्विस के दौरान खाली हुए ऑयल डिब्बों को दोबारा बाल्टियों में रखे तेल को डालकर अवैध तरीके से भरा जाता है। आपके वाहन में डाले जाने वाले इस ऑयल की गुणवत्ता के बारे में भी कुछ कहां नहीं जा सकता।
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अमर उजाला प्रतिनिधि को मंगलवार सुबह लोहारू रोड स्थित एक दुपहिया वाहन एजेंसी में चल रहे ऐसे मामले का पता चला। इसकी जांच की गई तो चौंकाने वाला माजरा सामने आया। दुपहिया वाहन एजेंसी का एक कर्मचारी समीप ही एक बिल्डिंग में बाल्टी में निकाले गए ऑयल से डिब्बे भरने में लगा था। इन्हें भरने के लिए प्रमाणित माप नहीं बल्कि प्लास्टिक का जग प्रयोग किया जा रहा था। जब उक्त कर्मचारी से इस बारे में सवाल किया गया तो उसने बताया कि ऐसा वो एक महीने से कर रहा है और उसका काम केवल इन्हें डिब्बों को भरकर एजेंसी के अंदर तक पहुंचाना है। इससे पहले की उक्त कर्मचारी वहां से जाता सारा मामला कैमरे में कैद हो चुका था।
बाक्स: प्रतिदिन करीब सौ दुपहिया वाहनों की होती है सर्विस
गुणवत्ता को लेकर ही दुपहिया वाहन चालक बाहर दुकानों पर सर्विस करवाने में हिचकिचाते हैं। ज्यादातर वाहन चालक अपने वाहनों की सर्विस एजेंसी में जाकर करवाने को ही प्राथमिकता देते हैं। जिस प्रकार से ये मामला सामने आया है, इसमें ऑयल की गुणवत्ता को लेकर भी उपभोक्ताओं के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है। क्या पता जो ऑयल यहां वाहनों में डाला जा रहा है, वो वाहन के लिए नुकसानदायक हो। लोहारू रोड़ स्थित इस एजेंसी पर सबसे अधिक दुपहिया वाहन सर्विस के लिए आते हैं। यहां काम करने वाले कर्मचरियों ने बताया कि वो प्रतिदिन 80 से 100 दुपहिया वाहनों की सर्विस कार्य करते है। ऐसे में कहना गलत नहीं होगा थोड़े से स्वार्थ के लिए सैकड़ों उपभोक्ताओं की जब पर एजेंसी डाका मार रही है। वहीं, इस मामले से अनजान कई उपभोक्ता तो सर्विस कार्य में घंटों लगने का नाम सुनकर अपने वाहन सर्विस के लिए छोड़कर चले जाते हैं।
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बाक्स: पैकेज्ड कोमोडिटी अधिनियम को ही रही अवहेलना
अगर किसी भी सामान की पैकिंग खोलकर उसके साथ छेड़छाड़ या मिलावट की जाती है तो वह माप-तोल विभाग के नियमों के खिलाफ भी है। ऐसा करते पाए जाने पर पैकेज्ड कोमोडिटी एक्ट 2011 के तहत कार्रवाई अमल में लाने का प्रावधान है। ऐसा करते पाए जाने पर माप तोल विभाग उक्त फर्म पर जुर्माना लगाता है।
उपभौक्ताओं की सहूलियतों के लिए करते है ऐसा
जब मामले को लेकर अमर उजाला प्रतिनिधि ने संबंधित वाहन एजेंसी के मैनेजर से बात की तो उन्होंने बताया कि हमारी कंपनी का तीन कंपनियों से टाई अप है। हमारे पास बैरक(ड्रम) और सील पैकेड डिब्बें दोनों आते हैं। इनमें दोबारा ऑयल उपभोक्ताओं की सूहलियतों के लिए भरा जाता है।

मामले की होगी जांच: डिप्टी जीएम
इस संबंध में जब संबंधित ऑयल कंपनी के अधिकारियों से फोन पर बात की गई तो डिप्टी जीएम ने बताया कि एजेंसी की मांग पर ही ऑयल के बैरक कंपनी भेजती है। बैरक से तेल वाहन एजेंसी को उपभोक्ता के सामने ही निकालना होता है। खुद एजेंसी कर्मचारी दोबारा से डिब्बों में ऑयल नहीं भर सकते है। हम इस मामले में संबंधित वाहन कंपनी की भी मदद लेंगे। तुरंत प्रभाव से इस मामले की जांच शुरू कर वाजिब कार्रवाई की जाएगी।
वर्जन:::::
अगर बिना किसी प्रमाणित माप के कोई ऐसा कर रहा है तो यह विभाग के नियमों के  खिलाफ है। किसी भी सामान को बिना पैकेजिंग लाइसेंस के दोबारा नहीं भरा जा सकता। शिकायत आने पर विभाग छापेमारी कर कार्रवाई करता है और दोषी से जुर्माना वसूल करता है।
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परमिंद्र सांगवान, इंस्पेक्टर, नाप-तोल विभाग

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