प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के नोटिस के बाद भी फैक्टरी और ड्यूल फ्यूल डीजल जनरेटर में बदलाव नहीं हो पाया है। इसकी एक वजह भिवानी में अभी तक किसी भी पेट्रोलियम कंपनी की पाइप लाइन नहीं होना है। जबकि सीएनजी पंप तो है, मगर ड्यूल फ्यूल जनरेटर में ईंधन की व्यवस्था कराना मुश्किल है।
फिलहाल औद्योगिक सेक्टर की 80 से अधिक औद्योगिक इकाइयों में डीजल जनरेटर नोटिस दिए जा चुके हैं। इसी तरह शहर के करीब 85 निजी अस्पताल व अन्य संस्थानों को भी डीजल जनरेटर में बदलाव का नोटिस थमा दिया है। इतना ही नहीं शहर के होटल और रेस्टोरेंटों में ठोस कचरा प्रबंधन नहीं होने पर भी नोटिस दिए हैं। इसके बाद इनमें अधिकांश में न तो नियम पूरे हुए हैं न ही ठोस कचरे का कोई प्रबंधन हो पाया है। अब विभाग इन संस्थानों की सीलिंग कराने की तैयारी में भी है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड कार्यालय की तरफ से शहर भर औद्योगिक इकाइयों और निजी अस्पतालों में इस्तेमाल हो रहे डीजल जनरेटरों के संचालन पर एनजीटी के आदेशों के बाद पाबंदी लगा दी है। निरीक्षण कर अधिकारियों ने अधिकांश को नोटिस भी थमा दिया है। इसके बाद से ही ये डीजल जनरेटर शांत हैं, लेकिन इनको ड्यूल फ्यूल कराने में दुविधा बनी है। इसके लिए उद्योग मालिकों के पास कोई विकल्प भी नहीं दिखाई दे रहा है न ही यहां कोई गैस कंपनी की पाइप लाइन डली है। ऐसे में इन जनरेटरों को ड्यूल फ्यूल बनाना मुश्किल हो रहा है।
इसी तरह शहर भर में चल रहे बैंक्वेट हॉल, मेरिज पैलेस, रेस्टोरेंट और होटल में ठोस कचरा निस्तारण का भी प्रबंध नहीं है। हालांकि नगर परिषद भी इन्हें ठोस कचरा के निस्तारण की व्यवस्था अंदर ही कराने की हिदायतें और नोटिस दोनों दे चुकी हैं। जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी सख्त हो गया है। बावजूद इसके इनमें कोई व्यवस्था नहीं बनी है। इससे सूखा और गीला कचरा बाहर ही निस्तारण हो रहा है। कुछ चुनिंदा होटलों के अंदर ही ठोस कचरे का निस्तारण मौके पर ही हो रहा है।
डीजल इंजनों को ड्यूल फ्यूल किए जाने के संबंध में नोटिस दिए गए हैं। हालांकि उन्हें 31 दिसंबर तक इन्हें ड्यूल फ्यूल कराने की मोहलत भी दी गई है। इसी तरह शहर के होटल, रेस्टोरेंट, मेरिज पैलेस व अन्य बड़े संस्थानों में ठोस कचरा निस्तारण के प्रबंध अनिवार्य है। निरीक्षण के दौरान प्रबंध नहीं मिलने पर नोटिस दिए जा रहे हैं। इनमें दो बार नोटिस पर भी ये प्रबंध पूरे नहीं किए हैं, उन्हें सील कराने की प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी।
- विजय सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भिवानी।