तोशाम (भिवानी)। एक जनवरी को डाडम पहाड़ में हुए हादसे की जांच के लिए शुक्रवार को एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) की टीम ने घटनास्थल का दौरा किया। करीबन पांच घंटे तक टीम ने हादसे के संबंध में मंथन किया।
दूसरी ओर, ग्रामीणों ने टीम को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में पहाड़ ठेकेदारों पर कार्रवाई की मांग करते हुए नियमों को ताक पर रखकर अवैध खनन किए जाने सहित विभिन्न आरोप लगाए। सुबह करीबन साढ़े दस बजे एनजीटी की टीम के सदस्य केके गर्ग, डॉ. सुनील दवे, डॉ. रविंद्र, खनन सुरक्षा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर एके दास, अतुल सिरस्कार, राजकुमार सपरा रिटायर्ड आईएफएस, राकेश भोंसले कार्यकारी अभियंता प्रदूषण नियंत्रण विभाग, एसडीएम मनीष फौगाट, थाना प्रभारी सुखबीर सिंह, जिला खनन अधिकारी भूपेंद्र सिंह, जिला वन अधिकारी जितेंद्र सिंह अहलावत सहित पूरी टीम के साथ डाडम पहाड़ी में पहुंचे। करीबन एक घंटे तक टीम ने घटनास्थल का दौरा कर साक्ष्य जुटाए। पहाड़ी का निरीक्षण करने के बाद टीम तोशाम स्थित लोक निर्माण विश्राम गृह में पहुंची और संबंधित अधिकारियों के साथ चार घंटे तक मंत्रणा की। इस दौरान टीम ने गोवर्धन माइंस कंपनी के अधिकारियों से भी बातचीत की।
टीमें कर रहीं हादसे की जांच
उल्लेखनीय है कि डाडम पहाड़ में घटना की जांच को लेकर एक फरवरी को राज्य सरकार द्वारा गठित रिटायर्ड आईएएस एसएस प्रसाद के नेतृत्व में 8 सदस्यों की कमेटी ने भी दौरा कर स्थिति का जायजा लिया था। इसके अलावा अन्य टीमें भी घटना को लेकर जांच में जुटी हुई हैं। उल्लेखनीय है कि एक जनवरी को हुए हादसे में पांच लोगों की मौत हो गई थी। कई वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए थे।
ज्ञापन सौंपकर लगाए आरोप, ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग
एनजीटी की टीम को विभिन्न गांवों के हवाले से ग्रामीणों ने एक ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से ठेकेदारों पर कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है। ज्ञापन में आरोप लगाए गए हैं कि ठेकेदारों के द्वारा अवैध तरीके से खनन करके पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। लीज एरिया से बाहर खनन कार्य किया जा रहा है। मजदूरों की जान जोखिम को डालकर मजदूरों के बिना किसी रिकॉर्ड के यहां घोर लापरवाही की जा रही है। यहां तक की रात्रि को पत्थर चोरी भी किया जाता है। आरोप लगाए हैं कि बड़े बड़े हादसे समय-समय पर यहां होते रहते हैं। पहाड़ में काफी गहराई तक खनन किए जाने के आरोप ज्ञापन में लगाए गए हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि जीपीएस पिलर तक अपने मनमाफिक तरीके से उखाड़ दिए जाते हैं।