भिवानी। नए साल में नए स्वरूप में शहर की छोटी सरकार होगी। इसके लिए भावी प्रत्याशी अभी से जोरशोर से प्रचार में जुटे हैं। हालांकि फरवरी 2022 में वर्तमान नगर परिषद का कार्यकाल समाप्त हो रहा है।
ढाई लाख की शहरी आबादी में करीब डेढ़ लाख वोटर हैं। इनमें भी युवा वोटरों की अच्छी खासी फौज है। वोटरों का रुझान किसकी तरफ होगा और कौन से मुद्दे उनके मन को भाएंगे, इसके समीकरण अभी से बनने लगे हैं। नगर परिषद चुनावी आहट के दस्तक देने से पहले ही भावी उम्मीदवारों की भी फौज चुनावी मैदान में उतर मोर्चे बंदी में जुट गई है। भावी उम्मीदवार अपनी-अपनी ढपली, अपना-अपना राग अलाप रहे हैं। इस बार नगर परिषद की प्रधानी महिला के हाथ में होगी। इसी को लेकर कई महिला सरकारी नौकरी का मोह छोड़कर चेयरपर्सन की कुर्सी के सब्जबाग भी देखने लगी हैं। नप चेयरपर्सन के लिए अभी से चुनावी मैदान में छह पंजाबी, दो ब्राह्मण, दो राजपूत, दो पिछड़ा वर्ग की महिला उम्मीदवार खुलकर सामने आ गई हैं, जबकि पार्षदों की बात करें तो हर वार्ड से चार से पांच चेहरे ऐसे हैं, जो भावी पार्षद के रूप में चुनावी प्रचार में जुटे हैं।
भिवानी नगर परिषद में हाल ही में नई वार्डबंदी के अनुसार आरक्षित वार्डों की घोषणा हुई है, जबकि नप चेयरपर्सन सामान्य वर्ग की महिला के लिए पहले ही घोषित हो चुका है। भिवानी शहर में ढाई लाख आबादी के हिसाब से सभी 31 वार्डों को नई वार्डबंदी के हिसाब से बांटा गया है। एक वार्ड में करीब पांच हजार वोटर शहर की भावी सरकार चुनने में अपना अहम योगदान निभाएंगे। वर्तमान नगर परिषद की कार्यकारिणी का दो माह कार्यकाल अभी बचा है। इस कार्यकाल में कई पार्षद फिर से चुनावी मैदान में उतरने की रणनीति बना रहे हैं तो कुछ पार्षद नप चुनाव से तौबा कर किनारा करने के लिए तैयार बैठे हैं। मगर नगर परिषद की राजनीति के चाणक्य कहलाने वाले दिग्गत पार्षद सीधे चेयरपर्सन की कुर्सी पर ही दाव खेलने की नीति बनाने में जुटे हैं। ये खुद तो चुनाव नहीं लड़ सकते, मगर अपनी पत्नी, बहन या फिर किसी नजदीकी रिश्तेदारी में नए महिला के चेहरे को सामने ला सकते हैं, जिनके संकेत भी कई पार्षदों ने अभी से दे दिए हैं।
कोई शहरवासियों के नाम लिख रहा चिट्ठी तो कोई नप एजेंडे में गिना रहा मुद्दे
चेयरपर्सन के लिए भावी उम्मीदवारों में कोई शहरवासियों के नाम चिट्ठी लिखकर अपनी बात रख रहा है तो कोई नप एजेंडे में अपने भावी मुद्दे गिना रहा है। लोगों के बीच पहुंचने के भी बहाने तलाशे जा रहे हैं, जिससे की उनके चेहरे लोगों के सामने बने रहें और वोट मांगने की नौबत आए तो इनसे संपर्क करना आसान हो जाए। मगर कई पार्षद के भावी उम्मीदवार तो सीधे अपने वार्डों में अभी से लोगों की सभा कर पुरानी रणनीति पर काम कर रहे हैं।
जातीय समीकरण व डमी उम्मीदवारों की भी बनने लगी रणनीति
नप चुनाव की आहट अभी दूर है, लेकिन अभी से सभी वार्डों में जातीय वोटों के समीकरण बनने लगे हैं। वहीं डमी उम्मीदवारों की रणनीति भी बनने लगी है। क्योंकि जीत के लिए ज्यादा वोट की नहीं, बल्कि वोट बांटकर चोट की जरूरत है। यह रणनीति दिग्गज नेताओं के लिए ब्रह्मास्त्र की तरह अब तक काम करती आ रही है, क्योंकि जहां वोट उन्हें नहीं मिलते वे उन वोटों को बांट देते हैं, ताकि उनके पक्ष में ज्यादा वोट भले ही न आएं, मगर फिर भी वे बहुमत हासिल करने में कामयाब हो जाते हैं।
नए बने युवा वोटरों की सूची अभी नहीं हुई तैयार
चुनाव तहसीलदार कार्यालय की ओर से नवंबर में एक माह तक नए वोट बनाने और वोटर आईडी बनवाने के अलावा वोट में त्रुटि ठीक कराने के लिए विशेष अभियान चलाया था, लेकिन अब तक नए युवा शहरी वोटरों की सूची तैयार नहीं हुई है। ये वोटर विधानसभा चुनावों के साथ साथ नगर परिषद के चुनावों में भी निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
गांव में राजनीति, शहर में ठिकाना
शहर की अधिकतर बाहरी कॉलोनियों के अंदर ग्रामीण क्षेत्र के लोगों ने अपना आशियाना बना लिया है, लेकिन अभी भी उनके वोट गांव में ही बने हुए हैं। ऐसे वोटर करीब 10 से 15 फीसदी हैं। जो रहते तो शहर में हैं, मगर राजनीति में हिस्सेदारी गांव में निभाते हैं। ये वोटर नप चुनाव में कोई भूमिका नहीं निभा पाएंगे।
डेढ़ लाख मतदाता
भिवानी नगर परिषद में नई वार्डबंदी के अनुसार कई वार्डों में उम्मीदवारों के समीकरण बदल गए हैं। जो वार्ड पहले सामान्य पुरुष के लिए होते थे, उनमें कुछ महिला आरक्षित आ गए हैं। एससी वर्ग के लिए छह की बजाय पांच वार्ड ही हैं। जिसको लेकर भी आपत्ति उठाई गई है। करीब डेढ़ लाख मतदाता हैं, नए वोटर भी जुड़ेंगे। चुनावी घोषणा अभी नहीं हुई है, मगर भावी प्रत्याशी अपनी जमीन अभी से मजबूत करने में जुटे हैं।
- मामनचंद प्रजापति, उप प्रधान, नगर परिषद भिवानी।