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पिता की जिद से बदली जिंदगी, बड़ी बहन के बाद छोटी भी बनी जज

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नवचयनित जज सारिका के परिजन खुशी मनाते हुए । संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : Bhiwani
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समाज के तानों के बावजूद एक पिता की जिद और बेटियों की मेहनत ने पूरे परिवार की किस्मत ही बदल दी। पहले बड़ी बहन जज बनी और अब दूसरी। दो बेटियों के जज बनने से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है और खूब बधाइयां मिल रही है। यह सब है नव चयनित जज सारिका के घर। वहीं उसकी
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सारिका के पिता सेवानिवृत्त प्रोफेसर कृष्ण लाल रंगा है। जिन्होंने सामाजिक तानों के बावजूद अपनी बेटियों की शिक्षा पर फोकस रखा और बेटियों ने भी उन्हें निराश नहीं किया। उनकी तीसरी बेटी भी एमए पीएचडी है।
मंगलवार को जारी न्यायाधीशों की सूची में भिवानी की डीसी कॉलोनी वासी सेवानिवृत्त प्रोफेसर कृष्ण लाल रंगा की छोटी बेटी सारिका का नाम भी शामिल है। सारिका को जींद जिले के सफीदो सेंटर मिला है। सारिका फिलहाल जनस्वास्थ्य विभाग में एडीए के पद पर हैं और न्यायाधीश बनने के बाद बुधवार को रिलीव हुईं। वीरवार को वह जींद में कार्यभार ग्रहण करेंगी। नियुक्ति पर पिता, माता मंगा देवी, पति नवीन कुमार, चाचा रघुवीर सिंह एडवोकेट, भाई साहिल, बहन समीरा, चाची संतोष ने खुशी जताई।
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लोगों को न्याय दिलाने का बचपन से था सपना
न्यायाधीश बनी सारिका ने बताया कि शुरुआत से ही उसका सपना ज्यूडसरी में जाने का था। इसी के चलते उसने एमडीयू से एलएलबी और एलएलम की। पीएचडी की। अब उसका लक्ष्य है कि हरेक जरूरतमंद को न्याय मिले। किसी के साथ भी अन्याय न हो। जो युवा इस क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, उनको संदेश है कि पढ़ाई नियमित रखे। हरेक टॉपिक की अच्छे से तैयारी करें, सफलता अवश्य मिलेगी। अपनी सफलता का श्रेय परिजनों और पति नवीन कुमार इनकम टैक्स ऑफिसर, बंगलुरु को देते हुए कहा कि परिवार ने काफी सहयोग किया। चाचा एडवोकेट रघुवीर सिंह रंगा ने भी काफी मार्गदर्शन किया।
बेटा पैदा करने का सामाजिक दबाव था मगर मन में बेटियों को उच्च शिक्षा का सपना था
कृष्ण लाल बताते हैं कि पहले बेटा पैदा करने का सामाजिक दबाव रहता था। मगर उनके व उनकी पत्नी मंगा देवी के मन में कभी भी बेटा-बेटी का फर्क नहीं आया। उन्होंने अपनी बेटियों को बेटा बनाने की ठानी और बेहतर शिक्षा देने का सपना देखा। बेटियों ने भी हमें निराश नहीं किया। बेशक मैं उन्हें प्रोफेसर बनाना चाहता था मगर बेटियां जज बनना चाहती थी और उन्होंने अपने सपने पूरे किए। खुशी है कि बेटियां सफल रही। कृष्ण लाल बताते है कि वे 1972 में प्रोफेसर लगे थे और उनकी पहली नियुक्ति लड़कियाें के कॉलेज में थी। तब देखा की समाज में बेटियों की स्थिति दयनीय थी।
परिवार से मिली कानून की पढ़ाई की शिक्षा
सारिका को कानूनी की पढ़ाई की शिक्षा परिवार से ही मिली। परिवार के अधिकतर सदस्यों ने कानूनी की पढ़ाई की। पिता भले ही पॉल्टीकल साइंस के प्रोफेसर बने हो मगर अन्य सदस्यों ने कानून की पढ़ाई की। सारिका की बड़ी बहन
मोनिका 2010 में जज बनी जो आज सीनियर सब जज हैं। सारिका के पिता पांच भाई हैं। सबसे बड़े प्रताप सिंह आईजी रिटायर है। स्वर्गीय प्रहलाद सिंह आईएएस रिटायर हैं और छोटे भाई रघवीर सिंह रंगा अधिवक्ता हैं। तीनों ने कानून की पढ़ाई की। सबसे छोटे लक्ष्मण रंगा गांव बलियाली में खेतीबाड़ी करते हैं। रघवीर सिंह रंगा के दो बच्चे हैं। बेटे साहिल ने एमटेट की है तो बेटी समीरा आईआईटी के बाद एक कंपनी में जॉब कर रही है।
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