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Bhiwani News: लेटलतीफी व अधूरी सूचना से फंसे नगर परिषद के अधिकारी, 31 से पहले देना होगा शपथ पत्र

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भिवानी। जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी देने में लेटलतीफी और अधूरी सूचना देने के मामले में नगर परिषद भिवानी के अधिकारी फंस गए हैं। राज्य सूचना आयोग ने आदेश दिया है कि 31 दिसंबर से पहले नगर परिषद को आरटीआई कार्यकर्ता को मूल शपथ पत्र देना होगा और इसकी एक प्रति आयोग को भी भेजनी होगी। साथ ही नगर परिषद के संबंधित कर्मचारी को व्यक्तिगत रूप से 31 दिसंबर को चंडीगढ़ में आयोग के समक्ष उपस्थित होने के लिए तलब किया गया है।
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मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि नगर परिषद ने आरटीआई में आधी अधूरी जानकारी देते हुए लिखा कि शहर के छह नामी स्कूलों से संबंधित कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। इससे इन स्कूलों की मान्यता और बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। बिल्डिंग कोड और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मसलों में यह लापरवाही उजागर हो रही है।

स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि चार अक्तूबर 2017 को उन्होंने शहर के छह निजी विद्यालयों के भवन नक्शा, वाहन पार्किंग और सीएलयू से संबंधित पांच बिंदुओं पर आधारित आरटीआई 2005 के तहत सूचना मांगी थी। इसमें पूछा गया था कि विद्यालयों का नक्शा कब पास हुआ और सीएलयू कब दी गई, कितने मंजिला भवन का नक्शा पास है या नहीं।
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विभाग ने कोई जानकारी नहीं दी। इसके बाद नौ नवंबर 2017 को प्रथम अपील की गई जिसमें नगराधीश ने सात दिन में सूचना देने के आदेश दिए। फिर भी कोई जानकारी नहीं दी गई। मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंचा। आयोग ने 28 मार्च 2018 को नगर परिषद को सूचना देने के निर्देश दिए और स्पिनिंग ऑर्डर (विशेष आदेश) जारी किए। इसके बाद करीब 12 बार कारण बताओ नोटिस जारी किए गए लेकिन नगर परिषद अधिकारी सूचना देने में टस से मस नहीं हुए।

अंततः एक अगस्त 2019 को आरटीआई कार्यकर्ता को अधूरी सूचना भेजी गई जिसमें नगर परिषद ने लिखा कि इन छह स्कूलों के संबंध में कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। इसके बाद राज्य सूचना आयुक्त अमरजीत सिंह ने भिवानी नगर परिषद को 31 दिसंबर से पहले मूल शपथ पत्र देने और इसकी प्रति आयोग को भेजने का आदेश दिया। संवाद





नगर परिषद के अधिकारियों ने सूचना अधिकार अधिनियम के तहत आधी अधूरी सूचना दी है। नगर परिषद

ने अपने जवाब में यह तक लिखा है कि छह स्कूलों से संबंधित कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। इससे प्रतीत होता है कि नगर परिषद या तो तथ्य छिपा रहा है या फिर स्कूलों को बचा रहा है। बच्चों की सुरक्षा और नप के बिल्डिंग कोड के हिसाब से कार्यालय में इनसे जुड़ा रिकॉर्ड दुरुस्त रखना बेहद जरूरी है। अगर नप के पास रिकॉर्ड ही नहीं है तो इतने सालों से ये स्कूल मान्यता लेकर कैसे चल रहे हैं। -बृजपाल सिंह परमार, अध्यक्ष स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन भिवानी।





मेरे संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं आया है। अगर सूचना आयोग की तरफ से कोई पत्र आया है तो इस संबंध में संबंधित कर्मचारी से बात कर उसका जवाब दिया जाएगा। जन सूचना अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी तय अवधि में आरटीआई कार्यकर्ता को मुहैया कराए जाने के संबंध में निर्देश दिए हुए हैं। -राजाराज, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, भिवानी।
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