भिवानी। महम रोड स्थित गोशाला ट्रस्ट में वीरवार को गोपाष्टमी पर्व हवन और गोपूजन के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि विधायक घनश्याम सर्राफ ने शिरकत की तथा विशिष्ट अतिथि के तौर पर पशुपालन विभाग के उपमंडलाधिकारी डॉ. राजेश जाखड़ पहुंचे। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी नंद किशोर अग्रवाल ने की तथा संयोजक कमल प्रसाद अग्रवाल रहे। कार्यक्रम के दौरान गोशाला के सफाई कर्मचारियों को सम्मानित भी किया गया।
सर्राफ और अग्रवाल ने कहा कि गो माता भारतीय संस्कृति की आत्मा बताते है। इनका संरक्षण और सम्मान हर व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य है। गोसेवा से जीवन में सुख-शांति आती है।गोपाष्टमी हिंदू धर्म में गो माता और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति श्रद्धा का पर्व है। यह पर्व कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस अवसर पर डॉ. विजय सनसनवाल, मोहनलाल बलेसरा, धर्मपाल, कुसुम, रीतू, राजेंद्र, जोगेंद्र, धर्मबीर मौजूद रहे।
अग्रवाल सभा ने मनाया गोपाष्टमी पर्व
भिवानी। अग्रवाल सभा ने गोपाष्टमी पर्व पर वीरवार को गो चारा सेवा और प्रसाद वितरण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इसी क्रम में पतराम गेट गो शाला गोचारा सेवा व प्रसाद सेवा कार्यक्रम का आयोजन किया। इस मौके पर अग्रवाल सभा के प्रधान सुनील सर्राफ ने कहा कि गोपाष्टमी का पर्व भगवान श्रीकृष्ण और गोमाता को समर्पित है। इसलिए यह दिन गो सेवा, संरक्षण और आभार प्रकट करने का प्रतीक बन गया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गोमाता को मातृत्व और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। इस अवसर पर विजय बंसल टैणी, अधिवक्ता अजय सर्राफ, मनीष वैद, प्रकाश मित्तल, पंकज कसेरा, मुकेश बंसल मौजूद रहे। संवाद
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गाय हमारे संपूर्ण जीवन का आधार : चरणदास
भिवानी। युवा जागृति जनकल्याण मिशन ट्रस्ट के बैनर तले और बालयोगी महंत चरणदास महाराज के पावन सान्निध्य में गोपाष्टमी के अवसर पर वीरवार को शहर में एक विशाल गोसेवा एवं गोसंवर्धन जागरूकता परिक्रमा निकाली गई। इस परिक्रमा का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को गोपालन के महत्व से अवगत कराना और उन्हें गो संरक्षण के लिए प्रेरित करना था। इस दौरान बालयोगी महंत चरणदास महाराज ने गोपालन के महत्व को धार्मिक, आर्थिक और पर्यावरणीय, तीनों दृष्टिकोण से समझाया। बालयोगी महंत चरणदास महाराज ने कहा कि हमारी संस्कृति में गाय को माता का दर्जा दिया गया है, और यह सिर्फ इसलिए नहीं कि हम उनकी पूजा करते हैं, बल्कि इसलिए कि वह हमारे संपूर्ण जीवन का आधार हैं। संवाद