विरोध याचिका पिता संजय ने कई गंभीर आरोप लगाए हैं। याचिकाकर्ता संजय ने दावा किया है कि पुलिस ने मनीषा के शरीर पर मिले चोट के निशानों की ठीक से जांच नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि शव परीक्षण रिपोर्ट में कुछ विसंगतियां थीं, जिन पर ध्यान नहीं दिया गया। याचिका में कुछ गवाहों के बयानों को भी नजरअंदाज करने का आरोप है। इन गवाहों ने घटना से पहले कुछ संदिग्ध गतिविधियों को देखा था। परिजनों ने पुलिस पर दबाव में काम करने का आरोप लगाया है। उनका मानना है कि कुछ प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की जा रही है। याचिका में विशेष रूप से कुछ पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। जिन्होंने कथित तौर पर जांच में लापरवाही बरती। यह याचिका मामले की पूरी तस्वीर बदलने की क्षमता रखती है। इसमें कई नए तथ्य और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए हैं।
मनीषा मौत मामले में पुलिस की जांच शुरुआत से ही सवालों के घेरे में रही है। पिता संजय ने आरोप लगाया था कि पुलिस ने घटना को आत्महत्या के रूप में दिखाने की कोशिश की। जबकि उनके पास हत्या के पर्याप्त सबूत थे। पुलिस ने घटना के तुरंत बाद आवश्यक वैज्ञानिक जांच में देरी की। जिससे कई महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो गए या दूषित हो गए। जांच अधिकारियों ने कई बार अपने बयान बदले, जिससे संदेह और गहरा गया। स्थानीय कार्यकर्ताओं ने भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने जनता के दबाव को नजरअंदाज किया। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, "यह सिर्फ मनीषा का मामला नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था पर सवाल है।" पुलिस ने अभी तक इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी है। उनकी ओर से केवल यह कहा गया है कि जांच नियमानुसार की गई है।
मनीषा के पिता संजय ने शुरुआत से ही न्याय के लिए संघर्ष किया है। उन्होंने कई बार प्रदर्शन किए और अधिकारियों से मुलाकात की। उनका कहना है कि मनीषा की मौत एक साजिश का नतीजा है। वे चाहते हैं कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले। मनीषा की मां ने भावुक होकर कहा कि उनकी बेटी को न्याय मिलना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया। परिवार ने अब अदालत पर अपनी अंतिम उम्मीद जताई है। उनका मानना है कि अदालत ही उन्हें न्याय दिला सकती है। इस मामले ने स्थानीय लोगों में भी गहरी चिंता पैदा की है। लोग चाहते हैं कि सच्चाई सामने आए और कोई भी अपराधी बच न पाए। परिवार ने हर संभव कानूनी रास्ता अपनाने का संकल्प लिया है।
सीबीआई के पूर्व उप कानूनी सलाहकार एडवोकेट हर्ष मोहन सिंह ने बताया कि सीबीआई अदालत ने विरोध याचिका को स्वीकार कर लिया है। अब अदालत पुलिस द्वारा दाखिल की गई अंतिम रिपोर्ट और विरोध याचिका दोनों की समीक्षा करेगी। अदालत के पास कई विकल्प हैं। वह पुलिस को आगे की जांच का आदेश दे सकती है। या फिर किसी अन्य जांच एजेंसी को मामला सौंप सकती है। अदालत सीधे तौर पर मामले की सुनवाई भी कर सकती है। अगली सुनवाई में याचिकाकर्ता संजय के वकील हर्ष मोहन सिंह अपने तर्क प्रस्तुत करेंगे। पुलिस को भी अपनी रिपोर्ट का बचाव करने का मौका मिलेगा।