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मंडी में कपास की नहीं हुई खरीद, किसानों और व्यापारियों ने जताया रोष

Tue, 27 Oct 2015 12:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला भिवानी
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भिवानी। दो प्रतिशत टैक्स रिफंड नहीं होने व टैक्स में वृद्धि के विरोध में कॉटन फैक्ट्री मालिकों ने अनामंडी में कपास की खरीद बंद कर दी है। कपास की खरीद नहीं होने से किसानों की कपास की फसल मंडी में खुले आसमान के तले है। खरीद नहीं होने पर किसानों, आढ़तियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रोष जताया। कॉटन फैक्ट्री मालिकों का कहना है कि जब तक दो प्रतिशत रिफंड नहीं होता, वे कपास की खरीद नहीं करेंगे।
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कपास की खेती करने वाले किसानों की समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। पहले सफेद मक्खी ने किसानों की अधिकतर फसल बर्बाद कर दी। बची 30 से 40 प्रतिशत कपास को लेकर किसान बेचने के लिए मंडियों में पहुंचे, तो यहां खरीद ही नहीं हो रही।
दो प्रतिशत टैक्स रिफंड नहीं होने पर हरियाणा कॉटन जीनर्स एसोसिएशन के आह्वान पर प्रदेशभर के कॉटन फैक्ट्री संचालकों ने कपास की खरीद बंद कर दी है। तीन दिन से खरीद नहीं होने के कारण किसान अपनी फसल लिए मंडी में बैठे है। कपास की खरीद नहीं होने से खफा किसानों, आढ़तियों ने सोमवार को मंडी में नारेबाजी कर रोष जताया और जल्द खरीद शुरू कराने की मांग की। किसानों ने बताया कि कपास की बिक्री पर ही उनके परिवार का खर्च निर्भर है। तीन दिन से मंड़ी में आ रहे है मगर उनकी कपास ही नहीं बिक रही।
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मंडी के आढ़ती हनुमान गोयल ने बताया कि मिल मालिकों ने कपास को लेना बंद कर दिया। मिल मालिकों की मांग है कि बढ़े हुए सेल टैक्स व रुई बेचने के बाद वापस मिलने वाला दो फीसदी टैक्स रिफंड किया जाए। मिल मालिकों ने अपनी मांग पूरी न होने तक अनिश्चितकालीन हङंताल की है। मंडी सुपरवाइजर योगेश शर्मा ने कहा कि किसानों की सुविधा के लिए आढ़तियों को कपास खरीदने के निर्देश जारी किए हैं।
50 हजार का हर रोज हो रहा नुकसान
हरियाणा कॉटन जीनर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी रामनिवास ने बताया कि प्रति एक सौ रुपये पर 4.20 रुपये चार्ज देकर कपास फैक्ट्री मालिक माल की खरीद करते है। 95 फीसदी तक उनका माल प्रदेश के बाहर भेजा जाता है, जिस पर दो प्रतिशत टैक्स लगता है। पहले दो प्रतिशत टैक्स रिफंड होता था। मगर अब सरकार ने यह रिफंड करना बंद कर दिया है। अब करीब छह प्रतिशत टैक्स फैक्ट्री मालिकों को देना पड़ रहा है। ऐसे में उन्हें भारी नुकसान हो रहा है। अब भी कपास की खरीद नहीं होने से 50 हजार रुपये प्रतिदिन का नुकसान हो रहा है। प्रदेश में 144 कॉटन यूनिट है। मंत्रियों ने मुलाकात में हमारी मांग मानने का आश्वासन दिया था, जिस कारण उन्होंने फैक्ट्री चलाई। अब वह नुकसान अलग से हो गया। कॉटन फैक्ट्रियों में अधिकतर लेबर यूपी, बिहार, बंगाल से है। अब काम बंद होने के कारण वह भी छोड़-छोड़ कर जा रही  है। ऐसे में यह भी समस्या फैक्ट्री मालिकों के समक्ष गहरा गई है।
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