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लॉकडाउन में भी रोजाना गोरखधंधे से जुड़े दलाल कर रहे लाखों का माल इधर से उधर

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नियमों और कानून के साथ साथ मेडिकल मानकों को ताक पर रखकर घरों के अंदर महिलाओं व बच्चों के हाथों तैयार कराई जा रही नकली पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्यूपमेंट (पीपीई किट) के तार पड़ोसी जिलों से भी जुड़े हैं।
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लॉकडाउन के बावजूद इस गोरखधंधे में जुड़े दलाल शहर की करीब 40 से अधिक कॉलोनियों के सैकड़ों घरों के अंदर रोजाना ही कच्चा माल भेज रहे हैं और तैयार माल उठवा रहे हैं। इन्हें लॉकडाउन में घर से बाहर निकलने पर पूछने वाला भी शायद कोई नहीं है। अमर उजाला की पड़ताल में यह भी उजागर हुआ है कि घरों में बनाई जा रही नकली पीपीई किट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी मानकों पर खरी नहीं उतर रही है। जबकि घरों में तैयार कराए जा रहे माल में इस गोरखधंधे से जुड़े दलाल और फैक्ट्री संचालक टैक्स चोरी के साथ साथ अन्य सरकारी विभागों को भी मोटा चूना लगा रहे हैं।
नियम के अनुसार किसी भी तरह का उत्पाद तैयार करने के लिए इंस्ट्रीज को लाइसेंस लेना पड़ता है। इसके बाद ही उस वस्तु का उत्पादन फैक्ट्री के अंदर होता है और कच्चा माल फैक्ट्री में आने और तैयार माल बेचे जाने पर जीएसटी सहित पक्का बिल भी बनता है। मगर घरों के अंदर हजारों की संख्या में नकली मास्क और पीपीई किट को बाइकों पर ही एक जगह से दूसरी जगह ढोया जा रहा है। इनके पास कोई बिल और इन्हें लाने ले जाने की कोई अनुमति तक नहीं है। अगर किसी गाड़ी में कोई माल पुलिस पकड़ती है तो उसे ले जाने की बिल्टी यानी जिस फर्म से आया है और जिस फर्म में ले जाया जाता है, उसका सबूत होना जरूरी है।
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साथ ही जीएसटी सहित बिक्री या खरीद का बिल भी अनिवार्य है। ये सभी नियम शायद अधिकारियों के जहन में तो आते हैं, फिर भी इन पर कार्रवाई की कोई पहल नहीं कर रहा है। यही वजह है कि सैकड़ों घरों के अंदर ही नकली पीपीई किट बनाई जा रही हैं। इतना ही नहीं ग्रामीण इलाकों में भी अब इस गोरखधंधे के दलालों के तार जुड़े हैं, जहां ग्रामीण भी नकली पीपीई किट को घर में ही बनाने में जुट गए हैं। जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन तो हाथ पर हाथ धरे किसी अनहोनी के इंतजार में बैठा है।
वहीं, इसके लिए जिम्मेवार सरकारी विभागों के अधिकारी भी खामोश बैठे हैं। बताया जा रहा है कि घरों के अंदर तैयार किए जा रहे नकली पीपीई किट को दलाल भिवानी के पड़ोसी जिलों में भेज रहे हैं। जहां से नकली माल पर असली का लेबल लगाकर इन्हें धड़ल्ले से बाजार में आंखों में धूल झोंककर बेचा जा रहा है।
खतरे में कोरोना योद्धाओं की जान, प्रशासन दलालों पर मेहरबान
कोरोना वायरस को हराने के लिए डॉक्टर्स, नर्स, पुलिस, सरकारी कर्मचारी और स्वयंसेवक जीजान से जुटे हैं। कोरोना के इन योद्धाओं की जान नकली पीपीई किट की वजह से खतरे में पड़ सकती है, लेकिन फिर भी पुलिस और प्रशासन इन दलालों पर मेहरबान बनी है। ये दलाल पुलिस व जिला प्रशासन से बेखौफ होकर पूरे शहर में सांझ ढलते ही घर से निकलकर एक घर से दूसरे और फिर तीसरे से चौथे घर पहुंचकर तैयार की गई नकली पीपीई किट को एकत्रित करना शुरू करते हैं। बताया यह भी जा रहा है कि ये दलाल जिला प्रशासन द्वारा जारी किसी पास व अनुमति का भी गलत इस्तेमाल कर रहे हैं।
संगठन ने इस मामले की केंद्र व राज्य सरकार के समक्ष शिकायतें भेजी हुई हैं। अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। नकली पीपीई किट और मास्क तैयार करने के मामले में महामारी अधिनियम 1897 के तहत आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का भी प्रावधान है। जल्द ही संगठन इस मामले में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के समक्ष पत्र भेजकर उच्च स्तरीय जांच की मांग भी उठाएगा। इस गैर कानूनी कार्य में लगे लोगों ने तो कुछ वाहनों की अनुमति प्रशासन से ली हुई हैं, लेकिन उनका गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।
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- बृजपाल परमार, प्रदेश अध्यक्ष स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन।
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