ढिगावा मंडी। ढिगावा श्यामियान की 10वीं पास सुषमा के मोटे अनाज के पापड़ व मिर्च मसाले घर पर तैयार करने की शुरुआत से लेकर सुषमा फूड इंडस्ट्रीज तक का सफर अन्य महिलाओं के लिए भी मिसाल है। सुषमा को यह प्रेरणा उनके पिता मेहरचंद से मिली। जब इनके पिता एक कंपनी में काम करते थे तो वहां महिलाएं इस तरह के प्रोडक्ट तैयार करती थी।
उन्होंने घर पर आकर बेटी को यह सब सिखाना शुरू किया। उस समय सुषमा 8वीं कक्षा की छात्रा थी। सुषमा का मायका राजस्थान के झुंझनू के गांव लाडूंदा है। सुषमा की शादी सन 2005 में ढिगावा श्यामियान के एक किसान परिवार में कर दी गई थी।
एक साल बीत जाने के बाद सन 2006 में सुषमा के दिमाग में अपने पिता द्वारा मोटे अनाज के पापड़ व मिर्च मसाले घर के लिए बनाने का विचार आया है। सुषमा ने इसे तैयार करना शुरू किया। शुरुआत में जब हाथों से प्रोडक्ट बनाने की शुरुआत की थी तब उन्होंने 10 से 20 किलो मोटे अनाज के पापड़ बनाने का काम शुरू किया था।
सुषमा 18 दिसंबर 2020 में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी। इस दौरान उन्होंने गांव में एक ग्रुप बनाया, जिसका नाम ममता स्वयं सहायता ग्रुप रखा। उन्होंने बताया कि ग्रुप में 10 महिलाएं हैं, उनमें से आज पांच महिलाओं को उन्होंने अपने साथ रोजगार देकर खुद को कुछ करने के काबिल बनाया है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा सरकार के मेलों में ग्रुप की स्टॉल लगाकर अपना प्रोडक्ट बेचने का काम शुरू किया। ग्रुप की सभी महिलाएं अपने घरों में उनके द्वारा तैयार किए गए मिर्च मसाले व पापड़ का उपयोग करती हैं। कई दुकानों से भी उन्होंने अनुबंध किया है। अब महिलाएं इससे लाखों का मुनाफा कमा रही है।
पीएम एफएमई स्कीम के तहत ली मशीन
सुषमा ने बताया कि पीएम एफएमई स्कीम के तहत उन्होंने उत्पादन तैयार करने की मशीन ली है। इसकी कीमत 5 लाख रुपये है। इस मशीन से एक दिन में करीब एक क्विंटल मोटे अनाज के पापड़ तैयार करते हैं। उन्होंने महिलाओं को प्रेरणा देते हुए कहा है कि अच्छा काम करने वाली महिलाएं ग्रुप ऑन से जुड़कर पीएम एफएमई स्कीम से पैसा लेकर अपने खुद के रोजगार को बढ़ावा दे सकती है।
बच्चों को बनाया काबिल
सुषमा बताया कि अपने दोनों बच्चों को इंटरनेशनल लेवल के खिलाड़ी बनना चाहती हैं। बेटी सोनिया 100 मीटर दौड़ में स्टेट लेवल तक खेल चुकी है, तो बेटा कर्ण 1600 मीटर रेस में स्टेट लेवल तक खेल चुका है।