भिवानी। स्थानीय घोसियान चौक के पास न्यू वासकी नाथ रामलीला कमेटी की ओर से जारी रामलीला मंचन के 9वें दिन विभीषण शरणागत, सेतुबंधन, अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति, कुंभकर्ण वध सहित विभिन्न लीलाओं का मंचन किया गया। कुंभकर्ण वध होते ही जहां लोगों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए तो वहीं लक्ष्मण के मूर्छित होने से भावुक हो उठे। मंचन में विभीषण की भूमिका शिव कुमार, निधि की भूमिका सुनील सैनी, मेघनाथ की भूमिका अशोक सैनी ने निभाई। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि वार्ड 11 से पार्षद कर्मवीर यादव एवं पारस डालमिया ने शिरकत की।
प्रधान संजय पंवार, मंच संचालक प्रजापति रत्न तंवर व मीडिया कोऑर्डिनेटर सुरेश सैनी ने बताया कि रामलीला के 9वें दिन दिखाया गया कि जब हनुमान लंका दहन कर वापस भगवान राम के पास आते हैं और उन्हें रावण की लंका में सीता के होने की बात बताते हैं। इस पर राम-लक्ष्मण लंका पर चढ़ाई करने का निर्णय लेते हैं, लेकिन लंका में जाने के लिए रास्ता होने के कारण रामेश्वर में पूजा कर रामसेतु पुल का निर्माण का कार्य शुरु किया जाता है। पुल बनाने के बाद राम-लक्ष्मण सुग्रीव की वानर सेना लेकर लंका पहुंचते है। लंका में पहुंचने के बाद अंगद को शांति दूत बनाकर रावण को समझाने के लिए उसके पास भेजा जाता है, लेकिन रावण सीता को उन्हें वापस सौंपने से मना कर देता है और अंगद रावण की सभा में अपना पैर जमाते हुए सभी योद्धाओं को ललकारता है। अंगद पांव को उठाने के लिए रावण के कई योद्धाओं ने प्रयास किया, लेकिन पांव को हिला तक न सके। इसके बाद खुद रावण आता है और अंगद का पांव उठाने की कोशिश करता है। अंगद ने पांव पीछे खींचकर कहा कि मेरे नहीं जाकर श्रीराम के पैर पकड़ो। बात बनती नहीं देख अंगद की ओर से युद्ध का ऐलान कर दिया गया, जवाब में रावण भी युद्ध का ऐलान कर देता है। इसके बाद युद्ध के लिए रावण राम की सेना आमने-सामने खड़ी होती है। इस दौरान लक्ष्मण के साथ रावण के ज्येष्ठ पुत्र मेघनाथ का भीषण युद्ध हुआ। मेघनाथ ने शक्ति का प्रयोग कर लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया। लक्ष्मण के इलाज के लिए वैद्यराज सुषेण की सलाह पर हनुमान पर्वत से संजीवनी बूटी लेकर आते हैं। उसके सेवन से लक्ष्मण स्वस्थ हो जाते हैं और मूर्छा से उठते ही लक्ष्मण ने अपने दुश्मन को ललकारा। राम ने उन्हें गले लगाकर विलाप किया। फिर लक्ष्मण-मेघनाथ युद्ध शुरू होता है। मेघनाथ वध होते ही पूरा पंडाल एक बार फिर जय श्रीराम के जयकारे से गूंज उठता है। इसके बाद भगवान राम कुंभकर्ण का वध करते हैं। संवाद