रोहतक गेट पर बसों का इंतजार करते लोग, बस स्टैंड पर बसों का इंतजार, सेक्टर मोड़, अनाजमंडी ओवरब्रिज के पास इंतजार करते यात्रियों की भीड़। आज कल यह नजारा आम है। दरअसल रोडवेज कर्मचारियों का ओवरटाइम खत्म करने से बिगड़ी व्यवस्था अभी तक पटरी पर नहीं लौटी है। नई व्यवस्था के चलते हर रोज औसतन 35 कर्मचारी रेस्ट पर रहते हैं। इतने ही कर्मचारी इन दिनों शादी समारोह, सीएल पूरी करने और बीमारियों के चलते अवकाश पर हैं। इतने कर्मचारियों के अवकाश पर जाने से व्यवस्था बेपटरी हो गई है। भिवानी और सब डिपो तोशाम पर करीब 26 बसें बिना कर्मचारियों के खड़ी हैं। वहीं यात्री परेशान। स्टाफ की कमी के कारण हर रोज विभिन्न रूटों पर बसों के टाइम मिस हो रहे है। हाल ही में चार्ज संभालने वाले जीएम गुलाब सिंह ने मुख्यालय में पत्र लिखकर 30 चालक-परिचालक की मांग की है।
सोमवार को भिवानी बस स्टैंड से लोहारू, बहल, ढिगावामंडी, चरखी दादरी, दिल्ली रूट पर दौड़ने वाली बसों के इंतजार में यात्री घंटों बैठे रहे। अग्रसेन चौक व लोहारू रेलवे ओवर ब्रिज अनाज मंडी के सामने भी अधिकांश लोग बस स्टैंड पर जाने की बजाए यहीं से रोडवेज बसें पकड़ते हैं। लेकिन सोमवार को बस स्टैंड से इस रूट पर निकलने वाली सभी बसें ओवरलोड रही। जिसका नतीजा यह हुआ कि अग्रसैन चौक और लोहारू रोड अनाज मंडी के सामने बसों के इंतजार में खड़े लोगों को पायदान पर लटकने का भी मौका नहीं मिला। ग्रामीण व लोकल रूटों पर अधिकांश सफर करने वाले विद्यार्थी ही हैं, क्योंकि उन्हें रोजाना ही सुबह कॉलेज व कोचिंग के लिए भिवानी आना पड़ता है और फिर दोपहर बाद वापस गांव लौटना जरूरी है। इसी वजह से ग्रामीण व लोकल रूट की बसें बस स्टैंड से निकलने से पहले ही भर जाती हैं, जबकि शहर में बनाए गए बस स्टॉप पर खड़े यात्रियों के लिए इनमें कोई जगह नहीं होती। सभी रूटों में कटौती की गई।
यूं बिगड़ी ही स्थिति
भिवानी डिपो में 119 बसें है। 177 रोडवेज परिचालक और 188 के करीब रोडवेज चालक हैं। चालक और परिचालकों के ओवरटाइम खत्म होने के बाद रोजाना ही करीब 35 कर्मचारी रेस्ट पर रहते हैं। जिससे रोडवेज बसें भी खड़ी रह जाती हैं और रूट पर यात्री परेशान हाते रहे। वहीं तोशाम सब डिपो पर 46 बसें है, जिनमें से 33 ही चल रही है। यहां 64 कंडक्टर और 67 ड्राइवर हैं। इनमें से करीब 64 कर्मचारी अवकाश पर चल रहे हैं। दिल्ली रूट पर ही तीन से चार टाइम मिस हो रहे हैं। ऐसा ही हाल अन्य रूटों का है। ग्रामीण रूट ज्यादा प्रभावित है।
छुट्टी के वक्त और भी बिगड़ते हैं हालात
जिस समय स्कूलों, कॉलेजों व कोचिंग सेंटरों की छुट्टी होती हैं, उस समय रोडवेज बसों में व्यवस्था ज्यादा बिगड़ जाती है। ऐसा रोजाना होता है। अन्य सवारियों के साथ ही छात्राएं व छात्र धक्का-मुक्की कर बस में चढ़ने का प्रयास करते हैं। अक्सर विद्यार्थियों के कारण यात्री तो बसों में भी नहीं चढ़ पा रहे। हालात ये रहते हैं कि लड़कियों को भी रोडवेज बस के पायदान पर लटककर ही घर तक का सफर करना पड़ता है।
चालान का नहीं हादसों का डर
पिछले दिनों जागरूकता अभियान के दौरान पुलिस अधीक्षक ने रोडवेज बस चालकों को सीट बैल्ट लगाने और बसों की छतों पर किसी भी यात्री द्वारा सफर नहीं करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद बसों की छतों, खिड़कियों और पीछे सीढ़ियों पर लटककर सफर करते आम देखे जा रहे हैं। मगर यहां हादसों का हमेशा डर रहता है।
रोडवेज विभाग में कर्मचारियों की कमी बनी है। परिवहन मुख्यालय को 30 नए चालक और परिचालक उपलब्ध कराने के लिए पत्र लिखा है। अगर डिपो को ये नए कर्मचारी मिल जाते हैं, तो फिर लोकल व ग्रामीण रूटों पर परिवहन व्यवस्थाएं संतोषजनक हो जाएंगी। फिलहाल रोडवेज विभाग के सामने हालात ठीक नहीं हैं।
- गुलाब सिंह, डिपो महाप्रबंधक, भिवानी।