मंदिर में माता की जलती अखंड ज्योत। संवाद
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चैत्र नवरात्र के सातवें दिन कालरात्रि माता की पूजा हुई। मंदिरों में सामुदायिक दूरी से श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए और माता की पूजा की। वहीं अष्टमी पर मंगलवार को कंजक पूजन होगा। कंजक पूजन की तैयारियों में अभी से श्रद्धालु जुट गए हैं, क्योंकि कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से कोई भी व्यक्ति अपने बच्चों को दूसरों के घर भेजने को तैयार नहीं है। वहीं कंजक पूजन के बिना माता के नवरात्र के दौरान किए गए घट की स्थापना का व्रत भी पूरा नहीं माना जाता है।
सोमवार को शहर के भोजा वाली देवी माता मंदिर, लाइनपार दुर्गा देवी मंदिर में पूजा हुई। वहीं बाबा जहरगिरी आश्रम के महंत अशोक गिरी महाराज ने बताया कि माता का यह स्वरूप कालरात्रि यानी काल को जीतने वाली है। जन्म पालन और काल देवी के तीन रूप हैं। सृष्टि का संयोजन और संचालन इन्हीं की कृपा का फल है। देवी काली की पूजा से अनेक सिद्धियां प्राप्त होती हैं और मनुष्य के सभी कष्ट दूर होते हैं। माता के इस स्वरूप पर यज्ञ से साधक के सभी मनोरथ भी पूर्ण होते हैं। वहीं नवरात्र के सप्तम दिवस पर मंदिरों में आस्था के दीप भी जगमगा उठे।